भारत को डराने के लिए चीन ने लाइव मिलिट्री ड्रिल में दागी 100 बैलेस्टिक मिसाइल
2.3 मिलियन की ताकत वाली चीनी सेना ने किया पिछले वर्ष 100 मिसाइलों के साथ लाइव मिलिट्री ड्रिल में अपनी ताकत का प्रदर्शन। ड्रिल में आर्मी के अलावा नेवी, एयरफोर्स और रॉकेट फोर्स भी शामिल।
बीजिंग। चीन ने हाल ही में रॉकेट फोर्स का गठन किया है और हाल ही में इस फोर्स ने एक, दो नहीं बल्कि 100 बैलेस्टिक मिसाइलों के साथ लाइव मिलिट्री ड्रिल का अंजाम दिया है। चीन की आधिकारिक मीडिया की ओर से इस बात की जानकारी दी गई है। चीन ने अपनी 2.3 मिलियन की ताकत वाली पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए ) को नए ढांचे के साथ और ज्यादा आक्रामक बनाया है।

चीन ने किया हथियारों का प्रदर्शन
पीएलए में चीन की आर्मी, एयरफोर्स, नेवी और रॉकेट फोर्स तीनों ही शामिल हैं। पीएलए की ओर से इस बात की पुष्टि की गई है कि पिछले वर्ष मिलिट्री रिफॉर्म्स के तहत वास्तविक ट्रेनिंग ड्रिल और अभ्यास में तेजी लाई गई है। ये सभी उन प्रयासों का हिस्सा है जिन्हें राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुरू किया था। पीएलए ने चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली को यह जानकारी दी है। चाइना डेली में एक आर्टिकल में बताया गया है कि चीन की मिलिट्री कैसे खुद को बदलने में लगी हुई है। पीएलए की ओर से 15 ब्रिगेड को 100 से ज्यादा ड्रिल में हिस्सा लेने के लिए भेजा गया था। एयरफोर्स ने कम से कम छह बड़ी, लंबी दूरी की ट्रेनिंग ड्रिल को आयोजित किया। यह ड्रिल वेस्टर्न पैसेफिक ओशिन और साउथ चाइना सी पर हुई थी। रॉकेट फोर्स ने 20 से ज्यादा एक्सरसाइज कीं और करीब 100 मिसाइलों को लॉन्च किया। वहीं नेवी ने तीन लाइव फायर एक्सरसाइजेज को आयोजित किया। इसमें तीन फ्लीट्स की सेनाओं ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया था। इसके अलावा चीन ने अपने पहले एयरक्राफ्ट कैरियर लियाओनिंग को भी इस लाइव ड्रिल में शामिल किया। कमीशन होने के चार वर्ष बाद पहली बार इसे किसी ड्रिल में शामिल किया गया था।
146 बिलियन डॉलर खर्च करता चीन
चीन अपनी सेनाओं पर 146 बिलियन डॉलर हर वर्ष खर्च कर रहा है और अपनी सेनाओं को तेजी से आधुनिक बनाने में लगा हुआ है। आर्टिकल के मुताबिक चीन की एयरफोर्स अब वाई-20 स्ट्रैटेजिक ट्रांसपोर्ट प्लेन की डिलीवरी प्लेन की डिलीवरी लेने लगा है। इसके अलावा इसके स्टेल्थ फाइटर जे-20 का भी उत्पादन बड़े स्तर पर शुरू हो गया है। अगली पीढ़ी का स्ट्रैटेजिक बॉम्बर भी एयरफोर्स के लिए तैयार हो चुका है और किसी भी पल इसे दुनिया के सामने लाया जा सकता है। जहां चीन अपने फाइटर जेट्स को खुद डेवलप करने में लगा है तो वहीं इंजन के लिए इसे आज भी रूस पर निर्भर रहना पड़ रहा है। चीन का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर डालियन के शिपयार्ड में तैयार हो रहा है। यह चीन का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा। चीन के लियाओनिंग का कुछ हिस्सा सोवियत यूनियन में तैयार हुआ था। चीन तीसरे कैरियर को तैयार करने पर भी विचार कर रहा है। चीन की रॉकेट फोर्स को पहले स्ट्रैटेजिक फोर्स के तौर पर जाना जाता था। इसने नए तरह की बैलेस्टिक मिसाइल को शामिल किया है जिसके बारे में कोई जानकारी किसी को नहीं है। पीएलए अपने ट्रूप्स की संख्या को भी तीन लाख करने पर विचार कर रही है।












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