भगवान के सहारे कम्युनिस्ट चीन, बेहाल इकोनॉमी से घबराए लोग मंदिरों में कर रहे पूजा-पाठ, बुद्ध की शरण में जनता
चीन की अर्थव्यवस्था लगातार सिकुड़ रही है और अमेरिकी कंपनियां, जो चीन में सबसे ज्यादा निवेश ला रहे थे, वो यूएस से तनाव के बाद चीन छोड़ रहे हैं, जिससे चीनी बाजार पर गहरा असर पड़ना शुरू हो गया है।

China Economy Divine Intervention: चीन भले ही अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर अलग अलग दावे कर रहा है, लेकिन देश के अंदर से तस्वीरें आ रही हैं, उसे देखकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
चीन का कोविड संकट के बाद फिर से खुलना, माना जा रहा था कि वो जल्द ही अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार के रास्ते पर बढ़ निकलेगा, लेकिन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में वृद्धि ठप होती दिख रही है।
बिगड़ते आर्थिक हालातों की वजह से लोगों का कम्युनिस्ट सरकार से मोहभंग हो रहा है और युवा लोग बौद्ध और ताओवादी मंदिरों में नौकरियों को हासिल करने, अच्छे स्कूलों में प्रवेश पाने या रातोंरात अमीर बनने के लिए प्रार्थना करने के लिए बाढ़ की तरह पहुंच रहे हैं।
मंदिरों में उमड़ रही भारी भीड़
इस सप्ताह जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है, कि चीनी निर्यात मई में एक साल पहले की तुलना में 7.5% गिर गया है, जो कम्युनिस्ट सरकार की उम्मीदों से काफी कम है।
चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर ही टिकी हुई है और ताज आंकड़ों से पता चलता है, कि पिछवे महीने फैक्ट्रियों का प्रोडक्शन और कम हो गया है, जिसकी वजह से भारी संख्या में लोगों की नौकरियां जा रही हैं।
चीन की ट्रेवल वेबसाइटों के मुताबिक, आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बनने के बाद देश के मंदिरों में भारी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं, जिससे देश के पर्यटन सेक्टर में उछाल आया है।
मार्च से सोशल मीडिया पर "नो स्कूल गोइंग, नो हार्ड वर्किंग, ओनली अगरबत्ती" नाम से हैशटैग चीनी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें चीन के युवाओं को अपने भविष्य को लेकर काफी घबराया हुआ देखा गया है और वो भगवान बुद्ध के मंदिरों में भारी तादाद में अगरबत्तियों के साथ पहुंच रहे हैं, जिससे मंदिरों में भारी भीड़ होने लगी हैं।
चीन सरकार के सांख्यिकी विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चीन में 16 साल से 24 साल तक युवाओं का बेरोजगारी दर बढ़कर 20.4 प्रतिशत हो गया है।
वहीं, युवा बेरोजगारी की दर और भी बदतर हो सकती है क्योंकि रिकॉर्ड एक करोड़ 16 लाख नये कॉलेज छात्र इस बाजार में नौकरी के लिए पहुंचने वाले हैं, जैसा की चीन की सांख्यिकी मंत्रालय ने इस साल की शुरूआत में अनुमान लगाया था।
चीन के सोशल मीडिया अकाउंट वीबो पर देखा जा रहा है, कि लोग विभिन्न मंदिरों में पूजा पाठ के लिए पहुंच रहे हैं। बीजिंग में योंगहे मंदिर, जिसे लामा मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म की आस्था के हिसाब से बना है, वो मंदिर करियर या वित्तीय सफलता की तलाश करने वालों के लिए एक लोकप्रिय स्थल बन गया है।
क़ुनर के अनुसार, मार्च और अप्रैल की शुरुआत में देश के किसी भी मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 530 प्रतिशत ज्यादा है।

आधिकारिक तौर पर नास्तिक देश है चीन
चीन आधिकारिक तौर पर एक नास्तिक राष्ट्र है, लेकिन यह पांच धर्मों को मान्यता देता है, बौद्ध धर्म, ताओवाद, प्रोटेस्टेंटवाद, कैथोलिकवाद और इस्लाम। देश भर में हजारों मंदिरों और मठों के साथ पहले दो धर्म चीनी संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।
ट्रेवल वेबसाइट कुनर और ट्रिप डॉट कॉम के हालिया आंकड़ों के अनुसार, इस साल मंदिर के दर्शन एक साल पहले की तुलना में चार गुना से ज्यादा लोग बढ़ गए हैं। साइटों के अनुसार, मंदिरों में पहुंचने वाले लोगों में ज्यादातर की उम्र 20 से 30 साल के बीच है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी ब्रोकरेज फर्म नानजिंग सिक्योरिटीज के एक विश्लेषक यांग यान ने कहा, कि "स्कूल, नौकरी, शादी और रिश्तों के दबाव में, अधिक से अधिक युवा तनाव दूर करने के लिए मंदिर में प्रार्थना और आशीर्वाद जैसी पारंपरिक संस्कृति की ओर रुख कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, कि सोशल मीडिया ने भी मंदिर पर्यटन में उछाल को बढ़ावा दिया है, क्योंकि युवा लोग सोशल नेटवर्क पर अपने अनुभव साझा करना पसंद करते हैं।
एमी और जिउहुआ चीन के दो प्रसिद्ध "बौद्ध धर्म के चार पवित्र पर्वत" हैं, जहां देश के सबसे बड़े बौद्ध मंदिर और सांस्कृतिक विरासत स्थल हैं।
दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में एमी माउंटेन पर जनवरी और मई के बीच करीब 25 लाख युवा श्रद्धालु पहुंचे हैं, जो कोविड आने से पहले जनवरी 2019 के मुकाबले 53 प्रतिशत ज्यादा है।
एमेई शान टूरिज्म, जो पहाड़ के चारों ओर यात्रा सेवाएं प्रदान करता है, उसने पहली तिमाही में 9.8 मिलियन डॉलर का शुद्ध लाभ रिकॉर्ड किया है। पिछले 10 कारोबारी सत्रों में इसका स्टॉक 44% से ज्यादा बढ़ गया, इस अवधि के दौरान चीनी शेयर बाजारों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से एक बन गया।
Anhui Jiuhuashan पर्यटन विकास, जो केंद्रीय Anhui प्रांत में Jiuhua पर्वत दर्शनीय क्षेत्र चलाता है, उसने भी त्रैमासिक बिक्री के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

मंदिरों में भाग्य तलाशते देश के युवा
युवाओं का कहना है, कि वो अपने कैरियर के लिए भगवान की शरण में हैं और प्रार्थना कर रहे हैं, कि देश की इकोनॉमी सही हो जाए।
इसके अलावा, जुआ खेलने वालों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी हुई है और लोग आर्थिक संकट के बीच अपनी बची खुची जमा पुंजी के साथ जुआ खेलकर रातों-रात अमीर बनने की कोशिश भी कर रहे हैं।
1949 में सत्ता में आने पर कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन में जुए पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन सरकार खेल आयोजनों और कल्याणकारी परियोजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए दो प्रकार की लॉटरी चलाती है।
वित्त मंत्रालय द्वारा मई के अंत में जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में लॉटरी की बिक्री 50.33 अरब युआन (7.1 अरब डॉलर) तक पहुंच गई, जो एक साल पहले की तुलना में 62% ज्यादा है। यह अप्रैल महीने में एक दशक में सबसे ज्यादा बिक्री है।
हांग्जो स्थित कैटॉन्ग सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने रविवार को एक शोध रिपोर्ट में लिखा, "यह स्पष्ट रूप से एक वास्तविक जीवन प्लेसबो इफेक्ट है।" आपको बता दें, कि प्लेसबो इफेक्ट मेडिकल क्षेत्र में कई बार अपनाया जाता है, जिसमें मरीज को डमी गोली दी जाती है, ताकि उसे लगे, कि वो दवा खाकर ठीक हो रहा है।
विश्लेषकों ने कहा कि अनिश्चित आर्थिक समय के दौरान, ज्यादातर लोग आस्था या अन्य आरामदायक गतिविधियों जैसे कि लॉटरी टिकट खरीदना, पालतू जानवरों को पालना, संगीत कार्यक्रम में भाग लेना या एनीमे या कॉमिक्स जैसे शौक पर समय बिताना पसंद कर रहे हैं।
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