China Defence Budget: डिफेंस पर 700 अरब डॉलर का खर्च! धोखा दे रहा या दुनिया को चेतावनी दे रहा चीन?
China Defence Budget News: माना जाता है, कि चीन आधिकारिक तौर पर जितना डिफेंस बजट बताता है, उससे कहीं ज्यादा वो खर्च करता है।
यह एक स्पष्ट वास्तविकता भी है, क्योंकि जिस रफ्तार से वे डिफेंस सैटेलाइट्स को लॉन्च कर रहे हैं, दुनिया की सबसे बड़ी सेना बनाए हुए हैं, एयरक्राफ्ट कैरियर सहित दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का निर्माण कर रहे हैं, हर साल पीएलए वायु सेना (PLAAF) के बेड़े में करीब 60 स्टील्थ J-20 फाइटर जेट जोड़ रहे हैं और उनके पास जल्द ही एक स्टील्थ बॉम्बर भी होगा, उससे पता चलता है, कि जितना बजट चीन दिखाता है, उतने में इतना सबकुछ होना संभव नहीं है।

चीन रक्षा से संबंधित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म और ऑटोमेटिक प्रणालियों में भी आगे बढ़ रहा है।
चीन का "आधिकारिक" रक्षा खर्च धीरे-धीरे बढ़ रहा है और यह अमेरिकी बजट का लगभग एक तिहाई है। लेकिन हाल ही में, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और कई विश्लेषकों ने चीन के छिपे हुए रक्षा खर्च के बारे में खुलकर बात करना शुरू कर दिया है और ऐसी संभवना है, कि चीन का वास्तव में डिफेंस बजट, अमेरिकी डिफेंस बजट के बहुत करीब पहुंच गया है।
ऐसे में कई सवाल उठते हैं और सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये है, कि क्या चीनी डिफेंस बजट को लेकर जो आर्टिकिल लिखे जाते हैं, क्या वो बढ़ा-चढ़ाकर बाए गये होते हैं और क्या इसके पीछे छिपा हुआ मकसद होता है? और क्या ऐसे आंकड़ों का इस्तेमाल, देशों में असुरक्षा की भावना पैदा करने और उन्हें रक्षा बजट बढ़ाने के लिए जनता और राजनीतिक राय को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है?
क्या ये लेख, अमेरिकी रक्षा बिक्री को बढ़ाने के लिए लिखवाए जाते हैं? क्या अमेरिका सहित अन्य देशों में भी इसी तरह के छिपे हुए खर्च नहीं हैं? जो भी हो, इन छिपे हुए अनुमानों ने अमेरिकी कांग्रेस, मीडिया और रक्षा हलकों में हलचल मचा दी है। और इसे समझने की जरूरत है।
चीन के वास्तविक डिफेंस खर्च को जानना मुश्किल
चीन एक ऐसा देश है जिसका नेतृत्व एक निरंकुश नेता और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) द्वारा किया जाता है। चीनी लोगों पर लगातार निगरानी रखी जाती है। जनता को वही बताया जाता है, जो CCP उन्हें बताना चाहता है। देश के बाहर ज्यादा जानकारी नहीं जाती।
इन दिनों, कई डबल यूज वाली तकनीकों को आसानी से नागरिकों की सर्विलांस के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चीन नागरिक-सैन्य संलयन के तहत कई कार्यक्रम भी चलाता है और अर्धसैनिक और मिलिशिया से संबंधित बहुत ज्यादा खर्च करता है। रक्षा अनुसंधान और विकास (R&D) खर्च में भी चीन लगातार पैसे बहा रहा है।
चीन में रक्षा उत्पादन, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की तुलना में बहुत सस्ता है क्योंकि यहां कम वेतन वाले श्रमिक हैं, जिससे उन्हें काफी फायदा मिलता है।
चीन में सैन्य कर्मियों को अमेरिका की तुलना में बहुत कम वेतन और भत्ते मिलते हैं। विश्लेषकों ने चीनी रक्षा बजट को क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity-PPP) के अनुसार समायोजित किया है, जिसके परिणामस्वरूप 2024 का आधिकारिक चीनी रक्षा बजट 232 बिलियन डॉलर से बढ़कर $474 बिलियन डॉलर हो गया है।

और अन्य मंत्रालयों और संस्थाओं की तरफ से रक्षा-संबंधी खर्च के आंकड़ों को जोड़ने पर यह आंकड़ा लगभग 711 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। और इस तरह से चीन का रक्षा खर्च, अमेरिकी रक्षा खर्च के काफी नजदीक पहुंच गया है। चीनी सैन्य बजट से बाहर रखे गए क्षेत्रों में अर्धसैनिक संगठन, मिलिट्री रिसर्च एंड डेवलपमेंट, चल रहे सैन्य अभियान और दक्षिण चीन सागर में बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं।
चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम भी अत्यधिक सैन्य-केंद्रित है। दूसरी तरफ, अमेरिका एक वैश्विक पुलिसकर्मी के रूप में कार्य करता है और दुनिया भर में सुरक्षा प्रतिबद्धताएं रखता है, और इन्हें पूरा करने के लिए अपने रक्षा बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खर्च करता है।
अमेरिका का रक्षा बजट कितना हो सकता है?
लेकिन, इस आधार पर कई लोगों का मानना है, कि अगर 2024 के लिए अमेरिकी बजट पर भी इसी तरह का पैमाना लागू किया जाए, तो यह खर्च 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकता है। लिहाजा, मिलिट्री और इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी की स्थिति के साथ-साथ रक्षा खर्च का सही अनुमान लगाना वर्तमान और भविष्य की सैन्य क्षमताओं को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के विपरीत, जहां बजट संसद में पेश किया जाता है, उसपर बहस होते हैं और संसद में बजट को पेश किया जाता है, जिसका लाइव प्रसारण किया जाता है, उसके मुकाबले, चीन का सैन्य बजट हर साल सरकारी मीडिया के माध्यम से जारी किया जाता है। जबकि, अमेरिका का रक्षा बजट पेंटागन हर साल हजारों पन्नों का भारी-भरकम दस्तावेज बनाकर सार्वजनिक करता है।
चीन का छिपा हुआ सैन्य खर्च
चीन ने आखिरी बार साल 2020 में संयुक्त राष्ट्र को अपने सैन्य बजट का तीन श्रेणियों में विस्तृत ब्योरा दिया था। यह ब्योरा कर्मियों (वेतन और भत्ते) के लिए लगभग 30 प्रतिशत, प्रशिक्षण और रखरखाव (राजस्व) के लिए 33 प्रतिशत और नए उपकरणों (पूंजी) के लिए 37 प्रतिशत था।
चीनी सैन्य बजट से वास्तविक सैन्य गतिविधियों को बाहर रखना आम बात है। पेंटागन से जुड़े थिंक टैंक का मानना है, कि बीजिंग अर्धसैनिक संगठनों, सैन्य अनुसंधान और विकास और कई चल रहे सैन्य अभियानों के लिए रक्षा बजट निधि को इसमें शामिल नहीं करता है। इसके अलावा, चीन अपने डिफेंस खर्च को नागरिक मंत्रालयों के माध्यम से प्रसारित करके जारी करता है, जिसमें पारदर्शिता की भारी कमी होती है।
चीनी कोस्ट गार्ड, दक्षिण चीन सागर (SCS) में भी एक्टिव है और इसके पास सैकड़ों जहाज हैं, जिनमें कुछ पूर्व-पीएलए नौसेना के रिफिटेड टाइप 056 कोरवेट भी शामिल हैं।
इसके अलावा, अनुमानित 2.1 बिलियन डॉलर का तटरक्षक बल बजट रिपोर्ट किए गए रक्षा बजट का हिस्सा नहीं है। पीपुल्स आर्म्ड पुलिस (पीएपी), सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के अंतर्गत आती है, लेकिन इसका खर्च भी रक्षा व्यय का हिस्सा नहीं है। घरेलू सुरक्षा के अलावा, पीएपी को आधिकारिक तौर पर युद्ध के समय पीएलए को बढ़ाने का काम सौंपा गया है। पीएपी का वर्तमान खर्च करीब 50 बिलियन डॉलर है।
वहीं, एक अन्य महत्वपूर्ण छिपा हुआ व्यय सैन्य अनुसंधान और विकास (R&D ) है। कुछ शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है, कि चीनी सरकार के R&D खर्च का लगभग आधा हिस्सा सैन्य-संबंधित संस्थाओं के लिए है, जो 50 बिलियन डॉलर के करीब हो सकता है।
चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम अत्यधिक सैन्य-केंद्रित है। पीएलए सैन्य और नागरिक दोनों अंतरिक्ष गतिविधियों को संभालता है। आधिकारिक अंतरिक्ष खर्च 16 बिलियन डॉलर के करीब है, लेकिन वास्तविक अनुमान लगभग 25 बिलियन डॉलर है।

दुनिया के अलग अलग देशों का सैन्य खर्च
2023 में वैश्विक सैन्य खर्च अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें अमेरिका, चीन और रूस शीर्ष तीन खर्चकर्ता देश थे। रूस का सैन्य खर्च 2024 में तेजी से बढ़ने वाला है और इसकी वजह यूक्रेन युद्ध है।
वहीं, नाटो के सदस्य, खास तौर पर यूरोपीय देशों ने अपने सैन्य खर्च में वृद्धि की है, जिसमें अमेरिका सबसे बड़ा खर्चकर्ता बना हुआ है। भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस सहित चीन के पड़ोसी देश चीन के साथ बढ़ते सैन्य शक्ति अंतर को कम करने के लिए अपने रक्षा बजट में वृद्धि कर रहे हैं।
भारत को बौद्धिक संपदा हासिल करने और अपनी सेना को आधुनिक बनाने के लिए अनुसंधान और विकास पर खर्च बढ़ाने की जरूरत है। भारत में संख्या और आधुनिकीकरण का अभाव है, जिसमें लड़ाकू स्क्वाड्रन, हेलीकॉप्टर, पनडुब्बियां, युद्धपोत, टैंक, तोपें और मानव रहित प्रणालियों की कमी शामिल है। भारत को अगले एयरक्राफ्ट कैरियर पर फैसला लेने की जरूरत है और युद्ध सामग्री का भंडार बनाना चाहिए। अगले दो दशकों के लिए भारतीय सेना के लिए आवंटन सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 2.5% होना चाहिए।
चीन अपने नजदीकी पड़ोस पर ध्यान केंद्रित करता है और वैश्विक स्तर पर अपने प्रभाव का विस्तार करने के लिए बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव जैसी पहलों का उपयोग करता है। हालांकि, चीन की दीर्घकालिक वैश्विक महत्वाकांक्षाएं हैं। वैश्विक सैन्य व्यय में वृद्धि दुनिया भर में बढ़ते तनाव को दर्शाती है। भविष्य के संघर्षों के बारे में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच देश अपनी सुरक्षा बढ़ा रहे हैं।












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