ब्रिटिश आर्मी ने अफगानिस्तान में मारे थे 64 मासूम बच्चे, छिपाकर रखी जानकारी, बोलते रहे झूठ

अफगानिस्तान से पिछले साल अमेरिकी सेना निकल गई थी और उसके बाद देश पर एक बार फिर से तालिबान का कब्जा हो गया है।

Afghanistan

UK army Afghanistan: अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशंस के दौरान ब्रिटेन की सेना ने 64 मासूम बच्चों की हत्या की थी और उसकी जानकारी छिपाकर रखी थी। एक नई रिपोर्ट में ब्रिटिश आर्मी को लेकर ये बड़ा खुलासा किया गया है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश सेना ने अफगानिस्तान में 64 बच्चों की मौत के लिए मुआवजे का भुगतान किया है, जबकि ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने सार्वजनिक तौर पर सिर्फ 16 बच्चों की मौत की बात ही स्वीकार की है। यानि, ब्रिटिश सरकार ने जितने बच्चों की मौत को स्वीकार किया है, उससे चार गुना ज्यादा बच्चों की मौत के लिए मुआवजे का भुगतान किया है।

2006-14 के बीच मारे गये 64 बच्चे

2006-14 के बीच मारे गये 64 बच्चे

यूनाइटेड किंगडम स्थित चैरिटी एक्शन ऑन आर्म्ड वायलेंस (एओएवी) ने पाया कि, ब्रिटिश सरकार ने मारे गए प्रत्येक बच्चे के मुआवजे के रूप में औसतन 1,656 पाउंट यानि,1,894 डॉलर (करीब डेढ़ लाख रुपये- आज के हिसाब से) का भुगतान किया। इस रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2006 से 2014 के बीच "अफगानिस्तान में 64 बच्चे ब्रिटिश आर्मी के हाथों मारे गये थे और उनके परिवारों को ब्रिटिश आर्मी ने मुआवजा दिया था, हालांकि हकीकत में मारे गए बच्चों की संख्या 135 तक हो सकती है"। इसके अतिरिक्त, एओएवी ने पाया कि, अप्रैल 2007 और दिसंबर 2012 के बीच 38 अलग अलग घटनाओं में कुल 64 बच्चों की मौत हुई। ब्रिटिश आर्मी के हाथों जो बच्चे मारे गये, उनकी औसत उम्र 6 साल थी और सबसे ज्यादा बच्चों की मौत एयरस्ट्राइक में हुई।

ब्रिटेन ने दुनिया से छिपाया सच

ब्रिटेन ने दुनिया से छिपाया सच

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने नई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, "संघर्ष के दौरान किसी भी नागरिक की मौत एक त्रासदी है, खासकर तब जब इसमें बच्चे और परिवार के सदस्य शामिल हों"। मंत्रालय ने आगे कहा कि, "यूके सशस्त्र बल उस जोखिम (आम नागरिकों की मौत) को कम करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता है।" ब्रिटिश आर्मी ने मुआवजे के तौर पर कुल भुगतान 144,593 पाउंड ($165,332) का भुगतान किया था, लेकिन रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें वयस्कों की मौत भी शामिल है।

हर किसी को नहीं मिला मुआवजा

हर किसी को नहीं मिला मुआवजा

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटिश आर्मी के हाथों से मारे गये परिवारों के पीड़ितों को मुआवजा मिलने से पहले मृतक का जन्म प्रमाण पत्र दिखाना पड़ता था और ब्रिटिश आर्मी के सामने ये पुष्टि करना पड़ता था, कि उनका तालिबान के साथ कोई संबंध नहीं है। वहीं, रिपोर्ट में खुलासा हुआ है, कि "एसीओ (एलाइड कमांडर ऑपरेशंस) के पास मुआवजे के लिए 881 घातक दावें लाए गये थे, जिनमें से ज्यादा सिर्फ एक चौथाई दावों को ही मुआवजा दिया गया, जबकि बाकी दावों को खारिज कर दिया गया"। वहीं, एक्शन ऑन आर्म्ड वायोलेंस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इयान ओवरटन ने कहा कि, "हेलमंड में ब्रिटिश सैन्य कार्रवाई के बाद मारे गए बच्चों की संख्या को लेकर हमें शोक प्रकट करना चाहिए"। उन्होंने कहा कि, "युद्ध बेशक मौत की तरफ ले जाता है और आधुनिक युद्ध हमेशा से नागरिकों की मौत का कारण बना है, लेकिन ऐसी मौतों पर रिपोर्टिंग नहीं होना, चाहे इन मौतों के लिए खुद सैनिकों को ही क्यों ना अफसोस हो, फिर भी ऐसी मौतों का सामने ना आ पाना, सच्चाई का मरना है।"

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