ब्रिक्स देशों के सामने पुतिन की अजीबोगरीब मांग, भारत-चीन टेंशन में
मॉस्को। चीन के शियामेन शहर में सोमवार से ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत करेंगे। ब्रिक्स समेल्लन से पहले रूस ने ब्रिक्स देशों को बहुराष्ट्रीय कंपनियो पर प्रतिबंध लगाने वाली नीतियों के खिलाफ खड़े होने के लिए आग्रह किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अनुसार, ब्रिक्स देश पश्चिमी देशों के भरोसे रहने के बजाय अपने स्तर पर काम करें।

पुतिन चाहते हैं कि ब्रिक्स (ब्राजील,रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देश बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भरोसे ना रहकर अपने स्तर पर काम करना शुरू करें। पुतिन ने कहा कि साइबर सिक्योरिटी के लिए सब देश अपने हिसाब से सोचें।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि रूस की इस पहल का मकसद बेहतर प्रतियोगिता के लिए BRICS देशों की एकाधिकार-विरोधी एजेंसियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने वाले प्रभावशाली तंत्र का निर्माण करना है। भारत और चीन लगभग हर रोज बहुराष्ट्रीय कंपनियों से डील करती है। ऐसे में ब्रिक्स के दो मुख्य सदस्य भारत और चीन जैसे देशों को इससे आपत्ति हो सकती है।
चीनी मीडिया पीपुल्स डेली ने एक आर्टिकल छापा है, जिसमें पुतिन ने कहा, 'हमारा उद्देश्य प्रतिबंधित व्यापारिक कार्यों के खिलाफ काम करने के लिए सहयोगी उपायों का पैकेज तैयार करना है'। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि रूस खुद फंसा हुआ है और कई पश्चिमी कंपनियों ने रूस पर प्रतिबंध लगाने की वजह से वे इस तरह के बयान दे रहे हैं।
दरअसल, भारत अपनी साइबर सिक्योरिटी के लिए अधिकतर पश्चिमी कंपनियों पर निर्भर है। भारत की अधिकतर आईटी कंपनियों का समझौता कई विदेशी कपंनियों के साथ हो रखा है। ऐसे में पुतिन चाहते हैं कि ब्रिक्स देश पश्चिमी देशों के भरोसे और उनकी तकनीक के सहारे रहने के बजाय अपने स्तर पर साइबर सिक्योरिटी पर काम करें।












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