Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

ब्लॉग: भारत के नेता फैसला करें पाकिस्तान का असल यार कौन है

नरेंद्र मोदी, नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान, भारत
Reuters
नरेंद्र मोदी, नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान, भारत

बात इतनी पुरानी नहीं है लेकिन 24 घंटे वाले मीडिया और उससे भी ज्यादा रफ़्तार से चलने वाले सोशल मीडिया ने हमारी इस याददाश्त को कमज़ोर कर दिया है इसलिए याद दिलाते चलें कि एक जमाना था पाकिस्तान के एक बहुत लायक प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ हुआ करते थे.

विदेश मंत्री भी वही थे. उनके पीछे भारी भरकम जनादेश था.

एक दिन खबर मिली कि 56 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके घर एक समारोह में पहुंच गए. साड़ियों और दुपट्टों का लेन-देन हुआ. एक शाम के लिए लगा कि कुछ कूटनीति जैसी चीज़ शुरू होने जा रही है.

शाम अभी ढली भी नहीं थी कि एक टीवी चैनल पर एक लाहौरी रिपोर्टर आया. वह कानों को हाथ लगाकर ईश्वर से माफ़ी मांगता जाता था और हमें बताता जाता था कि देखो इतने हिंदुस्तानी लाहौर एयरपोर्ट पर उतर गए. उनको वीज़ा किसने दिया और उनका कस्टम किसने किया?

रिपोर्टर की बेताबियां देखकर ऐसा लगा कि जैसे एक पड़ोसी मुल्क का प्रधानमंत्री यहां दावत पर नहीं आया बल्कि मंगल से किसी प्रजाति ने लाहौर पर हमला कर दिया है. लाहौर वालों को समझ नहीं आ रहा था कि वो उन्हें शाही किले में बंद कर दे या फूड स्ट्रीट के चक्कर लगवाए.

भाजपा को चुनावों में पाकिस्तान क्यों याद आता है?

मणिशंकर अय्यर के घर हुई कथित 'गुप्त' बैठक का सच!

नरेंद्र मोदी, नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान, भारत
AFP
नरेंद्र मोदी, नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान, भारत

56 इंच की छाती

उस दिन के बाद से हमारे मीडिया में हमारे धर्मों में और हमारे राष्ट्रवादी विश्लेषणों में नवाज़ शरीफ़ को मोदी का यार ठहराया जाने लगा. देखो, नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ जब भी कोई आंदोलन खड़ा होने लगता है या कोई केस बनने लगता है तो मोदी सरहद पार से एक नया फ्रंट खोल देते हैं.

नवाज शरीफ को घर पहुंचाने के लिए मोदी की यारी के इल्ज़ाम की ज़रूरत नहीं थी इसके लिए उनके अपने अकाउंटेंट और वकील ही काफी थे.

मोदी ने कभी पीछे मुड़कर अपनी जाती उम्र के मेजबानों की तरफ नहीं देखा और पूरी दुनिया में नए यार बनाने चल पड़े. दुनिया का कौन ऐसा बड़ा नेता है जो उनकी 56 इंच की छाती वाली झप्पी में कसमसाया न हो.

काश, दुनिया में नेताओं ने मुन्नाभाई एमबीबीएस देखी होती तो उन्हें समझ आता कि मोदी जादू की झप्पी डालकर दुनिया के सारे मसले हल करने की कोशिश कर रहे हैं.

यहां पाकिस्तान में नवाज़ शरीफ पहले नेता नहीं जिन पर दुश्मन से यारी का इल्ज़ाम लगा हो. बेनज़ीर भुट्टो तो बचपन से ही सिक्योरिटी के लिए खतरा थी. पख़्तूनख़्वा, सिंध और बलूचिस्तान में सारे राष्ट्रवादियों की शुरू से प​रवरिश करती रहीं. अब इमरान ख़ान के आलोचक भी उनके पुराने ससुराल के जरिए यहूदी लिंक तलाश करते हैं.

एजेंट होने का इल्जाम

हमारे धार्मिक नेताओं पर कभी सऊदी अरब तो कभी ईरान और कभी अपने तालिबान भाइयों का एजेंट होने का इल्जाम लगता रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी लगता है सिर्फ चंद घंटों की लाहौरी मेहमानवाजी से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को मुल्क का गद्दार बनाने का हुनर सीख गए हैं.

जिस राज्य गुजरात को प्रयोगशाला बनाकर अपने दुश्मनों को भस्म करने का गुर उन्होंने सीखा था वहां पर उन्हें एक मुश्किल चुनाव का सामना करना पड़ा तो इल्जाम लगा दिया कि कांग्रेस और भारत के पूर्व सेना अध्यक्ष पाकिस्तान के साथ मिलकर उन्हें चुनाव हराने की साजिश कर रहे हैं.

नरेंद्र मोदी पहले भी अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए काफी रंगीन भाषा का उपयोग करते रहे हैं. राहुल गांधी को विलायती बछड़ा और उनकी मां को न प्रकाशित किए जाने वाले नामों से याद करते रहे हैं.

ज़बान के चटखारे के मामले में वो कभी-कभी पाक में मुजाहिदों के नेता खादिम रिज़वी की तरह लगते हैं. लेकिन, लगता है यहां भी भारत हमसे बाज़ी मार गया है. हमारे नेता तो एक इस्तीफे पर और एक हजार के नोट वाले लिफाफे पर राज़ी हो गए थे.

मोदी महात्मा गांधी के विचारों को तो कब के दफ़न कर चुके. अब इंदिरा गांधी की आने वाले नस्लों को भी घर तक पहुंचाने पर तुले हैं.

नरेंद्र मोदी, नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान, भारत
Getty Images
नरेंद्र मोदी, नवाज़ शरीफ, पाकिस्तान, भारत

दावत उड़ाने कौन आया था?

एक दफा गद्दार कहने की बीमारी शुरू हो जाए तो ये इतनी तेजी से फैलती है जैसे मुर्गियों में कोई महामारी फैलती हो. मोदी के इल्ज़ाम की गूंज अभी खत्म नहीं हुई थी कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह बयान दे डाला कि ये बताओ कि नवाज़ शरीफ के घर दावत उड़ाने कौन गया था.

पठानकोट में पाकिस्तानी खुफिया संस्थानों को किसने रास्ता दिया था. यानी असली पाकिस्तानी एजेंट तो मोदी बने. मोदी ने अपने आरोपों में किसी पूर्व फौजी के फेसबुक पोस्ट का हवाला भी दिया है.

उनसे यही कहा जा सकता है कि अगर राष्ट्र की तकदीर के फैसले रिटायर फौजियों की फेसबुक पर लिखी पोस्ट से हो तो मुश्किल हो सकती है. क्योंकि उनके मुताबिक लाल किला आज फतह हुआ या कल हुआ.

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बयान दे दिया कि भारत पाकिस्तान को अपने अंदरूनी मामलों में न घसीटे. हमसे अपने मामले ही नहीं संभाले जाते.

काश, बयान में यह भी कह देते कि हिंदुस्तानी नेता आपस में फैसला कर लें कि पाकिस्तान का असल यार कौन है ताकि अगली बार गलत बंदे को दावत पर न बुलाया जाए.

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+