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चीन के कई बड़े औद्योगिक शहरों पर सदी का सबसे बड़ा खतरा, एक तिहाई अर्थव्यवस्था हो सकती है चौपट

चीन के शंघाई समेत कई प्रमुख शहरों पर सदी का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है, जिससे चीन की जीडीपी को एक तिहाई से ज्यादा नुकसान की आशंका है।

बीजिंग, जून 26: चीन के कई प्रमुख औद्योगिक शहरों को लेकर बेहद सनसनीखेज दावा किया गया है। दावा किया गया है कि चीन के सबसे बड़े औद्योगिक शहर शंघाई समेत कई और प्रमुख औद्योगिक शहरों पर भारी संकट मंडरा रहा है और अगर वास्तव में चीन इन संकट में घिरता है तो उसकी अर्थव्यवस्था को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। फाइनेंसियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पूर्वी तटों पर जल्द ही समुद्र का रौद्र रूप बरसने वाला है, जिससे चीन के बड़े बड़े औद्योगिक शहर बर्बाद हो जाएंगे। जिसमें शंघाई भी शामिल है, जो चीन की अर्थव्यवस्था में 974 बिलियन डॉलर का योगदान देता है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन पर बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है और ये एक ऐसा संकट है, जो कुदरती है और इसे रोकना चीन के हाथों में नहीं होगी।

तटीय औद्योगिक शहरों पर बड़ा खतरा

तटीय औद्योगिक शहरों पर बड़ा खतरा

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पूर्वीय तटीय शहरों पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है और अगले कुछ सालों में चीन पर इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा। रिपोर्ट में जब चीन की जनसंख्या और जीडीपी को समुद्री लेवल बढ़ने के साथ जोड़ा गया और फिर रिपोर्ट तैयार की गई, तो पता चला है कि चीन बहुत बड़े खतरे में घिर चुका है। रिपोर्ट से पता चला कि चीन के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में काफी तेज समुद्री ज्वार आएगा और उन शहरों में औद्योगिक उत्पादन पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा। फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2100 के आते आते चीन के बड़े बड़े औद्योगिक शहरों पर समुद्री बाढ़ और ज्वार की वजह से ताला पड़ जाएगा। बचने का एक ही रास्ता है, वो है ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करके क्लाइमेट चेंज को रोकना, जो संभव नहीं है।

शंघाई में उद्योग होंगे खत्म !

शंघाई में उद्योग होंगे खत्म !

शंघाई शहर, चीन का सबसे बड़ा आर्थिक शहर माना जाता है और वहां पर चीन की बड़ी बड़ी प्रतिष्ठित कंपनियां हैं। शंघाई शहर यांग्ज़ी नदी और हांग्जो बे के बीच स्थिति है और समुद्री बाढ़ और ज्वार की चपेट में आने वाला ये सबसे पहला और बड़ा शहर होगा। साल 2019 के आंकड़ों के मुताबिक शंघाई शहर से चीन करीब 974 बिलियन डॉलर का व्यापार करता है, जो चीन की जीडीपी का बड़ा हिस्सा है और समुद्री बाढ़ की चपेट में सबसे पहले ये शहर आएगा। शंघाई के बाद सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है सूज़ौ और जियाक्सिंग पर। ये दोनों शहर शंघाई से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित हैं। चीन में औद्योगिक रैंकिंग के हिसाब से 34 शहरों में से इन दोनों शहर को दूसरे और तीसरे स्थान पर रखा गया है। सूजौ शहर से चीन की जीडीपी को 330.4 बिलियन डॉलर मिलता है तो जियाक्सिंग शहर से चीनी की जीडीपी को 128.8 बिलियन डॉलर मिलता है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि शंघाई के बाद चीन के ये दोनों शहर समुद्री बाढ़ और ज्वार की चपेट में आने से पूरी तरह से खत्म हो सकते हैं। यानि, इन तीनों शहरों से व्यापार करना संभव नहीं रह जाएगा।

घनी आबादी वाले शहरों पर खतरा

घनी आबादी वाले शहरों पर खतरा

सिर्फ शंघाई, सूज़ौ और जियाक्सिंग पर ही समुद्री बाढ़ और ज्वार का असर नहीं पड़ेगा। इन शहरों के साथ ही चीन के कई घनी आबादी वाले विकसित शहर, चीन की औद्योगिक आपूर्तियों को पूरा करने वाले शहर और टेक्नोलॉजी से उन्नत शहरों पर भी भयानक असर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक सुजो प्रांत में स्थिति हांग्जो महानगर चीन का सबसे बड़ा आर्थिक प्लेटफॉर्म है, जहां चीन की बड़ी बड़ी और दुनिया की कई मशहूर कंपनियां स्थित हैं। अलीबाबा कंपनी का मुख्यालय भी इसी शहर में है। इसके साथ है पैनासोनिक और टेस्ला का मुख्यालय भी हांग्जो महानगर के औद्योगिक पार्क में स्थिति है, इसके साथ ही नये चीन का हेडक्वार्टर भी इसी महानगर में स्थिति है। लेकिन, समुद्री बाढ़ की वजह से इस शहर से व्यापार करना नामुमकिन हो जाएगा। जिससे चीन की अर्थव्यवस्था को असंभव सा झटका लगेगा। वहीं, फाइनेंशियल टाइम्स ने जब चीन की मिनिस्ट्री ऑफ इकोलॉजी एंड एटमॉसफेयर से इस बाबत सवाल पूछा, तो मिनिस्ट्री ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

समुद्री बाढ़ से कितना नुकसान

समुद्री बाढ़ से कितना नुकसान

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से ये शहर डूब जाएंगे, बल्कि यहां से व्यापार करना नामुमकिन के बराबर हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार समुद्री तूफान आने से बार बार इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचेगा। एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर भारी प्रभाव पड़ेगा। पानी की आपूर्ति ठप पड़ जाएगी और सबसे बड़ा खतरा ये है कि बार बार तूफान और बाढ़ आने से इन शहरों में मिट्टी का कसाव काफी ज्यादा कमजोर हो जाएगा, लिहाजा यहां उत्पादन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। तूफान की वजह से व्यापार को बार बार रोकना पड़ेगा और उत्पादन बंद करना पड़ेगा, जिससे चीन के इन शहरों का आर्थिक विकास पूरी तरह से रूक जाएगा, जिसका असर चीन की जीडीपी पर पड़ेगा।

क्या खतरे से बेखबर है चीन ?

क्या खतरे से बेखबर है चीन ?

चीन के पूर्वी तटीय शहरों में समुद्र में जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे चीन के टॉप-3 औद्योगिक शहरों पर डायरेक्ट खतरा है और इसके अलावा कई छोटे शहर, जहां से इन बड़े शहरों को अलग अलग तरह की मदद मिलती है, उसपर भी समुद्री तूफान और बाढ़ का असर होगा, तो सवाल ये है कि क्या चीन इन बातों से बेखबर है? चीन की ओसियन एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में समुद्री जलस्तर में तेजी की बात को माना है और रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि चीन बहुत जल्द समुद्री तूफान के साये में होगा। इसे रोकने के लिए चीन के कई शहरों के बाहर बांध का निर्माण किया जा रहा है और लंबी लंबी दीवारें बनाई जा रही हैं। ये दीवारें कई किलोमीटर लंबी बनाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ आने से रोका जा सके। लेकिन, चीन की सरकार ने चीन पर आने वाले खतरे की बात से इनकार कर दिया है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि अगर चीन को खतरा नहीं है तो फिर लंबी लंबी और बड़ी बड़ी दीवारों का निर्माण क्यों हो रहा है और दूसरा सवाल ये है कि क्या दीवारों का निर्माण कर समुद्री बाढ़ और तूफान को रोका जा सकता है?

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