कोरोना से भी घातक महामारी के लिए तैयार रहे इंसान, UN के पर्यावरण प्रमुख की चेतावनी
नई दिल्ली कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर के लोग संक्रमित है। अब तक इस वायरस की चपेट में आकर 2 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस वायरस के कारण 29 लाख के करीब लोग ग्रसित है। वहीं विश्व की अर्थव्यवस्था गिरती जा रही है। इस वायरस ने अमेरिका जैसी महाशक्ति को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए। सिर्फ अमेरिका में 50000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। अगर आप ये मान रहे हैं कि कोरोना वैश्विक महामारी के कारण विश्व में इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता तो आप गलत है। संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण प्रमुख इंगर एंडरसन के मुताबिक इंसान को कोरोना से भी भयानक महामारी के लिए तैयार रहना चाहिए।

क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण प्रमुख
इंगर एंडरसन ने कहा कि प्राकृतिक संसार पर मानवता कई तरह के दबाव डाल रही है। कोरोना वायरस महामारी का नतीजा विध्वंस के रूप में सामने आ रहा है। दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों ने लोगों को प्रकृति और उसके संसाधनों की तबाही को आग से खेलने जैसा करार दिया है। अगर इंसान अब भी नहीं रुके तो प्रकृति कोरोना से भी भयानक रूप दिखाएगी।

कोरोना से भी भयानक तबाही
वैज्ञानिकों की माने को कोरोना वायरस महामारी के रूप में धरती ने इंसानों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए बताया है और प्रकृति के प्रति बरती जाने वाली असावधानियों को लेकर सचेत किया है। उनका मानना है कि वनों और वन्यजीवों के बीच इंसानों की तेजी से बढ़ती दखलंदाजी अगर रुकी नहीं तो भविष्य में कोरोना से भी घातक महामारी के लिए लि इंसानों को तैयार रहना होगा। पर्यावरण के लिए काम करने वाले जानकार मानते हैं कि दुनियाभर में जिंदा जानवरों के बाजार बंद होने चाहिए। जिंदा जानवरों की मंडियों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। प्रकृति विदों का मानना है कि प्रकृति बार-बार इंसानों को चेतावनी दे रही है, लेकिन अब अगर इंसान नहीं सचेत हुए तो हमें प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग, दिनों दिन गर्मी के टूटते रिकार्ड, टिड्डी दलों का हमला जैसी तमाम घटनाओं से प्रकृति हमें बार-बार सचेत करने की कोशिश कर रही है।

इसका सिर्फ एक ही रास्ता
पर्यावरण विशेषज्ञों की माने कोविड-19 जैसी महामारी को रोकने के लिए सिर्फ और सिर्फ एक ही रास्ता है और वो है लगातार गर्म होती धरती को रोकना। जंगलों के अतिक्रमण पर पूरी तरह से लगाम लगना। इंसानों की दखलअंदाजी की वजब से 10 लाख जीव और पौधों की प्रजातियों का अस्तित्व का खतरे में है। एक्सपर्ट के मुताबिक हर चार महीने पर एक नया संक्रामक रोग इंसानों को लपेटे में लेता है। इन नए रोगों में से तीन चौथाई जानवरों से आते हैं। ऐसे में इंसानों का प्रकृति से छेड़छाड़ और जानवरों से दूरे न केवल प्रकृति के संतुलन को बनाए रखता है बल्कि इंसानों को बी संक्रमण से बचाकर रखता है।












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