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Bangladesh Violence: हिंदू युवक की हत्या पर प्रियंका गांधी का फूटा गुस्सा, केंद्र सरकार से कर दी ये मांग

Bangladesh Violence Update: बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक हो गए हैं। चुनाव से पहले शहरों में आगजनी, हत्याएं और हिंसक झड़पें जारी हैं। इस तनाव के बीच मैमनसिंह में ईशनिंदा के आरोप में एक हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास, की नृशंस हत्या ने मानवता को झकझोर दिया है।

इस घटना ने न केवल पड़ोसी मुल्क में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारत में भी गहरी चिंता पैदा कर दी है। प्रियंका गांधी सहित विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार से इस मामले में कड़े राजनयिक कदम उठाने की मांग की है।

Bangladesh Violence Update

प्रियंका गांधी ने केंद्र से की हस्तक्षेप की मांग

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बांग्लादेश में हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग को 'बेहद परेशान करने वाला' और 'मानवता के खिलाफ अपराध' बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार से अपील की है कि वे बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के समक्ष हिंदू, ईसाई और बौद्ध अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा पूरी मजबूती से उठाएं। प्रियंका का मानना है कि धर्म या पहचान के आधार पर हिंसा किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है।

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अशोक गहलोत का केंद्र सरकार पर निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मुद्दे पर भारत सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्र को 'मूकदर्शक' बने रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की चुप्पी से भारत विरोधी ताकतों को बढ़ावा मिल रहा है। गहलोत ने 'वेट एंड वॉच' की नीति को छोड़कर तत्काल प्रभावी राजनयिक हस्तक्षेप की मांग की है। उनके अनुसार, बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी है, जिसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए।

Bangladesh Mob Lynching: 25 वर्षीय हिंदू युवक की नृशंस हत्या

दरअसल, मैमनसिंह की एक फैक्ट्री में काम करने वाले 25 वर्षीय हिंदू दीपू चंद्र दास की हत्या ने कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को उजागर किया है। ईशनिंदा के महज आरोप पर भीड़ ने न केवल उन्हें पीट-पीट कर मार डाला, बल्कि उनके शरीर को आग के हवाले भी कर दिया। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय लगातार निशाना बन रहा है। यह घटना दर्शाती है कि वहां अल्पसंख्यकों के लिए सामान्य जीवन जीना कितना चुनौतीपूर्ण हो चुका है।

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बांग्लादेश सरकार ने दिया हिंसा रोकने का आश्वासन

बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस जघन्य अपराध की निंदा की है। सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि 'नए बांग्लादेश' में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, पिछले साल अगस्त से जारी हमलों के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। अल्पसंख्यकों के घरों, मंदिरों और व्यवसायों पर बढ़ते हमले वहां के प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर निरंतर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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