अशांति के बीच बांग्लादेश की PM शेख हसीना ने दिया इस्तीफा, सरकारी आवास में भीड़ का कब्जा
Bangladesh PM Sheikh Hasina Resigns: बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शनों के बीच सोमवार को शेख हसीना सरकार गिर गई। जब शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कहा कि इसके साथ ही 15 साल से सत्ता में उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। उनका इस्तीफा कई सप्ताह तक चली सरकार विरोधी हिंसा के बाद हुआ है, जिसमें 300 से अधिक लोग मारे गए थे।
गुस्साई भीड़ ने उनके सरकारी आवास गण भवन में घुसकर में कब्जा कर लिया। लोग फ्रिज से खाना निकाल रहे हैं। एसी, कूलर, कुर्सी-टेबल-सोफा सब बाहर निकाल कर विरोध करने वाली भीड़ ने जयकारे लगाए। वे मोटर साइकिल और रिक्शा में सवार होकर प्रधानमंत्री आवास तक आए।

भारत में शरण की आस!
खबरें आईं कि हसीना और उनकी बहन शेख रेहाना किसी 'सुरक्षित आश्रय' के लिए रवाना हो गई हैं। बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकर-उज़-ज़मान ने कहा कि अंतरिम सरकार कार्यभार संभालेगी। स्थानीय मीडिया के अनुसार, आज दिन में उन्होंने सत्तारूढ़ अवामी लीग और विपक्षी बीएनपी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत की। शेख हसीना के ठिकाने की तत्काल पुष्टि नहीं हो पाई है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें और उनकी बहन को सैन्य हेलीकॉप्टर से भारत लाया गया।
घातक अशांति
जून के अंत में विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से शुरू हुआ था, क्योंकि छात्र सरकारी नौकरियों में कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे थे, लेकिन ढाका विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारियों और पुलिस तथा सरकार समर्थक कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद यह हिंसक हो गया।

हिंसक प्रदर्शन में 300 की मौत
बल प्रयोग, कर्फ्यू और इंटरनेट बंद करके प्रदर्शनों को दबाने के सरकार के प्रयास विपरीत साबित हुए, जिससे और अधिक आक्रोश फैल गया और लगभग 300 लोग मारे गए। 15 सालों के उनके शासन को समाप्त करने की मांग उठने लगी। 7 जुलाई को देशभर में सुरक्षा अधिकारियों और सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शनकारियों की झड़प में लगभग 100 लोग मारे गए।
बांग्लादेशी छात्रों ने विरोध प्रदर्शन क्यों शुरू किया?
जुलाई में सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली के विरोध में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब हसीना और उनकी सत्तारूढ़ अवामी लीग पार्टी के खिलाफ व्यापक विद्रोह में बदल गए हैं। कोटा प्रणाली ने बांग्लादेश के 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के दिग्गजों के परिवारों के लिए 30% तक सरकारी नौकरियों को आरक्षित कर दिया था। प्रदर्शनकारियों, मुख्य रूप से छात्रों ने इस प्रणाली को भेदभावपूर्ण माना और आरोप लगाया कि इससे हसीना के समर्थकों को अनुचित लाभ मिल रहा है।
सेना की संभावित भूमिका
वर्तमान सेना प्रमुख वकर-उज़-ज़मान ने सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों का पक्ष लेने का संकेत देते हुए कहा है कि सेना हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहती है। इससे हसीना के जाने की मांग करने वालों के साथ संभावित तालमेल का संकेत मिलता है। सूत्रों से संकेत मिलता है कि सेना की कार्रवाई विदेशी सहयोगियों के रुख पर निर्भर हो सकती है, जो संभवतः हसीना को अस्थायी रूप से सेना को सत्ता सौंपने के लिए मजबूर कर सकती है।












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