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बांग्लादेश में लोकतंत्र बचाने के नाम पर विपक्ष ने पैसेंजर ट्रेन को जलाया, मां-बेटे के साथ 4 लोगों की मौत

Bangladesh News: बांग्लादेश की राजधानी में मंगलवार को लोकतंत्र बचाने के नाम पर अज्ञात लोगों ने एक यात्री ट्रेन को आग के हवाले कर दिया, जिसमें एक महिला और उसके नाबालिग बेटे सहित कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है। यह घटना 7 जनवरी को हुए चुनावों को लेकर राजनीतिक अशांति के बीच हुआ है।

पैसेंजर ट्रेन को फूंकने की ये घटना उस वक्त सामने आई है, जब बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) देश में लोकतंत्र बचाने के नाम पर प्रदर्शन कर रही है और उसने मंगलवार को चुनाव का बहिष्कार करन और चुनाव आयोग के चुनाव कार्यक्रम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए देशव्याबी बंद का आह्वान किया था। इसी दौरान पैसेंजर ट्रेन को आग के हवाले कर दिया गया।

Bangladesh train fire

बांग्लादेश में निशाने पर पैसेंजर ट्रेनें

बांग्लादेश में विपक्षी पार्टियां लगातार ट्रेनों को निशाना बना रही हैं और पिछले एक महीने में पांचवीं बार ट्रन पर हमला किया गया है, लेकिन हताहतों की संख्या के मामले में अब तक का सबसे घातक हमला था।

पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, कि राजधानी ढाला के हवाईअड्डा रेलवे स्टेशन से ट्रेन निकलने के तुरंत बाद उपद्रवियों ने इंटर-डिस्ट्रिक मोहनगंज एक्सप्रेस के तीन डिब्बों में आग लगा दी।

तेजगांव पुलिस थाने के प्रभारी मोहम्मद मोहसिन ने कहा, कि "हवाईअड्डा स्टेशन से ट्रेन छूटने के बाद यात्रियों ने आग देखी और फिर इसे अगले पड़ाव तेजगांव स्टेशन पर ट्रेन को रोक दिया गया।"

स्थानीय पुलिस ने कहा है, कि बीएनपी के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन में आगजनी की थी और हड़ताल के बीच ट्रेन में आग लगाए जाने से एक महिला और उसके बच्चे समेत कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। पुलिस अधिकारी मोहसिन ने कहा, कि एक अन्य नाबालिग लड़का लापता है, जबकि उसकी मां जले हुए डिब्बे के सामने इंतजार कर रही थी, क्योंकि अग्निशमन सेवा के बचाव दल अंदर तलाशी ले रहे थे।

रेलवे अधिकारियों ने कहा, कि लोकोमोटिव मास्टर ने तेजगांव में ट्रेन रोकी, जहां अग्निशमन सेवा के बचावकर्मियों ने आग बुझाई और चार शव निकाले गये, जबकि दो मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है।

बांग्लादेश के रेल मंत्री ने राजधानी में एक यात्री ट्रेन में मंगलवार तड़के आग लगने से एक मां और बच्चे सहित चार लोगों की मौत के बाद देश की मुख्य विपक्षी पार्टी पर "आगजनी" और "तोड़फोड़" का आरोप लगाया है।

रेल मंत्री नुरुल इस्लाम सुजोन ने पूर्व प्रधान मंत्री खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के नाम पर हिंसा और तोड़फोड़ करने का आरोप लगाते हुए कहा, "अब, उन्होंने ट्रेन जैसे परिवहन के सुरक्षित साधन को निशाना बनाया है।" उनका मकसद, 7 जनवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव को विफल करने और "अराजकता पैदा करने की है।"

बीएनपी क्यों कर रही है विरोध प्रदर्शन?

आपको बता दें, कि बेगम खालिदा जिया की बीएनपी ने इस बार भी संसदीय चुनाव का बहिष्कार किया है। बीएनपी की मांग है, कि संसदीय चुनाव से पहले शेख हसीना इस्तीफा दें और एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाए, जिसकी देखरेख में चुनाव हो। लेकिन, प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया है और इसी मांग को लेकर बीएनपी देश भर में प्रदर्शन कर रही है। बांग्लादेश में अगले महीने 7 तारीख को संसदीय चुनाव होने हैं।

बीएनपी ने अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। लिहाजा, अवामी लीग संसदीय चुनाव में अपने कुछ छोटी जातीय पार्टी और स्वतंत्र उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ रही है, जिसमें वे विद्रोही दावेदार भी शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी का नामांकन हासिल करने में विफल रहने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।

अवामी लीग ने पहले कहा था, कि वह पार्टी के विद्रोही उम्मीदवारों सहित निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव में भागीदारी निभाने के लिए प्रोत्साहित करेगी, हालांकि मतदाताओं के पास दिसंबर 2008 के चुनावों के बाद से लगातार चौथी बार सत्ताधारी पार्टी को दोबारा चुनने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

चुनाव से पहले बांग्लादेश में हिंसक घटनाएं

ट्रेन में आग लगाने की वजह से पिछले सप्ताह भी बांग्लादेश में एक यात्री की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हो गए थे। जबकि, अक्टूबर के अंत से दर्जनों ट्रकों, बसों और निजी कारों को आग लगा दी गई, जबकि हिंसा में कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी।

इस बीच, प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा, कि "वे (विपक्ष) लोगों को मारकर सरकार को नहीं हटा सकते।"

बांग्लादेश, राजनीतिक अशांति के बीच 7 जनवरी के आम चुनाव से पहले "नागरिक शक्ति की सहायता के लिए" व्यवस्था बनाए रखने के लिए 29 दिसंबर से 13 दिनों के लिए सेना तैनात करेगा। हालांकि, सेना ने इसे नियमित मतदान के समय की ड्यूटी बताया।

लगातार राजनीतिक अशांति के बीच चुनाव आयोग ने 15 नवंबर को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी।

आपको बता दें, कि भारत जहां शेख हसीना की सरकार को समर्थन दे रहा है, वहीं अमेरिका शेख हसीना सरकार के खिलाफ सख्त मूड में है।

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