Dhaka Violence: ढाका में भड़की हिंसा, जलते ऑफिस के अंदर फंसी महिला रिपोर्टर, कहा-अब सांस नहीं ले पा रही हूं
Bangladesh Dhaka Violence: बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर हिंसा और आगजनी की चपेट में आ गई है। शुक्रवार, 19 दिसंबर को तड़के शहर के कई इलाकों में हालात बेकाबू हो गए, जब उस्मान हादी की मौत की खबर फैलते ही प्रदर्शनकारियों ने उग्र रूप धारण कर लिया।
इस हिंसा के दौरान देश के दो बड़े मीडिया संस्थानों-डेली स्टार और प्रोथोम आलो-को भी निशाना बनाया गया, जिससे प्रेस की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जलती इमारत में फंसी रिपोर्टर, फेसबुक पर मदद की गुहार
हिंसा के बीच डेली स्टार की रिपोर्टर ज़ाइमा इस्लाम की जान पर बन आई। जब डेली स्टार के दफ्तर वाली इमारत में आग लगा दी गई, उस समय ज़ाइमा भीतर ही फंसी हुई थीं। उन्होंने फेसबुक पर एक भावुक और डरावना संदेश साझा किया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
जाइमा ने अपनी पोस्ट में लिखा, "मैं अब सांस नहीं ले पा रही हूं। चारों तरफ बहुत ज्यादा धुआं है। मैं अंदर फंसी हुई हूं। आप मुझे मार रहे हैं।" उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने उनकी सलामती को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी।
कई जगहों पर आगजनी, मीडिया संस्थान बने निशाना
फायर ब्रिगेड और सिविल डिफेंस के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी AFP को बताया कि शुक्रवार, 19 दिसंबर की सुबह ढाका में आगजनी की कई घटनाएं सामने आईं। इनमें एक आग उस इमारत में लगी, जहां डेली स्टार का कार्यालय है, जबकि दूसरी आग उस परिसर में लगाई गई, जहां से प्रोथोम आलो संचालित होता है।
ये दोनों अखबार बांग्लादेश के सबसे बड़े और प्रभावशाली मीडिया संस्थानों में गिने जाते हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ये अखबार पड़ोसी देश भारत के "करीब" हैं और भारत के पक्ष में रिपोर्टिंग करते हैं।
भारत से जोड़कर लगाए गए आरोप
बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इसलिए भी भड़का हुआ है क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में शरण लिए हुए हैं। इसी वजह से भारत के प्रति नाराजगी का असर बांग्लादेशी मीडिया पर भी देखने को मिल रहा है। प्रदर्शनकारियों ने इन अखबारों पर भारत समर्थक होने का आरोप लगाते हुए उन्हें निशाना बनाया।
प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर सवाल
इन घटनाओं ने बांग्लादेश में पत्रकारों की सुरक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आगजनी की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को काबू में लाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, जाइमा इस्लाम और अन्य फंसे लोगों की सुरक्षा को लेकर पूरे देश की नजरें राहत एवं बचाव कार्यों पर टिकी हुई हैं।












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