Bangladesh Ram Statue बांग्लादेश में बनने जा रही थी 81 फीट ऊंची राम मूर्ति, अचानक क्या हुआ रोकना पड़ा काम

Bangladesh Ram Statue Controversy: बांग्लादेश में भगवान राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति बनाने की योजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी स्थित मंदिर परिसर में बनने वाली इस मूर्ति को दुनिया की सबसे बड़ी राम प्रतिमा बताया जा रहा था। लेकिन कट्टरपंथी संगठनों के विरोध और बढ़ते तनाव के बीच मंदिर समिति ने फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया है।

इस फैसले के बाद धार्मिक आजादी, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सरकार की भूमिका पर नई बहस शुरू हो गई है। हिंदू संगठनों का कहना है कि अगर सभी धर्मों को बराबरी का अधिकार है तो फिर राम की मूर्ति पर इतना विरोध क्यों हो रहा है।

Bangladesh Ram Statue Controversy

81 फीट की राम मूर्ति पर क्यों मचा विवाद?

गाइबांधा के श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर में 81 फीट ऊंची भगवान राम की मूर्ति बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया था। इसके साथ भगवान कृष्ण और भगवान शिव की मूर्तियां भी बनाई जानी थीं। करीब 22 करोड़ टका की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का मकसद इलाके को बड़ा धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनाना था। लेकिन कुछ इस्लामी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध बढ़ने के बाद स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति पर दबाव बना, जिसके चलते फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया।

ये भी पढ़ें: UNGA President Post: अब यूएन को चलाएगा बांग्लादेश! 8 वोटों से साइप्रस को पटखनी देकर जीता अध्यक्ष की कुर्सी

मंदिर समिति ने काम रोकने की क्या वजह बताई?

मंदिर समिति का कहना है कि फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि शांति बनाए रखने के लिए लिया गया है। मंदिर के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंता ने कहा कि वे किसी तरह का विवाद नहीं चाहते और सभी समुदायों के बीच सौहार्द बना रहना चाहिए। उनके मुताबिक हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे तनाव बढ़े। हालांकि हिंदू संगठनों का कहना है कि अगर विरोध के कारण धार्मिक प्रोजेक्ट रुकेंगे तो अल्पसंख्यकों का भरोसा कमजोर होगा।

तस्लीमा नसरीन ने क्यों उठाए सवाल?

निर्वासित लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आजादी सिर्फ बहुसंख्यक समुदाय के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए बराबर होनी चाहिए। तस्लीमा ने सवाल किया कि जब देश में नई मस्जिदों के निर्माण पर कोई रोक नहीं है तो राम की मूर्ति या मंदिर प्रोजेक्ट का विरोध क्यों किया जा रहा है। उन्होंने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया और कहा कि धमकियां और नफरत का माहौल लोकतांत्रिक समाज के लिए अच्छी बात नहीं है।

ये भी पढ़ें: Balen Shah Plan: नेपाल की बिजली, भारत का रास्ता, बांग्लादेश की बल्ले-बल्ले! बालेन शाह का क्या है प्लान?

ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने क्यों किया प्रदर्शन?

राम की तस्वीर के कथित अपमान और मूर्ति विवाद के बाद ढाका यूनिवर्सिटी के हिंदू छात्रों ने विरोध मार्च निकाला। 'जागरूक छात्र' बैनर के तहत हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी समूह जानबूझकर धार्मिक तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। छात्रों ने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं और उनका अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रदर्शन के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?

विरोध कर रहे छात्र और हिंदू संगठन कई मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं। इनमें गाइबांधा मामले में शामिल लोगों की तुरंत गिरफ्तारी, दोषियों को कड़ी सजा, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ठोस कदम और कट्टरपंथी गतिविधियों पर रोक शामिल है। सबसे बड़ी मांग राम की 81 फीट ऊंची मूर्ति वाले प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर सरकार धार्मिक स्वतंत्रता और बराबरी की बात करती है तो उसे अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक अधिकारों की भी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+