बुरकिना फासो: सीमावर्ती इलाकों में संघर्ष के साथ बढ़ रही भूख

औगाडौगू, 14 दिसंबर। उत्तरी बुरकिना फासो में नौ महीने की सकीनातौ अमादौ कुपोषण से उबर रही है. कंटेनर में बने अस्थायी क्लीनिक में नर्स उसका वजन एक तराजू से माप रही है. सकीनातौ की मां की मौत हो चुकी है और उसकी नानी अब उसका पालन-पोषण कर रही है. नाइजर सीमा के पास एक व्यापारिक केंद्र डोरी में रहने वाली सकीनातौ की नानी के परिवार में 14 सदस्य हैं.
परिवार ने 2019 में अपने गांव से भाग जाने के बाद से खुद को जिंदा रखने के लिए काफी संघर्ष किया है. वे बुरकिना फासो, माली और नाइजर में 20 लाख से अधिक लोगों में से हैं जिन्हें इस्लामी समूहों द्वारा ग्रामीण समुदायों पर हमलों की एक लहर के कारण अपने घरों से भागने पर मजबूर होना पड़ा.
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भोजन का संकट
अनियमित वर्षा के कारण फसल की पैदावार प्रभावित हुई है और सहारा के किनारे के तीन देशों में लगभग 55 लाख लोग भोजन की कमी का सामना कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अगस्त तक यह बढ़कर 82 लाख हो सकता है, जब फसल से पहले भोजन की उपलब्धता सबसे कम होती है. डोरी में स्वास्थ्य केंद्र चलाने वाले डॉक्टर अल्फोंस ग्नौमौ कहते हैं, "लोगों ने जानवरों, खेतों और यहां तक की फसलों के नुकसान को सहा है. उन्होंने सब कुछ खो दिया है." सकीनातौ के वजन में बढ़ोतरी में उन्होंने काफी मदद की है.
हिंसा के कारण शहर का कभी चहल-पहल वाला पशुधन बाजार बंद हो चुका है. सड़क के किनारे एक झोपड़ी से सब्जियां और सूखे सामान बेचने वाली कदीदियातौ बा कहती हैं कि इलाके में भोजन का परिवहन खतरनाक है और कीमतें आसमान छू रही हैं.
पिछले दो सालों में डोरी की आबादी तीन गुनी बढ़कर 71,000 हो गई है. विस्थापित लोगों की आमद से स्थानीय सेवाओं पर असर पड़ने का खतरा है. दूसरी ओर एक स्थानीय स्कूल में प्रत्येक डेस्क के पीछे तीन से चार बच्चे बैठ हुए हैं, जिसका उद्देश्य प्रत्येक छात्र को एक कटोरी चावल और बीन्स खिलाना है ताकि वे प्रति दिन कम से कम एक समय का भोजन कर सकें.
एए/वीके (रॉयटर्स)
Source: DW












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