Apple New CEO: कौन हैं एप्पल के नए CEO? ऐसा क्या किया जो Tim Cook को कर पाए रिप्लेस? कितने पढ़े-लिखे?

Apple New CEO: दुनिया की टेक इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण तेजी से बदल रही है। हर तरफ इसी से जुड़े बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। जो लोग AI में निपुण हैं उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है और इसी के हिसाब से कंपनियां अपनी नई हैरारकी (Hierarchy) की तय कर रही हैं। इसी के बीच दुनिया की जानी-मानी मोबाइल बनाने वाली दिग्गज कंपनी Apple ने जॉन टर्नस (John Ternus) को अपना अगला CEO (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) बनाया है। टर्नस 1 सितंबर 2026 से Tim Cook की जगह लेंगे। वहीं कुक अब कार्यकारी अध्यक्ष (Executive Chairman) की भूमिका निभाएंगे। टर्नस के ही कार्यकाल में अगला आईफोन (I-Phone 18) लॉन्च किया जा सकता है।

एप्पल से ही निकलता है CEO

यह नियुक्ति एप्पल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा सर्वसम्मति से मंजूर की गई है और यह कंपनी की लंबे समय से चल रही उत्तराधिकार (succession) प्लानिंग का हिस्सा है। इससे यह भी साफ होता है कि एप्पल अपने ही अंदर के नेताओं को आगे बढ़ाने पर भरोसा करता है। हालांकि टर्नस जिस समय CEO बन रहे हैं, वह कुक के 2011 में Steve Jobs के बाद CEO बनने से काफी अलग है। टर्नस पिछले 20 साल से ज्यादा समय से कंपनी के साथ जुड़े हुए हैं और एक लंबी पारी एप्पल के साथ खेल चुके हैं।

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AI के दौर में बढ़ती चुनौतियां

टर्नस को CEO बनाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब एप्पल को बदलते कॉम्प्टीशन और खासकर AI के क्षेत्र में अपनी धीमी प्रोग्रेस को लेकर ताने झेल रहा है। कभी दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रही एप्पल को हाल ही में NVIDIA ने पीछे छोड़ दिया है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके अलावा ग्राहकों का ट्रस्ट डेफिसिट भी एक बड़ा चैलेंज है।

कुक vs टर्नस: अलग-अलग दौर, अलग चुनौतियां

कुक का कार्यकाल ऑपरेशन मैनेजमेंट और एप्पल के ग्लोबल विस्तार के लिए जाना जाता है। वहीं टर्नस ऐसे समय में जिम्मेदारी संभालेंगे जब AI टेक्नोलॉजी पूरी दुनिया में बदलाव ला रही है और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का तरीका बदल रही है। 50 साल के टर्नस एप्पल में 25 साल का अनुभव रखते हैं। उन्होंने 2001 में कंपनी जॉइन की थी, जब एप्पल आर्थिक मुश्किलों से उबर रहा था और अपनी पहचान दोबारा बना रहा था।

कैसा रहा टिम कुक का कार्यकाल?

2011 से अब तक कुक के नेतृत्व में एप्पल के शेयर लगभग 20 गुना बढ़े हैं और कंपनी ने जबरदस्त ग्रोथ देखी है। कुक ने खासकर चीन में मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को मजबूत किया और कंपनी को स्केल करने में मदद की। हालांकि एप्पल अब भारत और वियतनाम में भी उत्पादन बढ़ा रहा है, लेकिन चीन पर निर्भरता अभी भी काफी है।

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एप्पल से पहले का करियर और पढ़ाई

एप्पल में आने से पहले टर्नस ने Virtual Research Systems में मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में काम किया। उन्होंने University of Pennsylvania से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली है और 2024 में वहां दीक्षांत भाषण भी दिया। 2013 में उन्हें हार्डवेयर इंजीनियरिंग का वाइस प्रेसिडेंट बनाया गया। फिर 2021 में वह सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने और सीधे टिम कुक को रिपोर्ट करने लगे। इस भूमिका में टर्नस ने iPhone, iPad, Mac, Apple Watch और AirPods जैसे प्रोडक्ट्स की इंजीनियरिंग को संभाला। उनके काम ने एप्पल के पूरे इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।

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मैक और चिप्स में बड़ा बदलाव

टर्नस ने Mac लाइनअप को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने Intel प्रोसेसर से हटकर एप्पल के खुद के चिप्स पर शिफ्ट करने का फैसला लीड किया, जिससे परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ में बड़ा सुधार हुआ। उनके नेतृत्व में एप्पल ने iPhone के नए वर्जन, अल्ट्रा-थिन iPhone Air और MacBook Neo जैसे नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए, जिससे यूजर्स के लिए ज्यादा विकल्प मार्केट में आए। AirPods को उन्होंने नॉइज़ कैंसलेशन और हेल्थ फीचर्स के साथ बेहतर बनाया। इससे एप्पल की वियरेबल टेक्नोलॉजी और मजबूत हुई।

प्रोडक्ट की लाइफ बढ़ाने के पीछे टर्नस का हाथ

टर्नस ने रीसाइक्लिंग और सस्टेनेबिलिटी पर भी काम किया। उन्होंने एप्पल के प्रोडक्ट्स में रीसाइकल्ड मटेरियल का इस्तेमाल बढ़ाया और प्रोडक्ट की लाइफ बढ़ाने पर ध्यान दिया। टेक रिव्यू साइट Tom's Guide को दिए इंटरव्यू में टर्नस ने कहा-

"हम टेक्नोलॉजी नहीं, शानदार प्रोडक्ट बनाने पर ध्यान देते हैं।"

यह एप्पल की पुरानी सोच को आगे बढ़ाता है। एक तरफ जहां Microsoft और Google AI में तेजी से निवेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टर्नस इसे धीरे और सोच-समझकर लागू करना चाहते हैं ताकि यूजर एक्सपीरियंस बेहतर हो। टर्नस के सामने सबसे बड़ी चुनौती AI में एप्पल की स्थिति मजबूत करना होगा। 2011 में Siri लॉन्च करने के बावजूद एप्पल अभी तक AI में लीड नहीं ले पाया है।

कंपटीशन से मिल रही कड़ी टक्कर

OpenAI के ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म तेजी से फेमस हो रहे हैं। वहीं दूसरी कंपनियां भी नए इनोवेशन के जरिए यूजर एक्सपेक्टेशन बदल रही हैं। एप्पल ने Google के Gemini AI को Siri में जोड़ने की योजना बनाई है, लेकिन इससे कंपनी की रणनीति पर सवाल भी उठ रहे हैं। Siri अभी भी उन AI सिस्टम्स जितना एडवांस नहीं है जो मल्टी-स्टेप टास्क कर सकते हैं। यह भी टर्नस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, Meta Platforms जैसी कंपनियां AR टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रही हैं। वहीं NVIDIA भी नए प्रोसेसर के साथ कंप्यूटिंग मार्केट में आ रहा है।

नई कैटेगरी में एप्पल की एंट्री

एप्पल ने Vision Pro जैसे प्रोडक्ट लॉन्च किए हैं, लेकिन इन्हें सस्ता और ज्यादा लोकप्रिय बनाना अभी भी चुनौती है। रिपोर्ट्स की मानें तो टर्नस के नेतृत्व में एप्पल फोल्डेबल डिवाइस और AR ग्लास जैसे नए प्रोडक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे सकता है। टर्नस को एक डिटेल-ओरिएंटेड और सहयोगी लीडर माना जाता है। वह छोटी-छोटी चीजों पर भी ध्यान देते हैं। टर्नस का मानना है "अगर आप किसी चीज पर समय दे रहे हैं, तो उसे अपना बेस्ट देना चाहिए।"

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