सऊदी अरब में अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम फेल होने का दावा, उत्तर कोरिया से बचाव पर उठे सवाल

वाशिंगटन। 31 अक्टूबर को यमन ने एक बार फिर से सऊदी अरब पर मिसाइल दागी थी। सऊदी अरब पर यमन ने गुरूवार (31 अक्टूबर) को एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे नष्ट कर दिया गया था। सऊदी अरब पर एक माह में दूसरी बार मिसाइल दागी गई थी। पिछली बार सऊदी अरब की राजधानी रियाद को निशाना बनाया गया था, वहीं इस बार दक्षिणी शहर खमिस मुश्त पर मिसाइल दागी गई थी। मिसाइल नष्ट किए जाने को सऊदी और अमेरिका के लिए एक जीत मानी गई थी, जो पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति करते हैं । मिसाइल को नष्ट किए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने कहा था कि 'हमारी प्रणाली ने मिसाइल को हवा से बाहर कर दिया, हम कितने अच्छे हैं, हम जो बनाते हैं, वो कोई नहीं बना पाता और हम इसे बेच रहे हैं।'

सऊदी अरब में अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम फेल होने का दावा, उत्तर कोरिया से बचाव पर उठे सवाल

हालांकि इस पूरी घटना का विश्लेषण करने वालों का दावा है कि जो आधिकारिक कहानी बताई गई वो गलत है। दावा किया जा रहा है कि इस घटना के संबंध में कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही है, जो सरकारी थ्योरी को पूरी तरह गलत साबित कर रही हैं। मिसाइल विशेषज्ञों की एक शोध टीम ने विश्लेषण किया और सबूत दिखाते हुए कहा कि मिसाइल सुरक्षा प्रणाली को भेदते हुए रियाद हवाई अड्डे के करीब जा गिरा। विस्फोट इतना तेज हुआ कि यात्री अपनी सीट से उठ गए।

अमेरिकी अंग्रेजी अखबार NewYork Times (NYT) की एक खबर के अनुसार इस पूरी घटना से यह सामने आया है कि मिसाइल रक्षा प्रौद्योगिकी, अमेरिकी और संबद्ध राष्ट्रीय रक्षा रणनीतियों, विशेष रूप से ईरान और उत्तर कोरिया से खतरे के मुकाबले, के बारे में लंबे समय से संदेहास्पद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसी मामूली मिसाइलों के खिलाफ तकनीक असफल हो सकती है, तो यह कल्पना करना मुश्किल है कि यह उत्तरी कोरिया की बढ़ती उन्नत इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों के हमलों के दौरान यह तकनीक सफल होगी।

NYT के अनुसार सऊदी अधिकारियों ने से जब इस मामले पर टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने इनकार कर दिया। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात पर संदेह जताया कि उनके पास इस बात के सबूत नहीं है कि मिसाइल ने सऊदी के किसी हिस्से को नुकसान पहुंचाया। इसके बजाय उन्होंने यह कि संभवतः मिसाइल दो हिस्सों में बंट कर कई गिर गया होगा। वहीं इन सब पर रिसर्च टीम के सदस्य ने NYT से कहा कि सरकार ने इस पर स्पष्ट रूप से झूठ बोला है।

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