अमेरिका सऊदी अरब का क्या कुछ बिगाड़ सकता है? परिणाम भुगतने और रिश्ते पर पुनर्विचार की धमकी

बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही सऊदी अरब और अमेरिका के बीच खटपट शुरू हो गई थी और इस साल की शुरूआत में न्यूयॉर्क टाइम्स दावा किया था, कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बाइडेन को फोन तक नहीं उठाया।

US relationship with Saudi Arabia: इतिहास गवाह रहा है, कि अमेरिका ने जिन-जिन देशों के साथ अपने रिश्ते पर पुनर्विचार करने की घोषणा की है, वो बर्बाद हुआ है। ईरान, इराक और सीरिया जैसे कई उदाहरण है, जहां अमेरिका की वजह से बर्बादी फैली है और अब अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्ते भी करीब करीब टूटने के कगार पर पहुंच चुके हैं और अमेरिका की तरफ से साफ कर दिया गया है, कि वो सऊदी अरब के साथ अपने रिश्ते को लेकर पुनर्विचार करेगा। ऐसे में आईये जानने की कोशिश करते हैं, कि अमेरिका के इस फैसले से सऊदी अरब पर क्या असर पड़ेगा?

सऊदी के साथ रिश्ते पर पुनर्विचार

सऊदी के साथ रिश्ते पर पुनर्विचार

व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी ने मंगलवार को कहा कि, ओपेक द्वारा तेल उत्पादन में कटौती की घोषणा के बाद राष्ट्रपति जो बाइडेन सऊदी अरब के साथ अमेरिकी संबंधों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में जॉन किर्बी ने कहा कि, "मुझे लगता है कि राष्ट्रपति बहुत स्पष्ट हैं कि यह एक ऐसा संबंध है जिसका हमें पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है और हमें इस रिश्ते पर फिर से विचार करने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है।" उन्होंने कहा कि, "और निश्चित रूप से ओपेक के फैसले को देखते हुए मुझे लगता है रिश्ते की पुनर्मुल्यांकन की आवश्यकता है।" उन्होंने कहा, कि राष्ट्रपति बाइडेन संसद के साथ मिलकर सऊदी अरब के साथ संबंधों पर काम करने को तैयार हैं।

भुगतने होंगे गंभीर अंजाम

भुगतने होंगे गंभीर अंजाम

वहीं, राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को कहा कि, सऊदी अरब को इसके लिए "परिणाम" भुगतने होंगे। वहीं, जो बाइडेन की पार्टी के सांसदों ने सऊदी अरब को हथियारों की सप्लाई रोकने की मांग की है। जो बाइडेन ने सुझाव दिया कि, वह जल्द ही कार्रवाई करेंगे। अमेरिका इसलिए सऊदी अरब पर आगबबूला है, क्योंकि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले ओपेक प्लस ने अमेरिका के अनुरोध के बाद भी तेल उत्पादन में हर दिन 3 लाख बैरल की कटौती की घोषणा कर दी, जिसके बाद अमेरिका में भारी गुस्सा है। अमेरिका और सहयोगी देशों का कहना है कि, सऊदी अरब के इस फैसले से ना सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी, बल्कि युद्ध में रूस को भी फायदा पहुंचेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक सांसद सेन रिचर्ड ब्लूमेंथल और कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना ने संसद में एक कानून पेश किया है, जिसके पास होने पर सऊदी अरब को एक साल के लिए सभी अमेरिकी हथियारों की बिक्री को तुरंत रोक देगा। वहीं, व्हाइट हाउस ने कहा है कि, राष्ट्रपति बाइडेन संसद के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। अगर अमेरिका हथियारों की सप्लाई रोकता है, तो फिर सऊदी अरब को स्पेयर और रिपेयर पार्ट्स, सपोर्ट सर्विसेज और लॉजिस्टिक सपोर्ट की बिक्री भी रुक जाएगी, जो सऊदी के लिए बहुत बड़ा झटका होगा।

क्या कर सकता है अमेरिका?

क्या कर सकता है अमेरिका?

जो बाइडेन ने जब सत्ता संभाला था, तो उन्होंने सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के लिए प्रिंस सलमान को जिम्मेदार ठहराने की कसम खाई थी और उस गोपनीय रिपोर्ट को भी सार्वजनिक किया था, जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने दावा किया था, कि तुर्की स्थिति सऊदी वाणिज्य दूतावास में कत्ल किए गये सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के आदेश प्रिंस सलमान ने दिए थे। लिहाजा, अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि जब बाइडेन ने परिणाम भुगतने की धमकी दी है, तो फिर अमेरिका सऊदी के खिलाफ कहां तक जा सकता है। जो बाइडेन ने सीएनएन को दिए गये इंटरव्यू में कहा कि, वो सऊदी पर एक्शन लेने के लिए कांग्रेस के साथ परामर्श करेंगे, लेकिन क्या वो सऊदी को हथियारों की सप्लाई बंद करेंगे, इसपर उन्होंने नपा-तुला ही जवाब दिया। इंटरव्यू के दौरान बाइडेन ने साफ तौर पर कहा, कि 'उन्होंने रूस के साथ जो कुछ भी किया है, उसके लिए परिणाम भुगतने होंगे।' उन्होंने कहा कि, 'क्या परिणाम भुगतने होंगे, उसपर मैं नहीं जा रहा, लेकिन कुछ परिमाण तो होंगे।'

अमेरिका कब तक कर सकता है कार्रवाई?

अमेरिका कब तक कर सकता है कार्रवाई?

व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैराइन जीन-पियरे ने मंगलवार को कहा कि, व्हाइट हाउस के पास इसकी समीक्षा के लिए कोई समयरेखा नहीं है, और न ही राष्ट्रपति ने उस प्वाइंट पर काम करने के लिए किसी व्यक्ति को उस लिहाज से काम करने के लिए सलाहकार नियुक्त किया है। इस बीच कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने मिडिल ईस्ट की सुरक्षा का भी जिक्र किया है, जिसके केन्द्र में सऊदी अरब है और उसका महत्व अमेरिकी सुरक्षा के लिए भी है। लिहाजा, अमेरिका के लिए सऊदी अरब के खिलाफ एक्शन लेना उतना आसान भी नहीं होने वाला है। हालांकि, जॉन किर्बी ने कहा कि, सीनेटर मेनेंडेज ने भविष्य में सऊदी हथियारों की बिक्री को रोकने के अपने इरादे की घोषणा करने से पहले व्हाइट हाउस को इसके बारे में जानकारी नहीं दी थी।

सऊदी अरब से नाराजगी की वजह

सऊदी अरब से नाराजगी की वजह

जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही सऊदी अरब और अमेरिका के बीच खटपट शुरू हो गई थी और इस साल की शुरूआत में न्यूयॉर्क टाइम्स दावा किया था, कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को फोन तक नहीं उठाया। ओपेक प्लस, जिसमें रूस के साथ-साथ सऊदी अरब भी शामिल है,उसने पिछले हफ्ते घोषणा की है, कि वह एक दिन में 2 मिलियन बैरल उत्पादन में कटौती करेगा, जो तेल की कीमतों को बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे सीधे तौर पर रूस की मदद होगी और अमेरिका का कहना है, कि यूक्रेन युद्ध में लड़ाई लड़ने के लिए पैसे जुटाने में सऊदी अरब रूस की मदद कर रहा है। तेल उत्पादन में कटौती रूस के लिए युद्ध को आर्थिक रूप से अस्थिर बनाने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों को भी नुकसान पहुंचाती है, वहीं अगले महीने अमेरिका में सीनेटर के चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले अमेरिका में तेल और गैसोलीन की कीमत काफी ज्यादा बढ़ी हुई है, लिहाजा इससे बाइडेन की पार्टी को चुनाव में नुकसान हो सकता है।

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