अमेरिका-ईरान युद्ध में कूदे बिना कैसे रूस और चीन ने हासिल किया फायदा? अरबपति निवेशक ने दी बड़ी चेतावनी
How China and Russia won in US-Iran war: मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी तनाव ने ईरान, इज़राइल और अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई देशों के लिए संकट खड़ा कर दिया। 40 दिन तक चले इस भीषण संघर्ष में मिसाइल हमले और अनिश्चितताओं के बाद, आखिरकार तीनों देशों-ईरान, अमेरिका और इज़राइल- के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई। 28 फरवरी की सुबह (भारतीय समयानुसार) से यह युद्ध शुरू हुआ और 8 तारीख को लगभग रात के तीन बजे युद्धविराम की घोषणा हुई।
इस युद्ध में ईरान, इजराइल और अमेरिका तीनों को जान-माल का भारी नुकसान हुआ लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि रूस और चीन सीधे युद्ध में शामिल हुए बिना ही इस संघर्ष से लाभ कमाया। दोनों देश युद्ध मैदान में नहीं हैं, लेकिन खेल के नियम बदल रहे थे। आइए समझते हैं कि कैसे।

रूस और चीन की कूटनीति
चीन और रूस ने इस युद्ध में सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया, ईरान को सीधे हथियार नहीं भेजे, लेकिन कूटनीतिक और खुफिया मोर्चे पर मदद करके अमेरिका‑इज़राइल की रणनीति को चुनौती दी। उदाहरण के लिए, दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका‑समर्थित प्रस्ताव को वीटो किया। इससे ईरान को Strait of Hormuz में राजनीतिक सांस लेने की जगह मिली।
खुफिया तरीके से ईरान की मदद
वहीं, रूस ने अमेरिका की रणनीति को कमजोर करने के लिए अपने सेटेलाइट और संवेदी खुफिया डेटा ईरान के साथ साझा किए। इसका नतीजा यह हुआ कि ईरान की मिसाइल और हवाई हमलों की सटीकता बढ़ गई और अमेरिका की चाल पर नजर रखी जा सकी।
चीन ने युद्ध में बिना कूदे किया बड़ा खेल
चीन की निजी कंपनियां उन्नत AI और सेटेलाइट डेटा का इस्तेमाल कर अमेरिकी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखती है। यानी चीन औपचारिक तौर पर युद्ध में नहीं कूदा, लेकिन अमेरिकी चालों की हर झलक पर नजर रखने कर उसने अप्रत्यक्ष रूस से ईरान की मदद करता रहा।
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चीन और रूस बने असली विजेता
चीन और रूस के हित-चाहे वह ऊर्जा हो, व्यापार हो या शक्ति संतुलन-इस संघर्ष के बीच और भी मजबूत और सुरक्षित नजर आ रहे हैं, जिससे उन्हें युद्ध के "अप्रत्यक्ष विजेता" (Relative winner) के रूप में देखा जाने लगा है। अमेरिकी अरबपति निवेशक और लेखक रे डालियो के अनुसार, वर्तमान संघर्ष में चीन और रूस सापेक्षिक विजेता के रूप में उभर रहे हैं। वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। उनके मुताबिक, वैश्विक गठबंधन अब स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं, न केवल सैन्य बल्कि कूटनीतिक संकेतों के जरिए भी।
अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती
अमेरिका इस समय कई मोर्चों पर फैली हुई शक्तियों के दबाव में है। डालियो का कहना है कि अमेरिका के पास अब सीमित संसाधन हैं और वह कई संकटों को एक साथ नहीं संभाल सकता था।
अरबपति निवेशक ने दी बड़ी चेतानवी
अमेरिकी निवेशक और लेखक रे डालियो ने ईरान में चल रहे संघर्ष को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह कोई सीमित युद्ध या अस्थायी संकट नहीं है, बल्कि यह दुनिया की वर्तमान व्यवस्था के बड़े बदलाव का हिस्सा है। डालियो के मुताबिक, जो कुछ भी आज हो रहा है, वह अलग-थलग संघर्ष नहीं हैं। रूस-यूक्रेन, इज़राइल-गाजा, यमन और अमेरिका-ईरान जैसी लड़ाइयां आपस में जुड़ी हैं। उन्होंने इसे "एक क्लासिक विश्व युद्ध" के समान बताया, जहां कई मोर्चे एक साथ सक्रिय हैं।
वैश्विक युद्ध की झलक
डालियो ने इसे अपने लंबे समय से चल रहे "बिग साइकिल" सिद्धांत से जोड़ा। उनका कहना है कि इतिहास ऐसे चक्रों में चलता है, जब मौद्रिक सिस्टम, घरेलू राजनीति और वैश्विक शक्ति कमजोर पड़ती हैं। वह मानते हैं कि हम इस चरण में पहले ही प्रवेश कर चुके हैं, जैसे कि पहले और दूसरे विश्व युद्ध से ठीक पहले हुआ करता था।
क्या हो सकता है अगला कदम?
डालियो का कहना है कि जैसे-जैसे शक्तियां दबाव में आती हैं, वे अधिक आक्रामक हो जाती हैं। सरकारें वित्तीय नियंत्रण बढ़ा सकती हैं, करों में बढ़ोतरी कर सकती हैं और नई युद्ध तकनीक विकसित कर सकती हैं। उनका निष्कर्ष है कि बहु-मोर्चा संघर्ष अब तेजी से एक साथ घटित हो रहे हैं और यह आगे भी बढ़ेगा।
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