जो बाइडेन कर सकते हैं 'एशिया के नाटो' के गठन का ऐलान, कैंप डेविड में अहम बैठक, हाई-अलर्ट पर चीन
Camp David Meeting: हांगकांग से प्रकाशित होने वाले अखबार साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के ऑनलाइन वेबसाइड में दावा किया गया है, कि कैंप डेविड में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के राष्ट्राध्यक्षों के बीच चल रही बैठक को लेकर चीन 'हाई अलर्ट' पर है।
SCMP ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि माना जा रहा है, कि कैंप डेपिड में अमेरिका के साथ जापान और दक्षिण कोरिया के बीच जो बैठक चल रही है, उसमें रक्षा और टेक्नोलॉजी को लेकर नये ऐलान हो सकते हैं और चीन के पर्यवेक्षक इस बैठक को 'एशिया के नाटो' का गठन कहकर संबोधित कर रहे हैं।

चीनी विश्लेषकों का कहना है, कि कैंप डेविड की बैठक एशिया के नाटो का दरवाजा खोल रही है और इसका मतलब ये हुआ, कि चीन की सीमा के पास नाटो पहुंच चुका है।
आपको बता दें, कि दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक-योल और जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा शुक्रवार को अपनी तरह के पहले तीन-तरफा शिखर सम्मेलन के लिए ग्रामीण मैरीलैंड में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ बैठक में शामिल हो रहे हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया, कि बैठक के बाद राष्ट्रपति बाइडेन, बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम और प्रौद्योगिकी विकास पर विस्तारित सहयोग की योजना की घोषणा करने की उम्मीद है।
बैठक से घबरा गया है चीन
रॉयटर्स ने अधिकारियों के हवाले से कहा है, कि वे एक नई तीन-तरफा क्राइसिस हॉटलाइन स्थापित करने और भविष्य में हर साल एक त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करने के लिए तैयार हो गये हैं।
जिसको लेकर बीजिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, कि चीन "संबंधित देशों द्वारा विभिन्न छोटे समूहों को एक साथ जोड़ने" का विरोध करता है। वांग ने कहा, "(चीन) उन प्रथाओं का भी विरोध करता है, जो टकराव को बढ़ाती हैं और अन्य देशों की रणनीतिक सुरक्षा को खतरे में डालती हैं।"
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, कि "संबंधित देशों को समय की प्रवृत्ति का पालन करना चाहिए और क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए और ज्यादा प्रयास करना चाहिए।"
पूर्वोत्तर चीन में लियाओनिंग विश्वविद्यालय में अमेरिकी और पूर्वी एशियाई अध्ययन संस्थान के डीन लू चाओ ने कहा, कि शुक्रवार की बैठक से त्रिपक्षीय सैन्य गठबंधन बन सकता है, जो बीजिंग में तनाव पैदा करेगा।
लू ने कहा, कि "राज्य प्रमुखों के बीच नियमित बैठकों की (संभावना) व्यवस्था और सैन्य पहलू में सहयोग की निश्चित व्यवस्था वास्तव में तीन-तरफा सैन्य गठबंधन के गठन की ओर ले जाती है।"
मुख्य भूमि चीन के पर्यवेक्षकों ने कहा, कि जहां इस बैठक के एजेंडे में उत्तर कोरिया के शीर्ष पर रहने की उम्मीद है, वहीं बीजिंग शिखर सम्मेलन के अंत में जारी होने वाले संयुक्त बयान में ताइवान के विशिष्ट संदर्भों पर नजर रखेगा।
बीजिंग, ताइवान को एक अलग हुआ प्रांत मानता है जिसे जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक फिर से चीन में जोड़ने की बा कहता है।। जबकि अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया सहित अधिकांश देश स्व-शासित ताइवान को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता नहीं देते हैं, लेकिन द्वीप पर बलपूर्वक कब्जा करने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं।
लू ने कहा, "शिखर सम्मेलन के लिए चीन हाई अलर्ट पर है, खासकर अगर ताइवान मुद्दे का जिक्र हो।"
उन्होंने कहा, कि "अगर वे शिखर सम्मेलन में ताइवान मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते हैं, तो इसे चीन के लिए एक मजबूत उकसावे के रूप में देखा जाएगा और एशिया-प्रशांत में स्थिरता के लिए एक खतरनाक कदम होगा।"
बिना नाम बताए एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया, कि बयान में ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर सामान्य टिप्पणियां भी शामिल होंगी।
शुक्रवार से शुरू होने वाला ये शिखर सम्मेलन, बाइडेन प्रशासन की महीनों की कूटनीति के बाद शुरू हुआ है, जिसने चीन का मुकाबला करने के लिए एशियाई सैन्य गठबंधनों को मजबूत करने के अभियान के तहत वाशिंगटन के संधि सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया को एक साथ लाने की कोशिश की है।

एशिया के नाटों की होगी घोषणा?
अमेरिका ने 1951 में जापान के साथ पारस्परिक सहयोग और सुरक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए थे। साल 1953 में, कोरियाई युद्ध युद्धविराम के बाद, उसने दक्षिण कोरिया के साथ एक पारस्परिक रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए।
टोक्यो और सियोल का इतिहास परेशानी भरा रहा है, खासकर जापान की युद्धकालीन ज्यादतियों के साथ-साथ क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर, लेकिन बढ़ता चीन, रूस का सैन्यवाद और परमाणु-सशस्त्र उत्तर कोरिया, दोनों पड़ोसियों को एक-दूसरे को अमेरिका के करीब लाने वाले कारक हैं। यानि, अगर जो बाइडेन आज एशिया के नाटो की घोषणा करते हैं, तो चीन के लिए ये बहुत बड़ा झटका होगा।












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