रूस में मजबूरी में उतरा एयर इंडिया का विमान, रूसी हवाई क्षेत्र को लेकर क्यों छिड़ा विवाद

पश्चिम के लोग मांग कर रहे हैं कि इंडियन एयरलाइंस रूसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर रही है, इसलिए उस पर पाबंदी लगा देनी चाहिए. लेकिन पाबंदी से नुकसान किसका होगा?

एयर इंडिया
REUTERS/Jennifer Gauthier
एयर इंडिया

दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रहे एयर इंडिया के विमान के अचानक रूस में लैंड करने के बाद रूसी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर चर्चा छिड़ गई है.

मंगलवार को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को जा रहा एयर इंडिया के एक विमान को इंजन में ख़राबी के चलते रूस के सुदूर पूर्वी मागादान इलाक़े में आपात स्थिति में उतारना पड़ा था.

विमान में 216 यात्रियों समेत चालक दल के 16 लोग भी शामिल थे.

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अधिकतर पश्चिमी देशों ने रूसी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल करने पर रोक लगाई है.

ऐसे में एक बहस ये छिड़ गई है कि क्या अमेरिकी विमानों के उन विमान सेवाओं पर रोक लगानी चाहिए जो अमेरिका तक उड़ान के लिए रूसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करते हैं.

इस दौरान सोशल मीडिया पर विमान के यात्रियों की भी तस्वीरें वायरल हुईं.

इन तस्वीरों में देखा जा सकता था कि यात्रियों को अस्थायी तौर पर जिस जगह ठहराया गया वो कोई होटल नहीं था और न ही यात्रियों के लिए अलग कमरों की कोई व्यवस्था की गई थी.

इसे लेकर सोशल मीडिया पर एक और बहस ये छिड़ गई कि क्या एयर इंडिया को अपने यात्रियों के लिए ज़रूरी सुविधाएं मुहैया नहीं करानी चाहिए थीं.

https://twitter.com/PTI_News/status/1666448952483250180

रूसी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर उठे रहे सवाल

विमान के रूस में लैंड करने से एक दिन पहले अमेरिका की एक जानी मानी विमान कंपनी ने रूसी हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई थी, जबकि भारत की कंपनी ने इसके विरोध में अपनी राय रखी थी.

वैश्विक हवाई रास्तों को लेकर मंगलवार को ख़त्म हुई एक बैठक में रूसी हवाई क्षेत्र को लेकर चर्चा हुई थी.

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद कुछ पश्चिमी मुल्कों ने रूस की विमानन कंपनियों पर अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल को लेकर रोक लगा दी. बदले में रूस ने कुछ विदेशी कंपनियों पर अपने हवाई क्षेत्र इस्तेमाल को लेकर पाबंदी लगाई.

इस कारण कई कंपनियों को भौगोलिक तौर पर दुनिया के सबसे बड़े मुल्क की सीमाओं के बाहर से घूम कर अपने ठिकानों पर जाना होता है.

अमेरिका, यूरोपीय और जापानी विमानन कंपनियों ने अपनी उड़ानें रूस के ऊपर से ले जानी बंद कर दी हैं लेकिन भारत की एयर इंडिया, खाड़ी क्षेत्र के कई देश और चीनी विमानन कंपनियों ने रूसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करना जारी रखा है.

इसका फ़ायदा ये होता है कि ये उड़ानें अधिक वक़्त नहीं लेतीं और उनकी क़ीमतें भी कम होती हैं.

https://twitter.com/aditishahsays/status/1666358830567940096

अमेरिकी कंपनी यूनाइटेड एयरलाइन्स के सीईओ स्कॉट किर्बी ने हाल में कहा था कि विमानों को अब पहले की तुलना में अधिक रास्ता घूमकर भारत तक जाना होता है, इसलिए आर्थिक और विमानों की रेंज जैसे कारणों से भारत तक चला रही कई उड़ानों को उन्हें रोकना पड़ा रहा है.

सोमवार को उन्होंने सवाल किया था, "अहम अमेरिकी नागरिक जिस विमान में हों और वो विमान रूस में लैंड कर जाए तब क्या होगा? एक तरह का नया संकट पैदा कर सकता है."

ट्रैवल ब्लॉगर मैथ्यू क्लिंट ने कहा, "मुझे लगता है कि मौजूदा हालात में एयर इंडिया जो कर सकता था कर रहा है, लेकिन इस घटना ने एक दूसरी चिंता को जन्म दिया है. अगर एयर इंडिया ने रूसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल जारी रखा तो क्या अमेरिका को उस पर बैन नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि ये अमेरिकी विमानन कंपनियों के लिए नुक़सानदेह है."

https://twitter.com/LiveandLetsFly/status/1666432049631174657

इसके उत्तर में विनम्र लोन्गानी ने ट्वीट किया, "ऐसा नहीं है कि केवल एयर इंडिया ही रूसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर रहा है. गल्फ़ एयरलाइन्स, जो अमेरिकी कंपनियों के साथ काम करती हैं, वो भी ऐसा कर रही हैं. एयर इंडिया पर बैन लगाना अमेरिका अर्थव्यवस्था के हित में नहीं होगा क्योंकि कंपनी अमेरिकी विमान बनाने वाली बोईंग कंपनी से नए विमान ख़रीद रही है. मुझे नहीं लगता कि अमेरिकी राष्ट्रपति ऐसा कुछ करेंगे."

एक और यूज़र ने लिखा, "ये संवेदनशील मामला है, एयर इंडिया को इमर्जेंसी स्थिति में विमान वहां उतारना पड़ा. इस तरह की स्थिति में पायलट की मुख्य चिंता यात्रियों की सुरक्षा होती है न कि ये कि अमेरिका किसे पसंद करता है और किसे नहीं."

एक और यूज़र ने लिखा कि "इस दलील के हिसाब से भारत को चीन और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर अमेरिकी उड़ानों पर भी प्रतिबंध लगाना चाहिए."

https://twitter.com/kayezad/status/1666458123610013696

रूसी हवाई क्षेत्र को लेकर एयर इंडिया का रुख़

इसी सप्ताह हुई इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट असोसिएशन (आईएएटीए) की सालाना बैठक में संगठन के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कहा था, "एयर इंडिया में हम उस दायरे में रहकर कम करते हैं जो हमें हमारा देश देता है, हो सकता है कि इस पर सभी देशों की राय न बने. ऐसे में इसके परिणाम अलग हो सकते हैं."

आईएएटीए के महानिदेशक विली वॉल्श ने तो रूसी हवाई क्षेत्र को सभी के लिए खोलने की अपील तक कर दी थी.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि हर कोई रूसी हवाई क्षेत्र का खुलकर इस्तेमाल कर सके. मैं उस बात को लेकर स्पष्ट हूं कि ये सुरक्षा का मामला नहीं है."

हाल में एयर इंडिया को टाटा ग्रुप ने ख़रीदा था. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए कंपनी यूरोप और अमेरिका तक नॉन-स्टॉप उड़ाने चला रही हैं. इस मामले में रूसी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल उसके लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है.

https://twitter.com/AviationWeek/status/1666027175286325248

इमरजेंसी लैंडिंग और यात्रियों के लिए सुविधाओं पर चर्चा

मंगलवार 06 जून को दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रहे एयर इंडिया के A-173 विमान को इंजन में ख़राबी के कारण रूस के मागादान में उतारा गया था.

इस विमान में भारत के साथ-साथ अमेरिका के 40 और कनाडा के कई नागरिक सवार थे.

एयर इंडिया ने बयान जारी कर रहा कि विमान के एक इंजन में तकनीकी ख़राबी आ गई थी, जिस कारण उसे आपातस्थिति में उतारना पड़ा.

बयान में कहा गया है, "स्थानीय प्रशासन की मदद से यात्रियों के लिए होटल की व्यवस्था करने की कोशिश की गई लेकिन रूस के इस सुदूर जगह में ढांचागत सुविधाओं में कमी के कारण यात्रियों के लिए अस्थायी व्यवस्था की गई है."

कंपनी ने कहा, "मागादान में हमारे कर्मचारी नहीं हैं, लेकिन व्लादिवोस्तोक में मौजूद कंसुलेट जनरल से मदद लेकर और स्थानीय प्रशासन की मदद से यात्रियों के लिए सभी तरह की व्यवस्था की जा रही है."

https://twitter.com/airindia/status/1666312414760161283

ओकोत्स्क सागर के उत्तर में मौजूद मागादान एक बंदरगाह शहर है. ये शहर मॉस्को से 10 हज़ार किलोमीटर दूर बसा है.

रूसी समाचार वेबसाइट स्पुत्निक के अनुसार, शहर के यातायात मंत्री अलेक्सी सियोरपास ने कहा था, "यात्रियों को पास के एयरपोर्ट के नज़दीक एक स्कूल में ठहराया गया है, गर्भवती महिला और बच्चों के साथ सफ़र कर रही महिलाओं को शहर के मेडिकल कॉलेज की डॉरमेटरी में ठहराया गया है."

"सभी के लिए खाने की व्यवस्था की गई है और उन्हें गर्म कंबल भी दिए गए हैं. हालांकि यात्री परिसर से बाहर नहीं जा पाएंगे क्योंकि उनके साथ रूस सीमा सुरक्षाबल के कर्मी मौजूद रहेंगे."

लेकिन भारत में सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई. कई यूज़र्स ने यात्रियों के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए और कहा कि कंपनी ने यात्रियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की है.

तरुण शुक्ला नाम के एक यूज़र ने बुधवार को एक पोस्ट में लिखा, "सैन फ्रांसिस्को जा रही उड़ान को ग्रामीण इलाक़े में लैंड कराना पड़ा. छह घंटे के सफ़र के बाद यहां पहुंच कर 18 घंटे हो चुके हैं. अब तक एयर इंडिया ने कुछ नहीं कहा."

उन्होंने जो वीडियो पोस्ट किया उसमें देखा जा सकता है कि कई यात्रियों को एक साथ स्कूल के एक कमरे में ठहराया गया है. वहां उनके सोने के लिए नीचे गद्दे बिछाए गए हैं और गिनती के बेड की व्यवस्था की गई है.

https://twitter.com/shukla_tarun/status/1666303378249629697

बोर्डिंग एरिया नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, "क्रू मेम्बर के लिए होटल में व्यवस्था की गई जबकि 36 घंटों बाद भी यात्री ज़मीन पर सोने को बाध्य हैं."

https://twitter.com/BoardingArea/status/1666424914738544640

अमेरिकी यात्रियों पर अमेरिका ने क्या कहा?

बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस वार्ता में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के डिप्टी प्रवक्ता वेदांत पटेल से सवाल किया गया कि एयर इंडिया के विमान में कितने अमेरिकी नागरिक हैं.

इसके उत्तर में वेदांत पटेल ने कहा, "उस विमान में 50 से भी कम अमेरिकी नागरिक सवार थे. हमें इस बात का पता है कि फंसे यात्रियों की मदद के लिए एक विमान वहां पहुंचने वाला है. इस बारे में आगे क्या होगा और इस बारे में और जानने के लिए हमें एयर इंडिया से जानकारी मिलने का इंतज़ार करना होगा."

"किसी अमेरिकी नागरिक रूस में हमारे दूतावास और काउंसलर सेवा के अधिकारियों से संपर्क नहीं किया है. इसलिए हमें इस बारे में अधिक कुछ नहीं पता."

उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार स्थिति पर नज़र है.

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