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Plane Crash: क्या है Seat 11A का रहस्य? दो विमान हादसे, दो यात्रियों को मिला 'वरदान'! मौत को छूकर टक से लौटे

Air India Plane Crash Update: अहमदाबाद से 12 जून 2025 को लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर में सवार 242 लोगों में से सिर्फ एक शख्स जिंदा बचा-विश्वास कुमार रमेश, जो सीट 11A पर बैठा था। लेकिन इस कहानी में एक ऐसा ट्विस्ट है, जो रोंगटे खड़े कर देता है।

27 साल पहले, 1998 में थाईलैंड की एक उड़ान में भी एक यात्री ने मौत को मात दी थी, और वो भी ठीक उसी सीट 11A पर बैठा था! क्या है इस सीट का रहस्य? क्या ये महज इत्तेफाक है या कोई अनदेखा चमत्कार? आइए जानते हैं...

Air India Plane Crash Update

क्या हुआ था 27 साल पहले?

1998 में थाई एयरवेज की फ्लाइट TG261 बैंकॉक से सूरत थानी जा रही थी, जब लैंडिंग के दौरान विमान रुक गया और दलदल में जा गिरा। उस हादसे में 146 में से 101 लोगों की जान चली गई। लेकिन 20 साल के रुआंगसाक लोयचुसाक, जो उस वक्त सीट 11A पर बैठे थे, चमत्कारिक रूप से बच निकले।

फेसबुक पर जताई थाई ने हैरानी

अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया की फ्लाइट हादसे की खबर मिलते ही, आज 47 साल के रुआंगसाक, एक थाई गायक और अभिनेता, उस भयानक मंजर को याद करते हुए कहते हैं कि जब मुझे पता चला कि एयर इंडिया हादसे का इकलौता बचा यात्री विश्वास कुमार रमेश (Vishwas Kumar Ramesh) भी सीट 11A पर था, तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए। फेसबुक पर थाई भाषा में लिखे उनके पोस्ट में ये दर्द और हैरानी साफ झलकती है। भारत के विमान हादसे में बचा यात्री मेरी ही सीट 11A पर था। मैं उन सभी के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं, जिन्होंने अपनों को खोया।

Air India Plane Crash Update

Two Passengers Returned From Dead End: मौत को छूकर टक से लौटा, 11A का चमत्कार?

एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 जैसे ही अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ी, दो मिनट में ही वो एक मेडिकल कॉलेज की इमारत से टकरा गई। आग का गोला बन चुके विमान में सिर्फ विश्वास कुमार रमेश ही जिंदा बचे। 40 साल के ब्रिटिश-भारतीय रमेश उस वक्त आपातकालीन निकास द्वार के पास सीट 11A पर बैठे थे। हादसे के बाद वो टूटी हुई फ्यूजलेज से निकलकर बाहर आए और खून से सने कपड़ों में लंगड़ाते हुए एम्बुलेंस तक पहुंचे। अस्पताल में डीडी न्यूज को उन्होंने बताया कि मुझे लगा मैं मरने वाला हूं। लेकिन, जब आंखें खुलीं, तो मैंने सीटबेल्ट खोला और जहां रास्ता दिखा, वहां भागा। मेरे सामने लोग मर रहे थे।

रमेश की इस चमत्कारी कहानी ने दुनिया को हैरान कर दिया। लेकिन, जब रुआंगसाक ने 1998 के हादसे का जिक्र किया, तो ये संयोग रोंगटे खड़े करने वाला बन गया। रुआंगसाक लोयचुसाक (Thai singer James Ruangsak Loychusak) ने बताया कि 1998 के हादसे के बाद वो एक दशक तक फ्लाइट से डरते रहे। मुझे सांस लेने में तकलीफ होती थी। मैं हमेशा खिड़की से बाहर देखता, किसी को उसे बंद नहीं करने देता। टकराने की आवाज, जलने की गंध, दलदल के पानी का स्वाद-ये सब मुझे सालों तक सताता रहा।

11A Lucky Seat: क्या 11A है 'लकी सीट'?

विश्वास रमेश की सीट 11A आपातकालीन निकास द्वार के पास थी, जिसके टूटने से उन्हें भागने का मौका मिला। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस सीट का स्थान-विमान के मजबूत हिस्से 'विंग बॉक्स' के पास-और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने उनकी जान बचाई। लेकिन क्या ये सिर्फ संयोग है? या 11A में कोई रहस्यमयी शक्ति है? सोशल मीडिया पर लोग इस सीट को 'लकी' बताकर बुक करने की होड़ में लग गए हैं। एक यूजर ने लिखा, '11A तो अब हर फ्लाइट में बुक हो रही है!'

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Seat 11A Mystery: 11A सीट का रहस्य- संयोग या चमत्कार?

हालांकि, एविएशन एक्सपर्ट जितेंद्र भार्गव बताते हैं कि सीट 11A का कोई जादू नहीं। ये आपातकालीन निकास के पास थी, जिसके टूटने से रमेश को बाहर निकलने का मौका मिला। बाकी यात्री 5-10 मीटर दूर थे, वो बच नहीं सके। फिर भी, दो अलग-अलग देशों में, 27 साल के अंतराल में, एक ही सीट नंबर का ये संयोग हर किसी को सोच में डाल रहा है।

क्या कहता है इतिहास?

विमान हादसों में अकेले बचे लोगों की कहानियां बेहद कम हैं। 1972 में वेस्ना वुलोविक 10 किमी ऊंचाई से गिरकर भी बच गई थीं, लेकिन उनकी सीट का कोई जिक्र नहीं। 1987 में सेसिलिया सिचन और 2009 में बहिया बकारी भी चमत्कारिक रूप से बची थीं। लेकिन 11A का ये संयोग अनोखा है। क्या ये महज इत्तेफाक है, या किस्मत का कोई खेल? रुआंगसाक लोयचुसाक (Ruangsak Loychusak)और विश्वास की कहानी हर उस शख्स को हैरान कर रही है, जो इस '11A रहस्य' को समझना चाहता है।

सवाल जो बाकी हैं

क्या सीट 11A सचमुच जिंदगी का दूसरा मौका देती है? या ये सिर्फ एक संयोग है, जो हमें नियति पर सवाल उठाने को मजबूर करता है? इस रहस्य का जवाब शायद कभी न मिले, लेकिन एक बात तय है-सीट 11A अब सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि दो जिंदगियों की चमत्कारी कहानी बन चुकी है।

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