कंधार के बाद तालिबान का लश्कर गाह पर भी कब्जा, अफगान सैनिकों ने किया समर्पण, खतरे में काबुल
तालिबान ने कहा है कि देश के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी तालिबान का पूर्ण नियंत्रण हो गया है।
काबुल, अगस्त 13: कंधार पर कब्जा करने के बाद अब तालिबान ने दावा किया है कि उसने अफगानिस्तान के लश्कर गाह पर भी कब्जा कर लिया है। जिसके बाद अफगानिस्तान सरकार के गिरने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है। वहीं, तालिबान के लश्कर गाह पर कब्जे के दावे की पुष्टि एक वरिष्ठ अफगान सुरक्षा सूत्र ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को की है। सूत्र ने बताया कि लश्कर गाह में हर जगह तालिबान के लोग फैले हुए हैं और दुकानों को बंद करवा दिया है। वहीं, बताया जा रहा है कि सुरक्षबलों और तालिबान के बीच भीषण जंग होने की भी आशंका है।
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हेरात एयरपोर्ट पर भी तालिबान का कब्जा
इसके साथ ही तालिबान ने कहा है कि देश के तीसरे सबसे बड़े शहर हेरात के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी तालिबान का पूर्ण नियंत्रण हो गया है। तालिबान ने दावा किया है कि हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए मौजूद तमाम सुरक्षाकर्मियों ने तालिबान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इससे पहले तालिबान ने पहले कहा था कि उसने अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर कब्जा कर लिया है। कंधार और हेरात पर कब्जा तालिबान की अब तक की सबसे बड़ी जीत बताई जा रही है। यानि, अब देश के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहर का प्रतिनिधित्व तालिबान के हाथों में होगा। आपको बता दें कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के बाहर आने के बाद तालिबान लगातार आक्रामक बना हुआ है और करीब 60 प्रतिशत से ज्यादा अफगानिस्तान पर अब तालिबान का आधिकारिक तौर पर कब्जा हो चुका है।

चारों तरफ से घिरी अफगानिस्तान सरकार?
आपको बता दें कि अफगानिस्तान सरकार ने पिछले एक हफ्ते में उत्तर, दक्षिण और पश्चिम अफगानिस्तान के ज्यादातर हिस्सों में अपना प्रभाव खो दिया गै और माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में तालिबान के लोग राजधानी काबुल तक पहुंच जाएंगे। तालिबान के लोग पहले ही देश की राजधानी काबुल से महज 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति गजनी शहर पर कब्जा कर चुके हैं। इसके साथ ही खबर ये भी आ रही है कि तालिबान की कोशिश राजधानी काबुल को चारों तरफ से घेरकर सरकार पर इस्तीफा देने का दवाब बनाना है। तालिबान के अनुसार, गुरुवार को तालिबान ने ऐतिहासिक केंद्रीय शहर गजनी पर भी कब्जा कर लिया, जो काबुल के दक्षिण-पश्चिम में 150 किमी (90 मील) स्थिति है। वहीं, पश्चिम में हेरात और दक्षिण में कंधार पर भी तालिबान का कब्जा हो चुका है, वहीं, तालिबान ने उत्तर पश्चिम में काला-ए-नव पर कब्जा करने का भी दावा किया है। यानि, काबुल को चारों तरफ से घेरा जा रहा है।

अब कहां-कहां अफगान सरकार मजबूत ?
रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी अफगानिस्तान सरकार के कब्जे में कई एयरपोर्ट हैं। अफगानिस्तान सरकार का अभी भी उत्तर में मुख्य शहर मजार-ए-शरीफ और जलालाबाद पर नियंत्रण है जो देश के पूर्वी हिस्से में पाकिस्तानी सीमा के पास स्थित है। वहीं, राजधानी काबुल पर अभी भी सरकार का नियंत्रण है। लेकिन, उसके पीछे की बड़ी वजह राजधानी में अभी भी अमेरिकी सेना का मौजूद होना है और तालिबान नहीं चाहता है कि वो जाती हुई अमेरिकन आर्मी को निशाना बनाए। लिहाजा, अमेरिकी सेना के निकलने तक तालिबान सिर्फ काबुल को घेरने में लगा है और एक्सपर्ट बताते हैं कि जैसे ही बची हुई अमेरिकन सेना काबुल से निकलेगी, अफगानिस्तान सरकार पर तालिबान का कब्जा हो जाएगा। बुधवार को एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि तालिबान 30 दिनों में काबुल को पूरे देश से अलग कर सकता है और अगले 90 दिनों के अंदर में काबुल को भी छीन सकता है।












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