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Four Stars of Destiny के बाद Alone in the Ring पर भी रोक, दो पूर्व सैन्य प्रमुखों की किताबों पर होल्ड क्यों?

Alone in the Ring: एक पूर्व सेना प्रमुख की किताब छह महीने से ज्यादा समय से लटकी हुई है, जबकि अब दूसरे पूर्व सेना प्रमुख की किताब, जिसका 2 अगस्त को विमोचन होना था, उसे रोक दिया गया है, क्योंकि दोनों प्रकाशक रक्षा मंत्रालय से जवाब मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

गुरुवार को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में बताया गया था, कि 'अलोन इन द रिंग' किताब में 2002 से 2005 तक सेना प्रमुख रहे लेखक एन सी विज ने लिखा है, कि भारतीय खुफिया एजेंसियां ​​कारगिल युद्ध से पहले पाकिस्तान की सैन्य खरीद का पता लगाने में "गंभीर रूप से नाकाम" रहीं थीं, जिसके इस महीने 25 साल पूरे हो रहे हैं।

Four Stars of Destiny

तो सवाल ये हैं, कि क्या ऐसे ही खुलासों को रोकने के लिए सरकार ने इन किताबों के प्रकाशन को होल्ड कर दिया है?

अलोन इन द रिंग किताब पर होल्ड

अपनी किताब में, जिसे अगले हफ्ते ब्लूम्सबरी की तरफ से प्रकाशित किया जाना है, उसमें जनरल विज, जो कारगिल युद्ध के दौरान सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) थे, उन्होंने यह भी लिखा है, कि रॉ - भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी - ने पाकिस्तान के साथ युद्ध की संभावनाओं का "गलत आकलन" किया था। पुस्तक की समीक्षा प्रतियां जारी कर दी गई हैं और अमेजन ने बताया है, कि इसकी लॉन्च तिथि 20 जुलाई के आसपास है। हालांकि, आज 20 जुलाई है, लेकिन आज इस किताब की लॉन्चिंग नहीं हो पाई है।

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है, कि जब ब्लूम्सबरी के मुख्य संपादक कृष्ण चोपड़ा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, कि "कुछ दिन पहले, सेना मुख्यालय के अधिकारियों ने हमसे पुस्तक की समीक्षा के लिए कहा था, जो हमने कर दी है। हमने 2 अगस्त को पुस्तक के लॉन्च के लिए मेहमानों को आमंत्रित किया था, लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया जाएगा।"

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जनरल विज ने कहा, कि "दो दिन पहले सेना से किसी ने मुझे पांडुलिपि जमा करने के लिए बुलाया था, जो मैंने कर दी है। मैं 21 साल पहले रिटायर्ड हो चुका हूं और इतने लंबे समय तक रहस्य कैसे बनाए रखे जा सकते हैं? मेरे दिमाग में यह बात भी नहीं आई, कि मुझे प्रकाशन से पहले अपनी पांडुलिपि सेना को जमा कर देनी चाहिए, क्योंकि घटनाएं बहुत पहले की हैं।"

इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया है, कि उसने सेना से इस बाबत प्रतिक्रिया लेने के लिए सवाल भेजे हैं, लेकिन सेना की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

चोपड़ा ने कहा, कि "जनरल विज की पुस्तक एक अच्छी पुस्तक है, जिसमें एक बेहतरीन सेना प्रमुख द्वारा बहुत ही रचनात्मक टिप्पणियां की गई हैं और हमें उम्मीद है, कि हम इसे बहुत जल्द ही जारी कर सकेंगे।"

हालांकि ऐसा कहना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल है।

जनरल एम एम नरवणे की पुस्तक को ग्रीन सिग्नल का इंतजार

जनरल एम एम नरवणे की पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी', जो 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे थे, उसके लिए छह महीने से ज्यादा समय से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बारे में कहा जाता है, कि इसमें चीन के साथ 2020 के सीमा संघर्षों के बारे में अब तक अज्ञात विवरण और अग्निवीर योजना की आलोचनात्मक समीक्षा शामिल है।

इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया है, इसके प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस साल के अंत से पहले इसकी रिलीज की तारीख तय नहीं कर सकेंगे और अमेजन पर इसके लिए "फिलहाल अनुपलब्ध" घोषणा है। सूत्रों ने कहा है, कि पांडुलिपि को रक्षा मंत्रालय ने "एक दौर के बदलावों के बाद वापस कर दिया था, जिसमें कुछ और समय लगने की संभावना है।"

वहीं, जनरल नरवणे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कि वह अपनी आत्मकथा की "समीक्षा" की वर्तमान स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंन कहा, कि "मुझे यह किताब लिखने में मजा आया और यही मायने रखता है। इसे लिखने से संतुष्टि मिली है।"

जनवरी 2024 में, जब इंडियन एक्सप्रेस ने पहली बार सेना की तरफ से उनके संस्मरणों की जांच की रिपोर्ट की थी, जनरल नरवणे ने कहा था, कि "मैंने वही किया जो मुझे करना था और कई महीने पहले ही प्रकाशकों को पांडुलिपि सौंप दी थी। यह प्रकाशकों पर निर्भर करता है, कि वे बताएं कि देरी हुई है या नहीं। वे ही संपर्क में हैं और उनसे मुझे सब कुछ बताने की उम्मीद नहीं की जाती है।"

वहीं, समीक्षा की स्थिति और पहले दौर के बदलावों के बारे में पूछे जाने पर पेंगुइन रैंडम हाउस की प्रकाशक मिली ऐश्वर्या ने कहा, कि "चूंकि पांडुलिपि समीक्षाधीन है, इसलिए इस स्तर पर मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।"

Four Stars of Destiny

संयोग से, दिसंबर 2023 में, नरवणे के संस्मरणों के "अर्क" पीटीआई की तरफ से जारी किए गए थे। इसके मुताबिक, पुस्तक में जनरल नरवणे ने 31 अगस्त 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख किया है, जब चीन रेचिन दर्रे क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों को ले जा रहा था। जनरल नरवणे ने लिखा है, कि "रक्षा मंत्री ने उन्हें बताया, कि उन्होंने प्रधानमंत्री से बात की है और सेना चीनी घुसपैठ से निपटने के तरीके पर अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। और सेना प्रमुख से कहा गया, "जो उचित समझें, वो करें।"

अर्क के मुताबिक, अग्निवीर योजना पर पहले उनके और प्रधानमंत्री के बीच "सैनिक स्तर पर अल्पकालिक विकल्प" के रूप में चर्चा हुई थी, लेकिन बाद में इसे संशोधित किया गया।

पूर्व सेना प्रमुख ने लिखा है, कि "हम सेना में इस घटनाक्रम से आश्चर्यचकित थे, लेकिन नौसेना और वायु सेना के लिए, यह एक बिजली की तरह था।"

जनरल दुआ को भी इजजात का इंतजार

पेंगुइन रैंडम हाउस की तरफ से घोषित एक अन्य किताब को लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने लिखा है, जो एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख के रूप में रिटायर्ड हुए हैं। उनकी आगामी पुस्तक "ए जनरल रिमिनिसेस: ए लाइफ अंडर फायर इन कश्मीर" की भी अमेजन पर घोषणा की गई है, लेकिन वेबसाइट पर "वर्तमान में अनुपलब्ध" टैग है।

इस किताब की भी रक्षा मंत्रालय/सेना अधिकारियों की तरफ से इस साल की शुरुआत से ही "समीक्षा" की जा रही है और पेंगुइन रैंडम हाउस ने अभी तक इसकी लॉन्च तिथि को अंतिम रूप नहीं दिया है। दिसंबर 2023 में जनरल दुआ ने इंस्टाग्राम पर पुस्तक के प्री-ऑर्डर की घोषणा की थी। उन्होंने इसे "एक आतंकवादी से नायक बने व्यक्ति की सच्ची कहानी" बताया था, और पोस्ट किया था, कि पुस्तक जनवरी 2024 में लॉन्च की जाएगी।

इंडियन एक्सप्रेस ने जनरल दुआ के हवाले से लिखा है, कि "वे अपनी पुस्तक के विमोचन में देरी के कारणों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।"

ऐसा माना जाता है, कि उनकी दूसरी पांडुलिपि, जिसे हार्पर कॉलिन्स द्वारा प्रकाशित किया जाना है, वो भी रक्षा अधिकारियों के पास मंजूरी का इंतजार कर रही है। इस पुस्तक का शीर्षक अस्थायी रूप से "बेस्ट ऑफ ब्रेव्स" रखा गया है। हार्पर कॉलिन्स के कार्यकारी प्रकाशक उदयन मित्रा ने कहा, कि "जनरल दुआ की पांडुलिपि को हाल ही में मंजूरी के लिए भेजा गया है, और हमें उम्मीद है कि इसे उचित समय पर मंजूरी मिल जाएगी।"

किताबों के प्रकाशन के लिए नियम क्या हैं?

नियमों के मुताबिक, सशस्त्र बलों के सेवारत अधिकारी और नौकरशाह पुस्तक प्रकाशन के लिए विशिष्ट नियमों से बंधे होते हैं। हालांकि, सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए यह मामला अस्पष्ट है।

उदाहरण के लिए, सेना नियम, 1954 की धारा 21 में कहा गया है, कि अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी रूप में किसी भी राजनीतिक प्रश्न या सेवा विषय से संबंधित या किसी सेवा संबंधी जानकारी से संबंधित कोई भी मामला प्रकाशित नहीं करेगा या प्रेस को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संप्रेषित नहीं करेगा, "या केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना ऐसे प्रश्न या मामले या ऐसी जानकारी से संबंधित कोई पुस्तक या पत्र या लेख या अन्य दस्तावेज प्रकाशित नहीं करेगा या प्रकाशित नहीं करवाएगा।"

लेकिन सूत्रों ने कहा है, कि ये सशस्त्र बलों के कर्मियों पर लागू नहीं हो सकते हैं, जो अपने काम से असंबंधित और या साहित्यिक या कलात्मक प्रकृति की कोई किताब लिख रहे हैं।

जबकि सेवानिवृत्त सेना अधिकारियों के लिए कोई विशिष्ट नियम नहीं हैं।

एक रक्षा सूत्र ने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 का हवाला दिया, जिसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा जून 2021 में संशोधित किया गया था। संशोधित नियमों ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों, जिन्होंने खुफिया या सुरक्षा से संबंधित संगठनों में सेवा की है, उन्हें बिना पूर्व अनुमति के सेवानिवृत्ति के बाद संगठन से संबंधित कोई भी जानकारी प्रकाशित करने से रोक दिया गया है। सूत्र ने कहा, कि यद्यपि तीनों रक्षा सेवाएं इन नियमों के अंतर्गत नहीं आती हैं, फिर भी सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कर्मियों को भी ऐसी अपेक्षाओं का पालन करना चाहिए।

सूत्र ने कहा, "एक शीर्ष सेवा अधिकारी के पास बहुत सी गोपनीय जानकारी होती है। इसलिए, अगर वे इसे किसी किताब या लेख में दर्ज कर रहे हैं, तो इसके लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता हो सकती है।"

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