डूरंड बॉर्डर पर पाकिस्तानियों को ठोक रहा तालिबान, जानें क्यों शुरू हुई लड़ाई? घुटनों पर शहबाज
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन का निर्माण अंग्रेजी शासनकाल में 1893 में हुआ था, लेकिन अफगानिस्तान के किसी भी शासक ने डूरंड लाइन को मान्यता नहीं दी है।

Afghanistan Pakistan Conflict: काबुल की सत्ता पर तालिबान के कब्जे के बाद जो पाकिस्तान तालियां पीट रहा था, वो अब अपना सिर पीट रहा है, क्योंकि तालिबान ने पाकिस्तान के खिलाफ खुलेआम जंग का ऐलान कर दिया है। तालिबान के सैनिक डूरंड बॉर्डर पर खुलेआम पाकिस्तान के नागरिकों को ठोक रहे हैं और ताजा घटना में तालिबान के सैनिकों की गोलाबारी में कम से कम 7 पाकिस्तानी नागरिकों की मौत हो गई है। स्थिति ये है, कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खुद घुटनों पर आ गये हैं और तालिबान से शांति की अपील कर रहे हैं।

अफगान-तालिबान सीमा पर गोलाबारी
पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग ने पुष्टि की है, कि रविवार को अफगानिस्तान-पाकिस्तान चमन बॉर्डर पर अफगान सेना की तरफ से तोप के गोले दागे गये हैं और गोलीबारी की गई है, जिसमें कम से कम 7 आम नागरिकों की मौत हो गई है और कम से कम 16 लोग गंभीर घायल हो गये हैं। पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि, अफगानिस्तान के सैनिकों ने "अकारण और अंधाधुंध" फायरिंग की, जिसका पाकिस्तान के सैनिकों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया। हालांकि, अफगानिस्तान को कितना नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान की तरह से की गई भारी गोलीबारी की घटना को "अकारण और आक्रामक" बताया है।
तालिबान के आगे बेबस पाकिस्तान
पिछले साले 15 अगस्त को तालिबान सत्ता पर काबिज हुआ था और जश्न पूरे पाकिस्तान में मना था। पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसे 'अफगानिस्तान के पैरों से गुलामी की बेड़ियों का टूटना' बताया था, लेकिन अब यही पाकिस्तान मातम मना रहा है। तालिबानी शासकों के आगे पाकिस्तान की सरकार और सैनिक बेबस नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ताजा हमले को लेकर कहा है, 'चमन (बॉर्डर) में अफगान सीमा बलों द्वारा अकारण गोलाबारी और भारी फायरिंग के परिणामस्वरूप कई पाकिस्तानी नागरिक शहीद हो गए और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए, यह दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।' पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का ये बयान बेबसी से भरा है, क्योंकि काबुल पर कब्जे के ठीक बाद ही तालिबान ने डूरंड बॉर्डर को मानने से इनकार कर दिया था।

अफगान फोर्स को क्यों आया गुस्सा?
हालांकि, पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर 7 लोगों के मरने और 16 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है, लेकिन बलूचिस्तान पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में 30 से ज्यादा लोगों के घायल होने की रिपोर्ट दी है। वहीं, रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, अफगान फोर्स ने ये गोलीबारी उस वक्त शुरू की, जब पाकिस्तान की सेना ने डूरंड लाइन पर अफगानिस्तान की तरह से चल रहे एक चेक पोस्ट के निर्माण कार्य को रूकवाने की कोशिश की। अफगान सुरक्षा बलों के सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि, पाकिस्तान की सेना ने अफगान फोर्स से अफगानिस्तान की जमीन पर चेक पोस्ट के निर्माण को रोकने की कोशिश की और इसके बाद ही तनाव भड़का।

डूरंड लाइन पर पीछे नहीं हटेगा तालिबान
तालिबान के सत्ता में आने से पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा को विभाजित करने वाली डूरंड लाइन पर तारों के बाड़ लगा दिए थे। पाकिस्तान के डूरंड लाइन का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा कंटीली तारों से घेर दिया था। लेकिन, तालिबान ने सत्ता में आने के बाद कंटीली तारों से बनी सीमा रेखा को तोड़ना शुरू कर दिया। जब पाकिस्तानी सैनिकों ने रोकने की कोशिश की, तो मामला तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, उस वक्त पाकिस्तानी फोर्स ने कुछ नहीं किया, क्योंकि तालिबान सत्ता में आया ही था। सत्ता में आने के 3 महीने के अंदर तालिबान ने ट्रकों के जरिए कंटीली तार से बनाए बॉर्डर फैन्सिंग को तोड़ दिया और उसके बाद से ही अफगान बल और पाकिस्तान फोर्स के बीच लगातार संघर्ष हो रहे हैं। इसके साथ ही बॉर्डर फैन्सिंग हटने से अब पाकिस्तान तालिबान के लिए पाकिस्तान के अंदर हमला करना काफी आसान हो गया है। पिछले महीने भी एक अज्ञात बंदूकधारी ने पाकिस्तना की तरफ अचानक फायरिंग शुरू कर दी थी, जिसमें एक पाकिस्तानी सैनिक मारा गया था।

क्या है डूरंड लाइन विवाद
पाकिस्तान और अफगानिस्तान 2640 किलोमीटर लंबी सीमा को साझा करते हैं और डूरंड लाइन को 1893 में हिंदूकुश क्षेत्र में स्थापित किया गया था। उस वक्त इस रेखा को अफगानिस्तान और ब्रिटिश शासित भारत के बीच आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली रेखा कहा गया था, लेकिन भारत के विभाजन के बाद इसे अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा ब्रिटिश शासन ने घोषित कर दी। यह रेखा पश्तून आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरती है और तालिबान पश्तूनों का संगठन है, लिहाजा पाकिस्तान के लिए डूरंड लाइन गले की हड्डी बन गई है। अफगानिस्तान ने कभी भी डूरंड लाइन को मान्यता नहीं दी है। तालिबान जब पहली बार शासन में आया था, उस वक्त भी उसने डूरंड लाइन को खारिज कर दिया था और फिर डूरंड लाइन के इर्द-गिर्द पश्तूनों के एक और संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' का निर्माण हुआ, जो लगातार पाकिस्तान पर हमले करता रहता है।

खराब हो रहे तालिबान-पाकिस्तान के संबंध
तालिबान के अफगानिस्तान में कब्जा करने की घटना का श्रेय पाकिस्तान ने लिया था, लेकिन अब पाकिस्तान को समझ नहीं आ रहा है, कि वो क्या करे। पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने हर सार्वजनिक मंच से तालिबान के लिए फंड मांगे, लेकिन अब यही तालिबान पलटकर वार कर रहा है। डूरंड लाइन के जिस क्षेत्र में ये गोलाबारी हुई है, वो क्षेत्र स्पिन बोल्डक-चमन बॉर्डर क्रॉसिंग कहलाता है और तालिबान किसी भी तरह इस पूरे क्षेत्र पर अपना कब्जा चाहता है, क्योंकि ये क्षेत्र व्यापारिक नजरिए से काफी महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र से अफगानिस्तान सूखे मेवे, कालीन और खनिज का निर्यात करता है, लिहाजा तालिबान इस पूरे क्षेत्र में अपना वर्चस्व चाहता है। लिहाजा, इस बात की उम्मीद काफी कम है, कि तालिबान इस क्षेत्र को लिए बगैर शांति से बैठने वाला है।












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