Afghanistan-Pakistan Clash: डूरंड लाइन पर रातभर चली लड़ाई, पाक का बड़ा दावा-133 लड़ाके मार गिराए
Afghanistan Pakistan Border Clash: भारत के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। डूरंड लाइन (Durand Line) पर शुरू हुई छिटपुट झड़पें अब बड़े सैन्य टकराव में बदल गई हैं।
तालिबान प्रशासन ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में सीमा पर पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया है, वहीं पाकिस्तान ने भी जवाबी कार्रवाई में भारी तबाही का दावा किया है। गुरुवार, 26 फरवरी देर रात शुरू हुई भीषण सैन्य कार्रवाई शुक्रवार, 27 फरवरी की सुबह तक जारी रही।

तालिबान ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर बड़े पैमाने पर सैन्य ठिकानों को तबाह करने का दावा किया है, जबकि पाकिस्तान ने काबुल तक धमाकों की गूंज पहुँचा दी है।
Taliban Attack on Pakistan: तालिबान का पलटवार: पाकिस्तान को उकसावे की सजा
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि अफगान सैन्य बलों ने डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी ठिकानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान शुरू किया है। तालिबान का कहना है कि यह हमला पिछले हफ्ते नंगरहार और पक्तिया प्रांतों में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों का जवाब है। 'अल जजीरा' के रिपोर्ट के मुताबिक, 26 फरवरी के हमले में 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और तालिबान ने 13 सीमा चौकियों (Outposts) पर कब्जा कर लिया है।
अफगान का दावा: 10 पाक सैनिक मारे गए, 13 चौकियां कब्जे में
अफगान सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि गुरुवार को हुए हमलों में 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 13 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया गया। तालिबान का कहना है कि यह हमला रविवार को पाकिस्तान द्वारा किए गए सीमा पार हवाई हमलों का बदला है।
वहीं पाकिस्तान का दावा है कि उसने रविवार के हवाई हमलों में कम से कम 70 तालिबान लड़ाकों को मार गिराया, हालांकि अफगानिस्तान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत आम नागरिक मारे गए।
पाकिस्तान का पलटवार, भारी नुकसान पहुंचाने का दावा
पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 26 फरवरी को एक्स पर बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तानी सेना ने खैबर पख्तूनख्वा के कई सेक्टरों में तालिबान की गोलीबारी का तुरंत और सख्त जवाब दिया है। मंत्रालय के अनुसार चितराल, खैबर, मोहम्मद, कुर्रम और बाजौर सेक्टरों में तालिबान बलों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने कहा कि पाकिस्तान की कोई भी चौकी न तो कब्जे में ली गई और न ही क्षतिग्रस्त हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि तालिबान की ओर से बिना उकसावे के हमला किया गया, जिसका पाकिस्तान ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
शुक्रवार तड़के जैदी ने दावा किया कि पाकिस्तानी कार्रवाई में 133 अफगान तालिबान लड़ाके मारे गए, 200 से अधिक घायल हुए, 27 चौकियां तबाह कर दी गईं और 9 चौकियों पर कब्जा किया गया। हालांकि उन्होंने अफगानिस्तान के इस दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की कि 10 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं।
क्यों बढ़ रहा है अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तनाव की जड़ में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हैं। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान अपनी जमीन पर पाकिस्तान तालिबान (TTP) को पनाह दे रहा है। टीटीपी की स्थापना 2007 में पाकिस्तान के जनजातीय इलाकों में हुई थी। यह संगठन अफगान तालिबान से अलग है, लेकिन दोनों के बीच वैचारिक, सामाजिक और भाषाई संबंध गहरे हैं।
अमेरिका स्थित आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा (ACLED) की दक्षिण एशिया विश्लेषक पर्ल पांड्या के अनुसार, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच छिद्रपूर्ण सीमा आतंकियों को सैन्य दबाव से बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने देती है। उन्होंने कहा कि अफगान तालिबान टीटीपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से हिचक रहा है, क्योंकि इससे टीटीपी के लड़ाके उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) में शामिल हो सकते हैं।
2025 सबसे हिंसक सालों में से एक
पर्ल पांड्या के मुताबिक, 2025 पिछले एक दशक के सबसे हिंसक वर्षों में से एक रहा है। एसीएलईडी के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में टीटीपी से जुड़े 1,000 से ज्यादा हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। 2026 की शुरुआत के आंकड़े भी पिछले साल के मुकाबले बराबर या उससे ज्यादा हिंसा की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अफगानिस्तान टीटीपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तो दोनों देशों के बीच तनाव और हिंसा बढ़ना तय है। हालांकि अफगान तालिबान लगातार पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करता रहा है।
क्या युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं दोनों देश?
सीमा पार से हो रही भारी गोलाबारी और दोनों तरफ से बढ़ते हताहतों की संख्या यह संकेत दे रही है कि यदि कूटनीतिक दखल तुरंत नहीं हुआ, तो यह टकराव एक पूर्ण युद्ध का रूप ले सकता है। अफगानिस्तान में बढ़ती अस्थिरता और पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां इस आग में घी डालने का काम कर रही।












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