अफगानिस्तान: दो वक्त की रोटी के लिए तरस रहे लोग ! मजबूरी में खा रहे हैं घास
नई दिल्ली, 22 सितंबर। अफगानिस्तान 27 वर्षों में सबसे खराब सूखे से गुजर रहा है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक सूखे की वजह से यहां पर फसलें नष्ट हो गई हैं और भोजन की कमी बढ़ गई है। जिसकी वजह से यहां के कुछ परिवारों को घास खाना पड़ है। यहां का एक इलाका जो कभी बादाम की खेती के लिए प्रसिद्ध था। वहां के हालात सबसे दयनीय है। इसी क्षेत्र में रहने वाले माहेर (बदला हुआ नाम) नामक व्यक्ति ने बताया कि वह एक ऐसे क्षेत्र में रहता है, जो कभी बादाम के बागों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन सूखे की वजह से अब उसका बाजार उद्यान मर चुका है। महेर के मुताबिक पहले 'हम बादाम उगाते थे, लेकिन अब वे पेड़ बाकी जमीन की तरह सूखे हैं। सूखे ने इस क्षेत्र में बहुत तबाही मचाई है। एक एकड़ कृषि भूमि नष्ट हो गई है। मेरे जैसे कई परिवार अब सड़क के किनारे रहने को विवश हैं।

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घास खाने की वजह से एक बेटा अस्पताल में है भर्ती
घास खाने की वजह से माहेर का एक बेटा बीमार हो गया है। माहेर कहते हैं कि 'इस साल सूखे की वजह से जीवन कठिन रहा है। कुछ दिन हमारे पास घास खाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। इससे मेरा पुत्र और पत्नी बीमार हो गए हैं। डॉक्टर ने कहा कि उनकी आंत क्षतिग्रस्त हो गई है। हालांकि, दोनों जल्द से जल्द ठीक हो इसको लेकर डॉक्टरों की तरफ से पूरी कोशिश की जा रही है।

DEC की पर लोगों की मिल रही है सहायता
रिपोर्ट्स के मुताबिक आपदा आपातकालीन समिति (डीईसी) की अपील पर लगभग सवा लाख लोगों को भोजन के लिए फंड मिल गया है। माहेर के मुताबिक वर्तमान में नकद वितरण कार्यक्रम की बदौलत उनके पास दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो गया है। मदद की वजह से उनका परिवार एक दिन में लगभग दो वक्त की रोटी बना सकता है। पिछले छह महीनों में आपदा आपातकालीन समिति (डीईसी) की अपील पर लगभग सवा लाख लोगों को उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसे दिए गए हैं, जिससे उन्हें भोजन, ईंधन और दवाएं खरीदने में मदद मिलेगी।

यूक्रेन युद्ध की वजह से देश में बढ़ी है महंगाई
माहेर के मुताबिक एक तरफ जहां सूखे की वजह से बादाम के पेड़ नष्ट हो गए हैं। वहीं सूखे की वजह से देश भर में खाद्य कीमतें बढ़ गई हैं। सूखे की वजह से कीमतों का बढ़ना सिर्फ एक पहलू है। खाद्य कीमतों के बढ़ने में यूक्रेन युद्ध भी जिम्मेदार है। क्योंकि अफगानिस्तान हमेशा से आयातित अनाज और वनस्पति तेल पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। यूक्रेन में युद्ध के चलते आयातित गेहूं की लागत पहुंच से बाहर हो गई है।

पिछले साल की तुलना में डबल हुई है महंगाई
इसी इलाके में फरहाना (बदला हुआ नाम) का भी परिवार रहता है। फरहाना के दो बच्चे हैं, उनका कहना है कि आटा और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें पिछले एक साल में दोगुनी से अधिक हो गई हैं। पिछले साल तक वनस्पति तेल 10-लीटर बैरल था। अब कीमत है 2,000 अफगानी है। फरहाना के परिवार को भी डीईसी की अपील पर फंड से सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि फंड से मिले पैसों से उन्होंने बच्चों के लिए स्वेटर और खाना की सामाग्री खरीदी है।
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