अफगानिस्तान: तालिबान की तैयारी पूरी, जुम्मे की नमाज के बाद बनेगी सरकार
काबुल, 02 सितंबर: अफगानिस्तान में तालिबान का काबुल एयरपोर्ट से लेकर पूरी सत्ता पर कब्जा हो गया है। ऐसे में तालिबान नई सरकार बनाने के लिए मीटिंग पर मीटिंग कर रहा है। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि कल यानी शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद तालिबान अफगानिस्तान में सरकार बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। 15 अगस्त को काबुल हथियाने के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान को अपने अंडर में ले लिया था। हालांकि अब काबुल एयरपोर्ट से अमेरिकी सेना के जाने के बाद अफगानिस्तान पर तालिबान का अब पूर्ण रूप से कब्जा हो गया है।

वहीं अब अफगानिस्तान पर कब्जा करने वाले तालिबान ने शुक्रवार यानी 03 सितंबर को नई सरकार बनाने के संकेत दिए है। नई हुकूमत को लिए तालिबान के नेताओं की बैठक कई लेवल पर जारी थी। जिसके बाद नई सरकार को लेकर किए जाने वाले विचार-विमर्श की प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि अफगानिस्तान में किस तरह की सरकार बनेगी?
वहीं इससे पहले अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के बाद तालिबानियों ने अपनी जीत की खुशी मनाई थी। बता दें कि 20 साल बाद एक बार फिर से अफगानिस्तान में तालिबान का राज होगा।
कैसा होगा तालिबानी शासन?
अफगानिस्तान की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा इस सरकार के सुप्रीम लीडर होंगे। यहां तक की देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति उनके आदेशों पर काम करेंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम लीडर को अफगानिस्तान में जाईम या रहबर पुकारा जाएगा। साफ शब्दों में कहे तो सुप्रीम लीडर का फैसला ही अंतिम फैसला होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार यह पूरी तरह इस्लामिक सरकार होगी। वहीं नई सरकार के गठन के लिए काबुल में राष्ट्रपति भवन में आलीशान समारोह की तैयारियां भी चल रही हैं।
कौन है तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा?
अफगान के सुप्रीम लीडर बनने वाले हिबतुल्लाह अखुंदजादा की पैदाइश साल 1961 में कंधार के पंजवई जिले की है। उनके पिता मुल्ला मोहम्मद अखुंद एक धार्मिक विद्वान थे, जो गांव की मस्जिद के इमाम थे। उन्होंने ही हिब्तुल्लाह को तालीम दी थी। साल 1980 में जब अफगानिस्तान में सोवियत यूनियन के झंडे के बीच अफगानिस्तान की सरकार चल रही थी। तो हिब्तुल्लाह अखुंदजादा का परिवार पाकिस्तान चला गया, जहां उन्होंने हथियार उठाकर बगावत कर दी, हालांकि बाद में जब तालिबान बना तो वो इसका हिस्सा हो गए।












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