अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान के ख़िलाफ़ जंग में अमेरिका, ब्रिटेन जैसे देशों को कितना नुक़सान हुआ?
अफ़ग़ानिस्तान से विदेशी ताकतों के लौटने के बाद देश पर फिर से तालिबान का शासन कायम हो गया है.
इस मुक़ाम पर यह देखना दिलचस्प हो सकता है कि अमेरिका और नेटो के उसके सहयोगियों ने अफ़ग़ानिस्तान में 20 सालों तक चले सैन्य अभियानों पर कितना खर्च किया है?
कितने तरह के सुरक्षा बल वहां थे?
अमेरिका ने तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान से बाहर करने के लिए उस पर पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को हमला बोला था. अमेरिका का आरोप था कि तालिबान ने अमेरिका में 9/11 का हमला कराने वाले ओसामा बिन लादेन और अल-क़ायदा के अन्य चरमपंथियों को अपने यहां पनाह दी थी.
बाद में, वहां अमेरिकी सैनिकों की संख्या में लगातार वृद्धि होती चली गई. वॉशिंगटन ने तालिबान से लड़ने के लिए अफ़ग़ानिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया. इससे 2011 तक सैनिकों की संख्या बढ़कर क़रीब 1,10,000 तक पहुंच गई.
हालांकि 2020 में अमेरिकी सैनिकों की संख्या घटकर केवल 4,000 रह गई थी. वैसे आधिकारिक आंकड़ों में, स्पेशल ऑपरेशन फ़ोर्सेज़ और अन्य अस्थायी इकाइयों का हिसाब हमेशा शामिल नहीं हो सकता.
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अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद विदेशी सैनिक
देश में मौज़ूद विदेशी सेना में अन्य देशों का भी हिस्सा था. इनमें नेटो गठबंधन के अन्य सदस्य शामिल थे.
हालांकि, अब तक वहां सबसे अधिक सुरक्षा बल अमेरिका के ही थे.
नेटो ने दिसंबर 2014 में अपने लड़ाकू मिशन को औपचारिक तौर पर समाप्त कर दिया.
लेकिन अफ़ग़ान बलों को प्रशिक्षित करने और चरमपंथ विरोधी अभियानों के समर्थन के लिए उसने वहां 13,000 जवानों को बनाए रखा.
अफ़ग़ानिस्तान में बड़ी संख्या में प्राइवेट सिक्योरिटी की भी मौज़ूदगी रही है.
अमेरिकी कांग्रेस के शोध के अनुसार, इसमें 2020 की अंतिम तिमाही में अमेरिका के 7,800 से अधिक नागरिक शामिल थे.
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कितना पैसा ख़र्च हुआ?
अफ़ग़ानिस्तान में ख़र्च का बड़ा हिस्सा अमेरिका ने दिया.
अमेरिकी सरकार के अनुसार, साल 2010 से 2012 के दौरान, वहां एक लाख से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात थे. उस दौरान युद्ध की लागत बढ़कर क़रीब 100 अरब डॉलर सालाना हो गई थी.
हालांकि जैसे-जैसे अमेरिकी सेना आक्रामक अभियानों से दूर होती चली गई और अपने को केवल अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण तक समेट लिया, तब सालाना ख़र्चे में तेजी से कमी होती चली गई.
पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया था कि 2018 में अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका का सालाना ख़र्च लगभग 45 अरब डॉलर था.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान में (अक्टूबर 2001 से सितंबर 2019 के बीच) सेना पर कुल ख़र्च 778 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.
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अफ़ग़ानिस्तान की लड़ाई
इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) और दूसरी सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर अफ़ग़ानिस्तान के फिर से निर्माण के लिए 44 अरब डॉलर का ख़र्च किया था.
इस तरह, आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर 2001 से 2019 के बीच अफ़ग़ानिस्तान की लड़ाई पर अमेरिका का कुल ख़र्च 822 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.
हालांकि इन ख़र्चों में पाकिस्तान में हुआ कोई भी ख़र्च शामिल नहीं था, जबकि अमेरिका इस देश को अफ़ग़ान में होने वाली कार्रवाइयों के लिए मुख्य बेस के तौर पर उपयोग करता रहा था.
ब्राउन यूनिवर्सिटी ने अपने एक अध्ययन के बाद पाया कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान दोनों पर अमेरिका ने पूरे अभियान के दौरान क़रीब 978 अरब डॉलर का ख़र्च किया था. इस अनुमान में वित्त वर्ष 2020 के दौरान हुआ ख़र्च भी शामिल था.
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अमेरिका और नेटो का वादा
इस अध्ययन में यह भी कहा गया कि पूरी लागत का आकलन करना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि सरकारी विभागों के ऑडिट के तरीके अलग-अलग होते हैं. और समय के साथ वे बदलते भी रहते हैं. इससे ख़र्च का कुल अनुमान बदल जाते हैं.
अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका के बाद, ब्रिटेन और जर्मनी के सबसे अधिक सैनिक थे.
अनुमानों के अनुसार, इन देशों ने इस युद्ध के दौरान वहां क्रमशः क़रीब 30 और 19 अरब डॉलर का ख़र्च किया था.
वहीं अपने क़रीब सभी सैनिकों को वापस लौटा लेने के बावजूद, अमेरिका और नेटो का वादा रहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान की अपनी सेना के लिए 2024 तक कुल 4 अरब डॉलर सालाना का ख़र्च करेंगे.
नेटो ने इस साल अब तक अफ़ग़ानिस्तान को 7.2 करोड़ डॉलर की मदद और उपकरण भेजे हैं.
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पैसा आख़िर कहां गया?
अफ़ग़ानिस्तान में भेजी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा चरमपंथ विरोधी अभियानों और सैनिकों की जरूरतों जैसे भोजन, कपड़े, मेडिकल सुविधा, भत्ते और अन्य लाभों पर ख़र्च किया गया.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने 2002 के बाद अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण पर भी क़रीब 143.27 अरब डॉलर का ख़र्च किया.
इनमें से आधी से अधिक राशि यानी 88.32 अरब डॉलर को अफ़ग़ान नेशनल आर्मी और अफ़ग़ान सुरक्षा बलों को तैयार करने पर ख़र्च की गई. वहीं अफ़ग़ानिस्तान में शासन और विकास के मद में लगभग 36 अरब डॉलर का आवंटन किया गया.
इसके अलावा नशीली दवा विरोधी अभियानाों और मानवीय मदद के लिए भी कुछ राशि लगाई गई. हालांकि इतने वक़्त में इन पैसों का कुछ हिस्सा बर्बादी, धोखाधड़ी और दुरुपयोग में बर्बाद हो गया.
अक्टूबर 2020 में अमेरिकी कांग्रेस में पेश की गई अपनी एक रिपोर्ट में अफ़ग़ानिस्तान में पुनर्निर्माण के प्रयासों की निगरानी करने वाली एक संस्था ने अनुमान लगाया कि मई 2009 और 31 दिसंबर, 2019 के बीच लगभग 19 अरब डॉलर का नुक़सान हो गया.
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कितने लोग मारे गए या घायल हुए?
साल 2001 में अफ़ग़ान युद्ध के शुरू होने के बाद से अब तक गठबंधन सेनाओं के 3,500 से अधिक सैनिक मारे गए. इनमें से 2,300 से अधिक अमेरिकी सैनिक थे. वहीं ब्रिटेन के 450 से अधिक सैनिक मारे गए.
इस अभियान में 20,660 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल भी हुए.
हालांकि इन हताहतों की संख्या अफ़ग़ान सुरक्षा बलों और नागरिकों की तुलना में बौनी सी है. 2019 में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति गनी ने बताया था कि पांच साल पहले जब वे राष्ट्रपति बने थे, तब से लेकर 2019 तक अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के 45,000 से अधिक जवान मारे गए थे.
उसी साल ब्राउन यूनिवर्सिटी ने अपने एक शोध में बताया था कि अक्टूबर 2001 के बाद से अफ़ग़ानिस्तान की सेना और पुलिस के 64,100 से अधिक लोग मारे जा चुके थे.
वहीं अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार, 2009 में हताहत नागरिकों की गणना व्यवस्थित रूप से शुरू होने के बाद वहां क़रीब 1,11,000 नागरिक या तो मारे गए या घायल हो चुके थे.
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