Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

अफगानिस्तान से ग्लोबल जिहाद का ऐलान करेगा तालिबान, भारत के लिए हालात चुनौतीपूर्ण कैसे बने?

अफगानिस्तान को अशांत छोड़कर अमेरिका सिर्फ फरार नहीं हुआ है, बल्कि उसने अफगानिस्तान को इ्स्लामिक चरमपंथियों का नया घर बना दिया है।

काबुल, अगस्त 22: अमेरिका के राष्ट्रपति ने 2011 में अलकायदा आतंकी ओसामा बिन लादेन को मारने, आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका के लड़ाई छेड़ने और 2020 में अलकायदा के खात्मे का श्रेय अमेरिका की झोली में डालकर अफगानिस्तान में लड़ाई खत्म करने का ऐलान कर दिया और इसके साथ ही अफगानिस्तान में 20 सालों के बाद बेरोक-टोक तालिबान की सत्ता स्थाई हो गई है। लेकिन, सवाल ये है कि अब तालिबान जब अफगानिस्तान के मंच से वैश्विक जिहाद का नारा बुलंद करेगा तो फिर उस कट्टरपंथ का मुकाबला कैसे किया जाएगा? अमेरिका ने तो भागने का विकल्प चुन लिया है, लेकिन भारत जैसे देशों का क्या होगा?

अफगानिस्तान से फरार हुआ अमेरिका

अफगानिस्तान से फरार हुआ अमेरिका

अफगानिस्तान को अशांत छोड़कर अमेरिका फरार हो गया। सिर्फ फरार नहीं हुआ, बल्कि उसने अफगानिस्तान में अरबों रुपये के अत्याधुनिक हथियार और उन लोगों को छोड़ गया, जिन्होंने अमेरिकन सैनिकों की मदद की थी। वो हथियार अब तालिबान के हाथ में हैं और मदद करने वाले अफगानियों में कुछ काबुल एयरपोर्ट पर अपनी जान बचाने के लिए गुहार लगा रहे हैं तो कई अफगानी तालिबान से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। तालिबानी आतंकियों के हाथ में अत्याधुनिक एक-47 राइफल हैं, टैंक हैं, गोला-बारूद हैं। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है कि तालिबान को काबुल पर कब्जे के लिए कोई मेहनत नहीं करनी पड़ी और अमेरिकी फौज काफी आराम से काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरते दिखी। अमेरिकी सेना ने युद्ध के मैदान से भागने का विकल्प चुना। तालिबान के साथ पाकिस्तान, अमेरिका और ब्रिटेन ने दलाली की और आम अफगानों की विश्वसनीयता को जूते से रौंद दिया और बेगुनाहों को कह दिया, जाओ आतंकियों के बीच मरो।

एकजुट सभी आतंकवादी संगठन

एकजुट सभी आतंकवादी संगठन

अलकायदा के पास भले ही अफगानिस्तान में इस वक्त कोई संगठनात्मक संरचना नहीं हो, लेकिन उसकी कट्टरपंथी विचारधारा अभी जीवित है और ना सिर्फ उसके लड़ाकों की संख्या में इजाफा करेगी बल्कि उसे तेजी से विकसित भी करेगी। अलकायदा को पाकिस्तान में स्थिति अपने वैचारिक भाई लश्कर-ए-तैयबा के साथ सलाफी संगठन का समर्थन है। खुरासान प्रांत का इस्लामिक राज्य भी ऐसा ही है। हक्कानी नेटवर्क और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के साथ तालिबान एक ही देवबंदी वैचारिक मंच साझा करते हैं, जो वहाबवाद से प्रेरित है। और इन सभी संगठनों का एकमात्र उद्येश्य है, ग्लोबल जिहाद का ऐलान करना, वैश्विक जिहाद की स्थापना करना और इनका अगुआ अब अफगानिस्तान की सत्ता पर स्थापित हो चुका तालिबान करेगा।

काबुल से तालिबान का वैश्विक जिहाद

काबुल से तालिबान का वैश्विक जिहाद

तालिबान के अब पंजशीर घाटी को छोड़कर अफगानिस्तान अमीरात के 6 लाख 52 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। वैश्विक जिहाद का अब काबुल में एक राजधानी के साथ कंधार में एक पता है। यह क्षण 2014 में इराक में मोसुल पर कब्जा करने वाले इस्लामिक स्टेट के समान है, और दुनिया विशेष रूप से यज़ीदी और शियाओं को अभी भी उन क्रूर दिनों के बुरे सपने आते हैं। जबकि अमेरिका ने वैश्विक पुलिस वाले की भूमिका निभाने से अपने हाथ धो लिए हैं, और उसके पास अब सिर्फ एक मुद्दा बचा है, महिलाओं की स्वतंत्रता। लेकिन, आने वाले दिनों में तालिबान के तहत अफगानिस्तान जिहाद का प्रतीक होगा और अफगानिस्तान पूरी दुनिया के कट्टरपंथियों के लिए एक ऐसा 'निशान' बन जाएगा, ऐसा प्रतीक बन जाएगा, जो उनकी विजय का विजयस्थली की तरह होगा। अफगानिस्तान से कट्टरपंथी विचारधारा वाले आतंकियों को प्रेरणा मिलेगी कि बंदूक के दम पर दुनिया में इस्लामिक कानून की स्थापना की जा सकती है।

तालिबान का संरक्षक पाकिस्तान

तालिबान का संरक्षक पाकिस्तान

तालिबान का मजबूत होना एशिया के लिए तो खतरनाक है ही, वो अफ्रीका के लिए विध्वंसकारी है। अफ्रीकन देशों में पहले से ही आईएसआईएस समेत कई आतंकी संगठन भीषण उत्पात मचाते हैं और अब उनका नया इस्लामिक अमीरात तालिबान अफगानिस्तान होगा। वहीं, पाकिस्तान इन सबके संरक्षक की भूमिका में आ गया है और अब अफ्रीकन देशो में पाकिस्तान का प्रभाव तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए ये गेम उल्टा भी पड़ सकता है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान एक बार अपनी शक्ति को एकत्रित करने के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा रेखा, डूरंड लाइन को मानने से इनकार करेगा, जो इस्लामाबाद के लिए खतरनाक होगा। वहीं, पाकिस्तान के अंदर पाकिस्तान-तालिबान ने भी पाकिस्तान में शरिया कानून लाने की मांग काफी आक्रामक अंदाज में शुरू कर दी है। इसके साथ ही पूरी दुनिया में इस्लामी कट्टरता बढ़ने के साथ मध्य पूर्व में भी इसी तरह की लहर का असर देखा जाएगा।

आतंक का कारखाना बनेगा अफगानिस्तान!

आतंक का कारखाना बनेगा अफगानिस्तान!

भले ही अमेरिका और ब्रिटेन तालिबान की इस बात पर विश्वास करते हैं, कि वे मान्यता और धन के लिए किसी तीसरे देश को आतंक का निर्यात नहीं करेंगे, लेकिन इसमें जरा भी शक नहीं होना चाहिए कि अफगानिस्तान एक नया आतंकी कारखाना बन जाएगा। जिसमें पाकिस्तान में एक्टिव 40 से ज्यादा आतंकी संगठन अपने आतंकियों को ग्रेजुएट होने के लिए अफगानिस्तान भेजेंगे। जहां से उन्हें आतंकी शिक्षा दी जाएगी, बम बांधकर बेगुनाहों को उड़ाने को जिहाद बताया जाएगा। पाकिस्तान में बलूच विद्रोहियों और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने पहले ही CPEC परियोजना पर काम कर रहे चीनी इंजीनियरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है, ऐसे में अगर चीन ये सोच रहा है कि वो मलाई खाकर बाहर निकल जाएगा, ऐसा नहीं होने वाला है।

मलाई खाकर बाहर नहीं निकल सकता है चीन

मलाई खाकर बाहर नहीं निकल सकता है चीन

बीजिंग के लिए भी कोई शिनजिंयाग एक सिरदर्द है और चीन के पास आतंक से बचने के लिए कोई बीमा पॉलिसी नहीं है। शिया ईरान तब तक सुरक्षित रहेगा, जब तक वह तालिबान के साथ गेंद नहीं खेलता और सुन्नी जिहादियों को आजादी नहीं देता है, जैसा कि उसने पहले किया था। जैसा कि इस्लामिक समूहों को कट्टरपंथी बनाने के लिए उनका कायापलट किया जाता है। ऐसे में अब यह बिल्कुल स्पष्ट है कि नए आतंकवादी समूह, 1990 के दशक में हरकत-उल-अंसार और HUJI के उत्तराधिकारी, तालिबान की निगरानी में अफगानिस्तान से पैदा होंगे। भारत अपनी भौगोलिक स्थिति, क्षेत्रीय विरोधियों, लोकतांत्रिक राजनीति और संस्कृति से सबसे पहले प्रभावित होगा। लिहाजा, भारत को वक्त रहते तैयार होना होगा और ऐसे संगठनों से बेहद सख्ती से निपटना होगा, जिनकी विचारधारा जिहादी है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+