कुवैत में टायरों के कब्रिस्तान की जगह बनेगा एक नया शहर
कुवैत सिटी, 30 अगस्त। यह जगह तेल के भंडार वाले इस देश के उत्तर की तरफ स्थित है और लगभग दो वर्ग किलोमीटर में ही फैली है. लेकिन इसे हाल तक टायरों के कब्रिस्तान के रूप में जाना जाता था, क्योंकि पूरे देश से बेकार हो गए टायर यहीं लाकर पटक दिए जाते थे.

शहर बनाने की योजना पर काम शुरू होने से पहले यहां चार करोड़ से भी टायरों का एक ढेर मौजूद था. करीब 17 सालों से टायर यहां लाए जा रहे थे, लेकिन 2012 से 2020 के बीच में यहां तीन बार आग लगने की बड़ी घटनाएं हुईं.
पर्यावरण पर असर
इन घटनाओं से आखिरकार इस इलाके के पर्यावरण पर असर पर सरकार का ध्यान गया और फिर असर हमेशा के लिए बंद कर देने का फैसला लिया गया. अल-जाहरा प्रांत से लगभग पांच किलोमीटर दूर यह लैंडफिल अब खाली है.
वहां मौजूद देश के तेल मंत्री मोहम्मद अल-फरेस ने बताया, "हम एक बड़े कठिन दौर से निकल चुके हैं जिसमें पर्यावरण को काफी भारी जोखिम था. आज यह इलाका साफ है और सभी टायरों को हटा दिया गया है ताकि 'साद अल-अब्दुल्ला शहर' परियोजना को शुरू किया जा सके."
बीते कुछ महीनों में टायरों को लादे हुए ट्रकों ने इस लैंडफिल से अल-सलमी प्रांत तक 44,000 से भी ज्यादा चक्कर लगाए हैं. अल-सलमी कुवैत के औद्योगिक इलाके के पास है और फरेस ने बताया कि यहां से हटाए गए टायरों को अस्थायी रूप से वहीं रखा जाएगा.
फिर ना बने लैंडफिल
उन्होंने बताया कि टायरों को या तो काटा जाएगा या किसी और तरह से इस्तेमाल किया जाएगा. उन्हें देश के अंदर भी इस्तेमाल किया जा सकता है या उनका निर्यात भी किया जा सकता है. फरेस ने यह भी कहा कि भंडारण "अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत किया जाएगा".

पर्यावरण प्राधिकरण के महानिदेशक शेख अब्दुल्ला अल-सबाह के मुताबिक सभी टायरों को रीसायकल करने की योजना बनाई जा रही है ताकि एक और लैंडफिल की जरूरत से बचा जा सके.
उन्होंने बताया, "पहले से ही एक फैक्ट्री उन्हें किसी दूसरे इस्तेमाल के लायक बना रही है और हमें उम्मीद है कि हमें कोई ऐसी कंपनी मिल जाएगी तो इस मसले को हल करने में हमारी मदद करेगी." ईपीएससीओ ग्लोबल जनरल कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी के प्रमुख अला हसन ने बताया कि उनकी कंपनी टायरों से कच्चा माल निकालने का काम करती है.
इनमें ऐसी चीजें भी होती हैं जो सड़क और फुटपाथ बनाने के काम आती हैं. हसन ने बताया कि उनकी कंपनी दूसरी फैक्ट्रियों के साथ मिल कर एक साल में लगभग बीस लाख टायरों को काटने या किसी दूसरे इस्तेमाल के लायक बनाने का काम कर सकती है.
सीके/ (एएफपी)
Source: DW
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