FATF की 27वीं शर्त पाकिस्तान के लिए गले की हड्डी कैसे बन गई है? ग्रे लिस्ट से निकलना 'असंभव' क्यों?

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बने रहने के फैसले के बाद से पाकिस्तान इन दिनों बुरी तरह हिल गया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एफएटीएफ पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस्लामाबाद, जून 27: पिछले एक हफ्ते से पाकिस्तान लगातार कहता आ रहा था कि उसने एफएटीएफ की 27 शर्तों में से 26 शर्तों को पूरा कर दिया है और अब एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में उसे रखना नाइंसाफी है। पाकिस्तान की सरकार लगातार अपनी जनता को 27वीं शर्त को लेकर गुमराह करती आ रही थी और अभी भी कर रही है। पहली नजर में देखने पर लगता भी है कि सिर्फ एक प्वाइंट के लिए पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में क्यों रखा गया है, लेकिन जब 27वीं शर्त को ध्यान से देंखेंगे तो पाएंगे कि इस शर्त को पूरी तरह से लागू करना पाकिस्तान के लिए असंभव है। आईये जानते हैं कि आखिर 27वें शर्त में ऐसा क्या है जिसे पाकिस्तान पूरा नहीं कर सकता है।

बुरी तरह हिल गया है पाकिस्तान

बुरी तरह हिल गया है पाकिस्तान

एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में बने रहने के फैसले के बाद से पाकिस्तान इन दिनों बुरी तरह हिल गया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एफएटीएफ पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दें कि 25 जून को पेरिस में हुई एफएटीएफ की पांच दिवसीय बैठक के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बनाए रखने का फैसला किया गया था। एफएटीएफ ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में साफ कर दिया था कि जब तक पाकिस्तान द्वारा संस्था द्वारा बताए गए किसी भी बिंदु पर काम करना बाकी है, उसे ग्रे लिस्ट में रखा जाएगा।

भारत पर अनर्गल आरोप

भारत पर अनर्गल आरोप

25 जून को आए इस फैसले के बाद पाकिस्तान की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। भारत की ओर इशारा करते हुए कुरैशी ने कहा है कि यह देखने की जरूरत है कि क्या इस प्लेटफॉर्म का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। रेडियो पाकिस्तान से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ देश पाकिस्तान को एफएटीएफ के जरिए फांसी पर लटकाए रखना चाहते हैं, वे उस पर लगातार तलवार चलाना चाहते हैं. कुरैशी ने कहा कि यह देखा जाना चाहिए कि एफएटीएफ तकनीकी मंच है या राजनीतिक। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के पालन-पोषण को रोकना उसके हित में है। पाकिस्तान को अपने हित के लिए जो कुछ करना चाहिए, वह किया जा रहा है। जबकि, 25 जून को एफएटीएफ के अध्यक्ष डॉ. मार्कस प्लेयर ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि पाकिस्तान को तब तक ग्रे लिस्ट से बाहर नहीं किया जा सकता, जब तक कि एक भी पॉइंट छूट न जाए।

2018 से ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान

2018 से ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान

आपको बता दें कि पाकिस्तान को साल 2018 से संस्था की ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया है। वर्चुअल मीटिंग के दौरान एफएटीएफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने एफएटीएफ द्वारा बताए गए 27 में से 26 बिंदुओं पर काम किया है। साथ ही एफएटीएफ प्रेसिडेंट ने यह भी कहा कि यूएन प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है। आपको बता दें कि एफएटीएफ के फैसले से पहले शाह महमूद कुरैशी ने कहा था कि पाकिस्तान ने 27 में से 26 अंक पूरे कर लिए हैं। इसलिए अब इसे ग्रे लिस्ट में रखने की कोई वजह नहीं है। इसके बाद उन्होंने भारत पर सीधा हमला करते हुए कहा कि भारत इस प्लेटफॉर्म का राजनीतिकरण करना चाहता है, जो उसे करने नहीं दिया जाएगा।

क्या है एफएटीएफ की 27वीं शर्त

क्या है एफएटीएफ की 27वीं शर्त

एफएटीएफ की 27वीं शर्त में पाकिस्तान को यह कहा गया है कि पाकिस्तान में जितने भी यूएन द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सभी संगठनों को पूरी तरह से बैन किया जाए और यूएन द्वारा ठहराए गये सभी आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान कार्रवाई करते हुए उनके खिलाफ कोर्ट में ना सिर्फ मुकदमा चलाए, बल्कि उन्हें गुनहगार साबित कराते हुए उन्हें कड़ी सजा दी जाए। करीब 100 ऐसे पाकिस्तानी आतंकी हैं, जिन्हें यूएन ने अपनी लिस्ट में शामिल किया हुआ है, जिसमें हाफिज सईद और मशूद अजहर जैसे आतंकी भी हैं, जिनके खिलाफ कार्रवाई करना पाकिस्तान के लिए काफी मुश्किल है। हाफिज सईद को पाकिस्तान ने भले ही जेल में रखा है, लेकिन वो जेल सिर्फ कहने के लिए है।

क्यों फंस चुका है पाकिस्तान ?

क्यों फंस चुका है पाकिस्तान ?

पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और ब्रसेल्स में रहते हुए एफएटीएफ की कार्रवाई पर गहरी नजर रखने वाले पाकिस्तान के पत्रकार खालिद हमीद फारूखी ने कहा कि 'आप कोई भी इल्जाम किसी पर लगा दें, भारत पर साजिश करने के आरोप लगा दें, लेकिन ये सिर्फ पाकिस्तान को गुमराह करने वाली बात हो रही है। हकीकत ये है कि पाकिस्तान में आतंकियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और पाकिस्तान के नेता एफएटीएफ की मीटिंग शुरू होने से एक हफ्ते पहले एफएटीएफ को अपनी लिस्ट भेज देते हैं और उससे ज्यादा कुछ नहीं किया जाता है।' पाकिस्तानी पत्रकार ने कहा कि 'असलियत ये है कि हमने आतंकियों को पाला है, उन्हें अभी भी दाना-पानी दे रहे हैं और हम चाहते हैं कि हमें कोई कुछ नहीं कहें। ऐसा नहीं होता है, आपको दुनिया देख रही है और आप तब तक एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रहेंगे, जब तक आप तमाम आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं और आपके अंदर हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं है।'

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