मरने से पहले अवलाकी दे गया था फ्रांस में दहशत फैलाने का राज
पेरिस। पेरिस में शुक्रवार को जो कुछ भी हुआ उस पर काबू करने के लिए फ्रांस एंटी-टेरर यूनिट को कई घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी। गुरुवार को पहले चार्ली हैब्दो के आफिसर पर आतंकी हमला और फिर शुक्रवार को दो अलग-अलग जगहों पर आतंकी कार्रवाई हुई। थोड़ी ही देर के बाद अल कायदा की ओर से बयान जारी कर दिया गया कि वह इस हमले की जिम्मेदारी लेते हैं। इसके साथ ही साफ हो गया कि अमेरिका पर हुए 9 /11 से लेकर पेरिस के चार्ली हैब्दो तक जो कुछ भी लोगों ने देखा उससे साफ हो गया कि अल कायदा का खतरनाक आतंकी अनवार-अल-अवलाकी की मौत के बाद भी उसका प्रभाव कायम है।

अवलाकी ने गाइड किया काउची ब्रदर्स को
यमन में अल कायदा का काम संभालने वाला और इसका साइबर आतंकी अवलाकी मरने से पहले पेरिस के हमलावरों को पेरिस को दहलाने का राज बता गया था। एक विदेशी एजेंसी का दावा है कि पेरिस के हमलावर अवलाकी की मौत से कुछ माह पहले अवलाकी से मिले थे।
एक इंटेलीजेंस रिपोर्ट की मानें तो हमलावरों ने यमन जाकर अवलाकी से मुलाकात की थी। इसका साफ सुबूत है चार्ली हेब्दो के बाद हमलावरों का चिल्लाकर भागना, 'वी आर अल कायदा।'
एक इंजीनियर से बना चरमपंथी
- अवलाकी का जन्म अमेरिका में हुआ था।
- अवलाकी के पिता यमन सरकार में मंत्री थे।
- अवलाकी को धर्म में कोई रुचि नहीं थी लेकिन सिर्फ एक प्रार्थना सभा ने उसे बदलकर रख दिया था।
- अवलाकी को अपनी साधारण सी नौकरी से कोई मतलब नहीं था।
- उसने नौकरी से अलग धार्मिक साहित्य को पढ़ने में रूचि दिखाई।
- जल्द ही वह आतंक की दुनिया का एक प्रभावशाली वक्ता बन गया।
- लश्कर ने मु्ंबई हमलों से पहले हमलावरों को अवलाकी के लिखे हुए साहित्यों को पढ़ने के लिए कहा था।
- बताया जाता है कि इन साहित्यों को पढ़ने के बाद ही हमलावरों का दिमाग पूरी तरह से बदल गया।
- कुछ ऐसा ही पेरिस हमले के जिम्मेदारी काउची भाईयों के साथ भी हुआ।
- इन दोनों ने यमन जाकर अवलाकी से मुलाकात की थी।
- 18 माह की जेल के दौरान शेरिफ काउची ने अवलाकी के लिए हुए साहित्य को काफी पढ़ा था।
शुरुआत में अवलाकी था कमजोर
- जब अवलाकी ने बतौर धार्मिक वक्ता अपना काम शुरू किया तो वह काफी नर्वस रहता था।
- ओसामा बिन लादेन उसका रोल मॉडल था और लादेन ने उसे आत्मविश्वास के साथ बोलने के लिए प्रेरणा दी थी।
- इसके बाद से अवलाकी दुनिया के सबसे प्रभावशाली वक्ताओं के तौर पर उभरा।
- वह अपने ज्यादातर भाषणों में आतंकियों को निर्देश देता रहता था।
- कई युवाओं को चरमपंथी ताकतों की ओर आकर्षित करने के लिए अक्सर अवलाकी की बातों को बताया जाता है।
कंप्यूटर के बारे में नहीं जानता था कुछ
- दुनिया भर की एजेंसियों को आज भी अवलाकी के ऑन लाइन मौजूद भाषणों से काफी डर लगा रहता है।
- अवलाकी ने कई वर्षों पहले ही सार्वजनिक सभाओं में आना बंद कर दिया था।
- उसके भाषण इंटरनेट पर मौजूद हैं और काफी वायरल हैं।
- वह कंप्यूटर और इंटरनेट का प्रयोग ठीक से करना नहीं जानता था।
- इसके बाद भी वह दुनिया का सबसे खतरनाक साइबर आतंकी है।
- बिना कंप्यूटर को छुए ही वह दुनियाभर के आतंकियों को प्रभावित कर सकता है।
मुंबई हमलों से पहले लश्कर ए तैयबा ने कसाब और नौ हमलावरों ने ली अवलाकी से प्रेरणा। (CLICK ON NEXT)
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