9/11: क्या पाकिस्तान ने तालिबान को एटम बम भी दे दिया है ?

वॉशिंगटन, 11 सितंबर। 9/11 की बरसी पर अमेरिक में मातम है और दूसरी तरफ तालिबान अफगानिस्तान में सरकार बनाने का जश्न मना रहा है।

20th anniversary of the 9 11 wtc attacks Has Pakistan also given atom bombs to Taliban?

क्या ऐसा कर के तालिबान अमेरिका को चिढ़ा रहा है ? तालिबान बार-बार अमेरिकी को आंखें दिखा रहा है ? ऐसा क्यों ? क्या उसकी शक्ति इतनी बढ़ गयी है कि वह अमेरिका को चुनौती दे सकता है ? क्या तालिबान को पाकिस्तान के जरिये एटम बम तो हाथ नहीं लग गया है ?

क्या पाकिस्तान तालिबान को परमाणु बम भी दे सकता है ?

क्या पाकिस्तान तालिबान को परमाणु बम भी दे सकता है ?

तालिबान की पाकिस्तानी सेना और आइएसआइ में गहरी पैठ है। दूसरी तरफ पाकिस्तान तालिबान को ढाल बना कर मुस्लिम देशों का सरताज बनना चाहता है। आतंकादियों की नजर बहुत पहले से पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर है। पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों के पास कई आतंकी हमले हो चुके हैं। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मिनहास एयरबेस को परमाणु हथियारों का बड़ा ठिकाना माना जाता है। 2012 में यहां आतंकी हमला हुआ था। कराची के नेवल एयर बेस पर तैनात युद्धपोत 'मेहरान' पर भी आतंकी गुटों ने हमला किया था। यहां से 15 किलोमीटर दूर ही पाकिस्तान के परमाणु हथियरों का जखीरा है। दुनिया की एक सबसे चिंता यह रही है अगर पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकी संगठनों के हाथ लग गये तो क्या होगा ? अगस्त के शुरू में जब तालिबान एक-एक कर अफगानिस्तान के प्रांतों को जीत रहा था तब अमेरिका के कई सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडन को एक पत्र लिखा था। उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार के पास ऐसी कोई नीति है ताकि तालिबान को परमाणु हथियार पाने से रोका जा सके ? पाकिस्तान के कट्टरपंथी, एटम बम का जेहाद के लिए भी इस्तेमाल करना चाहते हैं। पिछले साल जब फ्रांस में कार्टून विवाद हुआ था तब पाकिस्तान के मौलाना खादिम हुसैन ने एक प्रदर्शन में कहा था, फ्रांस तुम्हें चैलेंज कर रहा और तुमने एटम बम किसलिए रखे हैं ? वार करो। एटम बम से जिहाद करो।

क्या अमेरिका पाकिस्तान के एटम बमों को छीन सकता है ?

क्या अमेरिका पाकिस्तान के एटम बमों को छीन सकता है ?

क्या अमेरिका के पास ऐसी कोई तकनीक या स्ट्रेट्जी है कि वह पाकिस्तान के परमाणु बम को छीन सके या उसे बेअसर कर सके ? डोनाल्ड ट्रंप जब अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे थे तब एक सवाल के जवाब में कहा था, अगर पाकिस्तान किसी वजह से राजनीतिक अराजकता का शिकार हो जाये तो अमेरिका को चाहिए कि उसके परमाणु हथियार छीन ले। तब उसके बाद ये चर्चा होने लगी कि क्या अमेरिका पाकिस्तान के परामाणु हथियार छीन सकता है ? क्या ऐसा करना मुमकिन है ? इसी दौरान अमेरिकी मडिया में ये खबर आयी थी कि 2009 से ही अमेरिका में एक एक सेक्रेट मिशन चल रहा है जिसका नाम है- स्नैच एंड ग्रैब। इसके लिए एक स्पेशल कमांडो दस्ते को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये दस्ता किसी देश के कई परमाणु ठिकानों पर एक साथ स्ट्राइक कर एटम बमों के ऑपरेटिंग सिस्टम को फ्रीज कर नाकाम कर सकता है या फिर उसके ट्रिगर को लॉक कर सकता है। हालांकि अमेरिका ने आधिकारिक रूप से कभी इन बातों को माना नहीं। अमेरिका की मिलिट्री एकेडमी (वेस्टप्वांट मिलिट्री एकेडमी) ने 2009 में कहा था कि अलकायदा और तालिबान ने कम से कम तीन बार पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था।

क्या लादेन के पास था न्यूक्लियर सूटकेस ?

क्या लादेन के पास था न्यूक्लियर सूटकेस ?

मास्को से छपने वाले रूसी अखबार 'कॉमसोमोलस्काया प्रावदा' ने अक्टूबर 1999 में एक इंटरव्यू के जरिये सनसनीखेज खुलासा किया था। आतंकी मामलों के स्वतंत्र विश्लेषक योसेफ बोल्डान्सकी ने इस इंटरव्यू में दावा किया था, ओसामा बिन लादेन ने कजाकिस्तान से एक न्यूक्लियर सूटकेस खरीदने के लिए सम्पर्क साधा था। न्यूक्लियर सूटकेस दरअसल एक छोटा परमाणु बम होता है। परमाणु बम को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह एक सूटकेस में समा जाए। ऊपर से देखने पर यह एक सामान्य सूटकेस लगता है लेकिन अंदर महाविनाशकारी बम छिपा रहता है। चूंकि सूटकेस को लाना- लेजाना बहुत आसान है इसलिए इसे पोर्टेबल एटम बम कहा जाता है। न विमान की जरूरत न मिसाइल की जरूरत और हो गया हमला। कजाकिस्तान पहले सोवियत संघ का एक गणराज्य था। 1986 में सोवियत संघ के पास करीब 40 हजार परमाणु हथियार थे। इनमें कई न्यूक्लियर सूटकेस थे। इतनी अधिक संख्या होने का कारण सोवियत संघ ने कई गणराज्यों में परमाणु बेस बना रखे थे।

कजाकिस्तान में थे 250 न्यूक्लियर सूटकेस

कजाकिस्तान में थे 250 न्यूक्लियर सूटकेस

मध्य एशिया के कजाकिस्तान को उसने बड़ा परमाणु ठिकाना बनाया था। लेकिन जब 1991 में सोवियत संघ विखंडित हो गया तो कजाकिस्तान एक स्वतंत्र देश बन गया। तब कजाकिस्तान को सारे परमाणु हथियार रूस को देने पड़े। उस समय ये आरोप लगा था कि कजाकिस्तान से परमाणु हथियारों के स्थानांतरण के समय कई न्यूक्लियर सूटकेस गायब कर दिये गये थे। रूसी सुरक्षा परिषद के पूर्व सचिव एलेक्जेंडर लेबेद ने 1997 में एक इंटरव्यू में बताया था कि कजाकिस्तान में 250 न्यूक्लियर सूटकेस थे जिसमें एक सौ गायब कर दिये गये थे। हालांकि रूस और कजाकिस्तान दोनों ने इस बात का खंडन किया था। न्यूक्लीयर सूटकेस को कैरी करना चूंकि आसान था इसलिए आतंकवादी इसको हासिल करने की फिराक में लग गये थे। एनासिल्ट योसेफ बोल्डान्सकी ने दावा किया था कि लादेन ने 30 मिलियन डॉलर नकद और दो टन अफगान हेरोइन दे कर ये न्यूक्लियर सूटकेस हासिल किये थे। कहा जाता है कि लादेन के पास न्यूक्लियर सूटकेस को ऑपरेट करने वाला तकनीकी विशेषज्ञ नहीं था इसलिए वह इसका इस्तेमाल नहीं कर पाया। ओसामा भले इस मामले में चूक गया हो लेकिन क्या तालिबान ये मौका चूकेगा ? तालिबान ने तो अमेरिकी पैसों से ही टेररिज्म की ट्रेनिंग ली है। अब उसकी सैन्य ताकत पूरी दुनिया ने देख ली है। ऐसे में अगर तालिबान ने 'जेहादी एटम बम' हासिल कर लिया तो अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का हुलिया ही बदल जाएगा। तब अमेरिका को वियतनाम से भी ज्यादा दुर्गति झेलनी पड़ेगी।

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