‘200 घंटे चर्चा, चीन-रूस से लंबी बात’, आखिर कैसे सारे देश दिल्ली डिक्लेरेशन पर हुए 100 फीसदी सहमत?
भारत की राजधानी नई दिल्ली में चल रहे G20 समिट के पहले ही दिन भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। बैठक के पहले दिन सभी सदस्य देशों ने नई दिल्ली जी-20 डिक्लेरेशन को मंजूरी दे दी है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के चलते बीते साल के इंडोनेशिया 𝐆𝟐𝟎 शिखर सम्मेलन में संयुक्त घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी थी। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में हो रहे दिल्ली शिखर बैठक में आम सहमति बनना सराहनीय और उत्साहजनक माना जा रहा है।

नई दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया, "यूक्रेन में युद्ध के संबंध में बाली में हुई चर्चा को दोहराते हुए हमने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्तावों पर अपने राष्ट्रीय रुख को दोहराया और इस बात पर जोर दिया कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करना चाहिए।"
"संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक, सभी देशों को किसी भी अन्य देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरूद्ध क्षेत्रीय अधिग्रहण की धमकी या बल के उपयोग से बचना चाहिए। परमाणु हथियारों का उपयोग या उपयोग की धमकी अस्वीकार्य है।"
दिल्ली घोषणापत्र को लेकर G20 के शेरपा अमिताभ कांत ने बताया कि नई दिल्ली घोषणापत्र पर सदस्य देशों से 200 घंटे तक चर्चा हुई। इसके लिए रूस और चीन के साथ अलग से काफी लंबी बातचीत चली थी, जिसके बाद शुक्रवार रात को अंतिम मसौदे पर सहमति बन पाई।
बाली पैराग्राफ टूट गया था और हम नौ महीने से संघर्ष कर रहे थे। फिर, एक बैठक में, मैंने एक सादा स्क्रीन लिया और 15 बुनियादी सिद्धांतों को लिखा जिनका हमें पालन करने की आवश्यकता थी। फिर सभी शेरपा इसमें शामिल हुए और अपना दृष्टिकोण दिया।
अमिताभ कांत ने कहा कि यूक्रेन पर आम सहमति बनी जिसमें जी20 सभी देशों से "क्षेत्रीय अधिग्रहण के लिए बल प्रयोग से बचने" का आग्रह करता है, लेकिन वास्तव में इसमें रूस का नाम नहीं है - लगभग 200 घंटे की लगातार बातचीत का परिणाम था और कल रात ही इस पर सहमति बनी है।
मीडिया से बातचीत में अमिताभ कांत ने कहा, "G20 के इतिहास में भारत की अध्यक्षता सबसे महत्वाकांक्षी रही है। 112 परिणामों और अध्यक्षीय दस्तावेजों के साथ हमने पिछले अध्यक्षों से तीन गुना से अधिक महत्वपूर्ण काम किए हैं।"
अमिताभ कांत ने कहा कि घोषणापत्र में यूक्रेन मुद्दे पर सहमति बनाने को लेकर बचा जा रहा था। लेकिन इस नई दिल्ली घोषणपत्र में सभी सदस्यों देशों की 100 फीसदी सहमति है।
इससे पहले यूक्रेन संघर्ष को लेकर आम सहमति नहीं बन पाने के चलते भारत ने शुक्रवार को भू-राजनीति के पैराग्राफ को खाली छोड़ दिया था ताकि इसे लेकर कोई विवाद ना हो।












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