विश्व प्रसिद्ध पशुपथिनाथ मंदिर से 11 किलो सोना गायब! जांच अधिकारियों ने किया वजन, कितना सोना पाया गया कम?
नेपाल की राजधानी काठमांडू के सबसे पुराने हिंदू मंदिर पशुपतिनाथ मंदिर से 11 किलो सोना गायब होने का दावा किया जा रहा था। इसके बाद नेपाल के शीर्ष भ्रष्टाचार निरोधक निकाय ने इसकी जांच शुरू कर की।
रविवार को पशुपथिनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा गया था। शाम 6 बजे जांच एजेंसी की टीम अंदर गई और रात 2 बजे तक हर पहलू को खंगाला।

एंटी करप्शन यूनिट ने इसके बाद कहा कि उन्हें मंदिर के गर्भगृह में स्थापित जलहरी को वजह में कोई अंतर नहीं दिखा है।
भ्रष्टाचार निरोधक निकाय, जो सोने की जलहारी की स्थापना में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रहा है, ने रविवार को इसे मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर इसका वजन किया।
द काठमांडू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक एंटी करप्शन यूनिट के सूत्रों ने बताया है कि जलहरी का वजन 107.46 किलोग्राम मापा गया, जो बताए गए वजन 107.92 किलोग्राम के करीब है।
पहले मामला समझिए
यह मामला 2 साल पुराना है। तब देश में केपी शर्मा ओली की सरकार थी। तब मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग के नीचे सोने का आधार यानी कि जलहरी बनाया गया था।
जलहरी वह नींव है जिस पर शिवलिंग स्थापित किया जाता है। यह शिवलिंग पर चढ़ाए गए पानी और दूध जैसे तरल प्रसाद को एकत्र करता है और निकाल देता है। पहले ये चांदी का बना होता था।
जनवरी 2021 में नेपाल के पीएम के पी शर्मा ओली ने पशुपतिनाथ मंदिर में मौजूद शिवलिंग पर सोने की जलहरी लगाने के लिए 30 करोड़ रुपए स्वीकृत किया। संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय की ओर से ये पैसा कुछ ही दिनों में मंदिर को सेंक्शन कर दिया गया जिसके बाद सोने की जलहरी बनाने का काम शुरू हो गया
सोने की जलहरी शिवलिंग पर चढ़ाई जाती, इससे पहले ही नरोत्तम बैध्य और वकील निकिता ढुंगाना ने इतनी मात्रा में सोना मंदिर में चढ़ाए जाने के खिलाफ नेपाल की सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दिया।
मामला कानूनी होता देख 24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही नेपाल की पूर्व राष्ट्रपति बिध्या देवी भंडारी ने आनफानन में अधूरी बनी जलहरी को ही शिवलिंग पर अर्पण कर दिया। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसी दिन जलहरी की लगाए जाने पर रोक लगा दी।
इसके बाद से ही अचानक ऐसा दावा किया जाने लगा कि जलहरी से 11 किलो का सोना गायब हो गया है।
ट्रस्ट के पूर्व सदस्य सचिव गोविंदा टंडन ने कहा, "स्वर्ण जलहारी की स्थापना ने विवाद को जन्म दिया क्योंकि ट्रस्ट के अधिकारियों ने इसे जल्दबाजी में और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना स्थापित किया।" "इसके अलावा, जलाहारी लगभग आधा किलो हल्की थी। सोना आमतौर पर तब तक खराब नहीं होता जब तक उसे अन्य धातुओं के साथ न मिलाया जाए।"
ट्रस्ट के पूर्व कोषाध्यक्ष नरोत्तम बैद्य ने कहा कि सीआईएए के माप से पता चला है कि जलहरी का वजन ट्रस्ट के दावे से कम पाया गया। उन्होंने कहा, "ट्रस्ट के सदस्य सचिव ने संसद में दावा किया था कि अगर जलहरी के वजन में कोई गड़बड़ी पाई गई तो वह मौत की सजा का सामना करने के लिए भी तैयार हैं।"
दरअसल 14 जून को ट्रस्ट के सदस्य सचिव मिलन कुमार थापा ने कहा था कि अगर स्वर्ण जलहरी स्थापित करने की प्रक्रिया में कोई गबन हुआ तो वह मौत की सजा का सामना करने के लिए तैयार हैं। थापा ने कहा कि उचित जांच के बिना आरोप लगाना शर्मनाक है।
हालांकि प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर से सोना गायब होने का मामला मामला संसद में भी उठाया गया। इस मुद्दे पर बहस के दौरान एक सांसद ने कहा कि यह घटना शर्मनाक है। इससे देश की बदनामी हो रही है। इसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए।
सोमवार को संसद में इस मामले पर बहस हुई। नेपाली कांग्रेस के सांसद प्रदीप पौडेल ने कहा- इस मामले की जांच पार्लियामेंट्री कमेटी को करनी चाहिए। जांच के नाम पर लीपापोती नहीं होनी चाहिए। इस मामले की वजह से देश की बदनामी हो रही है। करप्शन को किसी भी तौर पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।












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