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अजेय प्रांत को कब्जाने चला तालिबान, पंजशीर की ओर बढ़े 100 से ज्यादा तालिबानी, हो सकती है भीषण जंग

काबुल, 23 अगस्त। अफगानिस्ता में अब तालिबान जल्द ही नई सरकार के गठन का ऐलान करने वाला है। तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद से वहां के हालात बेहद खराब है, कई लोग देश छोड़ने के लिए अपनी जान दांव पर लगा रहे हैं। इस बीच अब तालिबान उस प्रांत पर कब्जे के लिए आगे बढ़ रहा है जहां वह 1980 से लेकर अब तक अपनी हुकूमत का झंडा नहीं गाड़ सका है। तालिबान को खौफ है कि अजेय दुर्ग माना जाने वाला पंजशीर प्रांत आने वाले समय में उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

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    तालिबान के लिए सिर का दर्द पंजशीर

    तालिबान के लिए सिर का दर्द पंजशीर

    गौरतलब है कि नॉर्दन अलायंस के पूर्व कमांडर अहमद शाह मसूद का गढ़ पंजशीर घाटी पर तालिबान आज भी अपना कब्जा नहीं जमा सका है। इस बीच यहां से तालिबान के खिलाफ फिर से मोर्चा खोलने की तैयारी हो रही है। अहमद शाह मसूद के 32 वर्षीय बेटे अहमद शाह ने पंजशीर से तालिबान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। बता दें कि अफगानिस्तान में कुल 34 प्रांत है जिनमें से 33 पर अब तालिबान का कब्जा है। पंजशीर ही अब तक तालिबान के कब्जे से आजाद है।

    100 से ज्यादा पंजशीर की ओर रवाना

    100 से ज्यादा पंजशीर की ओर रवाना

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक तालिबान ने अब पंजशीर में भी दस्तक दे दी है। 100 से ज्यादा तालिबानियों को पंजशीर की ओर रवाना कर दिया गया है। वहीं, अहमद शाह ने भी ऐलान कर दिया है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले इलाकों को किसी भी कीमत पर तालिबान को नहीं सौपेंगे। रविवार को स्थानीय मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अहमद ने कहा कि वह युद्ध नहीं करेंगे लेकिन किसी भी तरह का आक्रमण हुआ तो विरोध जरूर करेंगे।

    वार्ता रही असफल तो युद्ध निश्चित

    वार्ता रही असफल तो युद्ध निश्चित

    अहमद शाह ने आगे कहा, अगर तालिबान के साथ बातजीत असफल रहती है तो युद्ध निश्चित है। तालिबान को अफगानिस्तान पर शासन करने के लिए एक व्यापक सरकार की जरूरत है, अगर उसने बातचीत से इनकार किया तो युद्ध अनिवार्य होगा। तालिबान के खिलाफ आवाज उठाने वाले सरकारी बल अलग-अलग इलाकों से पंजशीर में इकट्ठा हो रहे हैं, इस लड़ाई में हमें पश्चिमी देशों से भी समर्थन की जरूरत है। पंजशीर घाटी के लोग बहुत एकजुट हैं और वे अपने जमीन का बचाव करना चाहते हैं।

    'हमारे ध्वज और बैनर की लड़ाई'

    'हमारे ध्वज और बैनर की लड़ाई'

    उन्होंने कहा, मैं पंजशीर में हूं और यहां लोग तालिबानी ताकतों के खिलाफ, अधिनायकवादी शासन के खिलाफ और किसी भी विश्वास के खिलाफ पूरे दम-खम से लड़ना चाहते हैं। पंजशीर अफगानिस्तान के भूगोल का सबसे छोटा प्रांत है, लेकिन अभी हम जहां खड़े हैं वह पूरे देश के लिए लोग अवाज बुलंद किए खड़े हैं। ये लोग पंजशीर में संप्रभुता, शांति, समावेशी, सहिष्णुता, स्वीकृति और संयम के लिए लोग एकजुट हुए हैं। यह हमारे ध्वज और बैनर की लड़ाई है ।

    पंजशीर में 10 हजार से ज्यादा फौजी

    पंजशीर में 10 हजार से ज्यादा फौजी

    इस बीच निर्वासित अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार में रक्षा मंत्री, जनरल बिस्मिल्लाह मोहम्मदी ने खुलकर तालिबान के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है। रविवार को उन्होंने कहा कि वह पंजशीर की सुरक्षा करते रहेंगे, घाटी में जंग जारी रहेगी। इतना ही नहीं पंजशीर में एकत्र हुई सेना भी तालिबान से टक्टर लेने के लिए तैयार है। बताया जा रहा है कि यहां 10 हजार से ज्यादा की संख्या में फौजी तैयार हैं, ऐसे में तालिबान के लिए यह जंग इतनी आसान नहीं रहने वाली।

    यह भी पढ़ें: अफगानिस्तान: काबुल पर कब्जे के बाद सरकार गठन की तैयारी में तालिबान, जल्द करेगा ऐलान

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