खजराना में SI सुरेश बुनकर की महिलाओं ने क्यों की पिटाई, जानिए पूरा मामला, बिजली के खंभे से बांधने की कोशिश
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक सनसनीखेज घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। खजराना थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सुरेश बुनकर को एक शादीशुदा महिला के घर में आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने के बाद स्थानीय लोगों और महिलाओं ने उनकी जमकर पिटाई कर दी। भीड़ ने डंडों और चप्पलों से हमला किया, उनके कपड़े फाड़े, और उन्हें बिजली के खंभे से बांधने की कोशिश की।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने पुलिस की जवाबदेही और आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद एसआई सुरेश बुनकर को निलंबित कर दिया गया, और पिटाई करने वाले चार नामजद सहित अन्य लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है। यह घटना न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि सामाजिक और नैतिक मर्यादाओं पर भी बहस छेड़ रही है।

घटना का विवरण: क्या हुआ खजराना में?
घटना गुरुवार, 24 जुलाई 2025 को सुबह करीब 6 बजे खजराना थाना क्षेत्र के खेड़ी इलाके में हुई। जानकारी के अनुसार, एसआई सुरेश बुनकर एक शादीशुदा महिला के घर में मौजूद थे, जिसका अपने पति से वैवाहिक विवाद चल रहा था। स्थानीय लोगों और महिला के परिजनों ने बताया कि सुरेश पिछले दो महीनों से इस महिला के संपर्क में थे और नियमित रूप से उसके घर आया-जाया करते थे। गुरुवार सुबह, जब महिला के परिजनों और पड़ोसियों ने सुरेश को उनके घर में आपत्तिजनक हालत में देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरेश नशे में थे और गालियां दे रहे थे, जिसने भीड़ को और भड़का दिया। गुस्साए लोगों, खासकर महिलाओं ने, सुरेश पर डंडों और चप्पलों से हमला कर दिया। कुछ लोगों ने उनके कपड़े फाड़े और उन्हें बिजली के खंभे से बांधने की कोशिश की। भीड़ ने उनकी शर्ट उतार दी, और स्थिति तब तक बिगड़ती रही जब तक खजराना पुलिस और पलासिया कंट्रोल रूम से अतिरिक्त फोर्स मौके पर नहीं पहुंची। पुलिस ने भारी विरोध के बीच सुरेश को भीड़ से छुड़ाया और थाने ले गई।
पुलिस की कार्रवाई
घटना के बाद खजराना थाना प्रभारी (टीआई) मनोज सेंधव ने बताया कि एसआई सुरेश बुनकर के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है। उन्हें सेवा नियमों के उल्लंघन और अनुचित आचरण के लिए निलंबित कर दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) अमरेंद्र सिंह ने कहा, "वायरल वीडियो में एसआई सुरेश बुनकर का आचरण एक पुलिस अधिकारी के लिए अनुचित और सेवा नियमों का उल्लंघन करने वाला है। उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा रही है।"
दूसरी ओर, भीड़ द्वारा पिटाई के मामले में पुलिस ने चार नामजद व्यक्तियों-जिनमें महिला के परिजन और पड़ोसी शामिल हैं-और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है। कुछ महिलाओं को हिरासत में लिया गया है, और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू की गई है।
सुरेश बुनकर का विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब एसआई सुरेश बुनकर विवादों में घिरे हैं। 2023 में, लसूड़िया थाना क्षेत्र में उनकी कुछ युवकों के साथ नशे में झड़प हो गई थी, जिसमें उन्हें चोटें आई थीं। उस घटना के बाद पुलिस ने आरोपियों को सार्वजनिक रूप से परेड किया था, जिसने भी विवाद खड़ा किया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरेश का व्यवहार और कार्यशैली पहले भी सवालों के घेरे में रही है, और यह घटना उनकी छवि को और धूमिल करती है।
यह घटना कई गंभीर सवाल उठाती है:
पुलिस की जवाबदेही: एक पुलिस अधिकारी का शादीशुदा महिला के घर में आपत्तिजनक हालत में पकड़ा जाना और नशे में गालियां देना पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। क्या पुलिसकर्मी, जो जनता की सुरक्षा के लिए तैनात हैं, स्वयं नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं?
भीड़ की हिंसा: हालांकि सुरेश का आचरण अनुचित था, लेकिन भीड़ द्वारा उनकी सार्वजनिक पिटाई और बिजली के खंभे से बांधने की कोशिश क्या उचित थी? यह घटना कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।
महिलाओं की भूमिका: इस घटना में महिलाओं का नेतृत्व करना सामाजिक बदलाव का संकेत हो सकता है, लेकिन हिंसा का सहारा लेना क्या सही रास्ता है?
स्थानीय निवासी रीता शर्मा ने कहा, "पुलिसवाले को ऐसी हरकतें नहीं करनी चाहिए। लेकिन भीड़ का इस तरह हिंसा करना भी गलत है। दोनों पक्षों पर कार्रवाई होनी चाहिए।" एक अन्य निवासी, मोहन सोलंकी, ने कहा, "अगर पुलिसवाला ही गलत करेगा, तो लोग गुस्सा तो करेंगे। लेकिन कानून को अपने हाथ में लेना ठीक नहीं।"
मध्य प्रदेश में पुलिसकर्मियों के विवाद
मध्य प्रदेश में हाल के वर्षों में पुलिसकर्मियों के अनुचित आचरण की कई घटनाएं सामने आई हैं:
जुलाई 2025, मुरैना: सबलगढ़ में SDM अरविंद माहौर ने जनसुनवाई के दौरान एक फरियादी को "थप्पड़ मारने" की धमकी दी, जिसका वीडियो वायरल हुआ। (उपरोक्त लेख)
नवंबर 2024, सबलगढ़: तत्कालीन SDM वीरेंद्र कटारे का एक पंचायत सदस्य के साथ धक्का-मुक्की का वीडियो वायरल हुआ था। (उपरोक्त लेख)
जून 2023, इंदौर: खजराना में एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें पुलिस ने छह महिलाओं और दो पुरुषों को गिरफ्तार किया था।
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि मध्य प्रदेश में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का आचरण बार-बार सवालों के घेरे में आ रहा है।
पुलिस प्रशासन के सामने चुनौतियां
आंतरिक अनुशासन: पुलिसकर्मियों के आचरण को नियंत्रित करने के लिए सख्त दिशानिर्देश और प्रशिक्षण की जरूरत है।
सार्वजनिक विश्वास: इस तरह की घटनाएं पुलिस के प्रति जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं। पुलिस को अपनी छवि सुधारने के लिए पारदर्शी कार्रवाई करनी होगी।
भीड़ हिंसा पर नियंत्रण: भीड़ द्वारा कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए पुलिस को त्वरित और प्रभावी कदम उठाने होंगे।












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