Success story: 30 लाख का पैकेज छोड़ उद्योग लगाया, प्लास्टिक का विकल्प ढूंढ कर दिखाया कमाल

खरगोन शहर से लगे गोपालपुरा के एक युवा ने पर्यावरण बचाने की दिशा में अपना छोटा मगर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां के युवा ने 30 लाख के पैकेज वाली नौकरी को छोड़ अपना उद्योग शुरू किया.

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      मध्यप्रदेश सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं के चलते अब युवाओं को भी सहारा मिलता नजर आ रहा है। यही कारण है कि, युवाओं को लगातार स्टार्टअप के लिए सरकार की ओर से सहारा मिलता नजर आ रहा है। हाल ही में खरगोन जिले के युवा ने कमाल कर दिखाया है।मप्र शासन की युवा उद्यमी योजना के सहारे खरगोन शहर से लगे गोपालपुरा के एक युवा ने पर्यावरण बचाने की दिशा में अपना छोटा मगर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां के युवा ने 30 लाख के पैकेज वाली नौकरी को छोड़ अपना उद्योग शुरू किया, जिसके बाद वह लगातार सक्सेस होता चला जा रहा है।

      कुछ ऐसी है सफलता की कहानी

      कुछ ऐसी है सफलता की कहानी

      वर्ष 2017 में बॉम्बे में 30 लाख रुपये का सालाना पैकेज ठुकराकर अपना व्यवसाय शुरू करने की रिस्क न सिर्फ स्वयं के लिए बल्कि समाज के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। गोपालपुरा के इलेक्ट्रिकल इंट्रुमेंटशन इंजीनियर देवेंद्र ठाकोर वर्ष 2015-16 में सऊदी अरब से आकर पूना में जॉब कर रहे थे। फिर बॉम्बे में निजी कंपनी में करीब 30 लाख रुपये के पैकेज पर भेजा गया। लेकिन देवेंद्र ने अपने शहर में अपना व्यावसाय स्थापित करने का मन बना रहे थे। इसी बीच शासन ने मप्र युवा उद्यमी योजना प्रारम्भ की। इसी योजना के बदौलत देवेंद्र की योजना धरातल पर स्थापित हो पायी। जिला उद्योग एवं व्यापार विभाग की योजना में देवेंद्र को आईडीबीआई बैंक से 18.33 लाख का लोन स्वीकृत हुआ। इसमें 4 लाख 7 हजार का अनुदान दिया गया।

      शासन की योजना से सहयोग मिला

      शासन की योजना से सहयोग मिला

      पर्यावरण को लेकर जिस समय बड़ा जोर-शोर और प्लस्टिक पॉलीथिन बेन के नारे उठने लगे थे। उस समय देवेंद्र ने स्थानीय स्तर समाज को प्लास्टिक पॉलीथिन का विकल्प देने की योजना बनाई। वे सऊदी अरब में भी काम कर चुके है तो इसकी रिस्क भी जानते थे। लेकिन शासन की योजना से उन्हें बड़ा सहयोग मिला। वर्ष 2017 में प्रारम्भ किये अपने उद्योग से अब तक 80 लाख शॉपिंग बैग और 2019 से प्रारम्भ किये स्ट्रैचिंग कपड़े के झोले करीब 4 लाख बना चुके है। यानी लगभग 84 लाख पॉलीथिन को उन्होंने बाजार में उपयोग से बाहर करने में अपना योगदान दिया है। इस बात की खुशी उनके लिए ज्यादा मायने रख रही है। आज देवेंद्र अपने कारखाने में 4 अन्य युवाओं को भी 7 से 9 हजार के मासिक वेतन पर रोजगार दे रहे है। इनके कारखाने में बने शॉपिंग बैग आसपास के जिलों खंडवा, बड़वानी के अलावा बड़नगर इटारसी और महाराष्ट्र तक जा रहे है।

      बनाई जा रही ये वस्तुएं

      बनाई जा रही ये वस्तुएं

      स्थानीय स्तर पर उनके प्रिंटेड स्ट्रैचिंग झोले, सर्फ, कपड़े, जूते-चप्पल और अगरबत्ती जैसी कई सामग्री केरी करने में उपयोग की जा रही है। जब कारखाना प्रारम्भ हुआ था तो सिर्फ कपड़े के बैग प्रारम्भ किये थे। लेकिन अब वे स्ट्रेचिंग झोले भी बनाने लगे है और अपने स्वयं के व्यवसाय को ऊंचाई दे रहे हैं। मप्र में इन दिनों विकास यात्रा निकल रही है। शासन द्वारा सहयोग पाकर परिवार और समाज के लिए विकास का पुंज बने है।

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