मेरी बेटी होती तो उसे भी राजनीति में लाता और समझाता ये समाज सेवा का माध्यम है: पूर्व CM कमलनाथ

Indore kamal nath News: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने आज का दिन मालवा के लिए समर्पित कर दिया है। पीसीसी चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने सावन के अधिक मास में रविवार की द्वादशी और त्रयोदशी के योग पर भगवान शिव का अभिषेक किया। शिव की भक्ति के बाद दोनों ही नेताओं ने महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव की अहमियत पर महिलाओं से संवाद किया।

इंदौर में प्रदेश कांग्रेस के दोनों नेता आज शिव और महिला शक्ति की भक्ति में सुबह से ही रत दिखाई दिए। इंदौर-1 से कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला सावन के अधिक मास में रूद्रविषेक करा रहे हैं। इस आयोजन में शामिल होने के लिए पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह भी पहुंचे। पिछले 10 दिनों से चल रहे इस रूद्रविषेक में इंदौर की हजारों लोग हर दिन भगवान भोलेनाथ का अभिषेक कर रहे हैं। इस आयोजन में कमलनाथ और सिंह ने भी दूध अभिषेक किया।

Kamal Nath, Digvijay Singh and Kanhaiya Kumar participated in the program of Indore Mahila Congress

देवास सवाल पर बोले कमलनाथ

पूर्व सीएम कमलनाथ और दिग्विजय सिंह महिला कांग्रेस के आयोजन में पहुंचे जहां पर उनके साथ कन्हैया कुमार भी थे तीनों ही नेताओं से महिलाओं ने विभाग सवाल किए एक महिला ने कमलनाथ से पूछा कि यदि आपकी बेटी होती तो उसे आप राजनीति में लाते? जिस पर कमलनाथ ने कहा कि मेरी बेटी नहीं है यदि होती और उसका रुझान राजनीति में होता तो, उसे जरूर लाता। कई लोग अपने राजनीतिक जीवन में चुनाव नहीं लड़ पाते, लेकिन वे चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। मैं उसे यह भी बताता कि राजनीतिक सिर्फ चुनाव के लिए नहीं होती, बल्कि राजनीति समाज सेवा का माध्यम है। इसलिए इस माध्यम से समाज सेवा का भाव भी रहे।

महिलाओं को वोट बैंक में हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है?

एक अन्य महिला ने सवाल किया कि इस समाज में महिलाओं के नाम से गलियां होती है पुरुषों के नाम से नहीं होती राजनीति में महिलाओं के नाम से योजनाएं बनाई जाती है ताकि उनके वोट मिल सके क्या महिलाएं हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रही हैं? इस पर कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश में 4 महीने दूर चुनाव है महिलाएं नंगे पैर ना चले में उन्हें चप्पल दूंगा, यह बातें हो रही है। क्या हमारे मतदाता बिकाऊ है ? आज आप मणिपुर को समझे या नहीं समझे, लेकिन यह समझना होगा कि यह झगड़ा किस लिए है। आदिवासी और गैर आदिवासी के बीच यह विवाद हो रहा है। हमारी संस्कृति जोड़ने की है आज बांटने का प्रयास किया जाता है। यह खतरे की बात है। इसकी शुरुआत मणिपुर से हुई है। मुझे घबराहट है कि मणिपुर कहां-कहां तक फैल सकता है। यह सोच की बात है।

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