Tantya Mama : टंट्या भील के नाम पर होगा इंदौर का बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन, अंग्रेज क्यों खाते थे इनसे खौफ
इंदौर, 22 नवंबर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 53 करोड़ की लागत से बन रहे बस स्टेशन पातालपानी रेलवे स्टेशन नाम टंट्या मामा के नाम रखा जाएगा। इस संबंध में मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी है।

4 दिसम्बर को टंट्या भील का बलिदान दिवस
मध्य प्रदेश में चार दिसम्बर को टंट्या मामा उर्फ टंट्या भील का बलिदान दिवस मनाया जाएगा। ये वो जनजातीय नेता हैं, जो कभी अंग्रेजों के सामने नहीं झुके। अंग्रेज इनके नाम से कांपते थे। देश की रक्षा के लिए टंट्या मामा ने कुर्बानी दी। मानपुर के प्राथमिक स्कूल का नाम टंट्या भील नाम पर रखा गया है। अब बस स्टैण्ड और रेलवे स्टेशन भी इन्हीं के नाम पर होंगे।

कांग्रेस ने जनजातीय नायकों का सम्मान नहीं किया-सीएम
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने जनजातीय नायकों का सम्मान नहीं किया। विद्यार्थियों को गलत इतिहास पढ़ाया। भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या मामा, शंकर शाह, रघुनाथ शाह, रानी लक्ष्मीबाई जैसे नायकों के अनदेखा किया गया। हम इनके गौरव और योगदान को सम्मान देंगे।

टंट्या मामा का वास्तविक नाम क्या है?
बता दें कि अंग्रेजों के पसीने ला देने वाले टंट्या का रियल नाम तांतिया भील था। अंग्रेजों को तांतिया भील के नाम का सही उच्चारण नहीं आता था। इसलिए उन्होंने टंट्या कर दिया। फिर ये इसी नाम से पहचाने जाने लगे।

आदिवासियों के देवता की तरह हैं तांतिया भील
उल्लेखनीय हैं कि मध्य प्रदेश में तांतिया भील उर्फ टंट्या भील आदिवासी समाज से बड़े जननायक है। इस बात का अंदाजा आज भी एमपी के कई आदिवासी घरों में टंट्या भील की देवता की तरह पूजा की जाती है।

टंट्या भील को क्यों कहते हैं मामा?
4 दिसम्बर 1889 को तांतिया भील वीरगति को प्राप्त हुए। इन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। इसके बाद इंदौर के पास खंडवा रेलमार्ग पातालपानी (कालापानी) रेले स्टेशन के पास टंट्या भील का शव फेंक दिया गया था। स्थानीय लोग टंट्या भील को मामा कहते हैं। रेलवे स्टेशन के पास इनकी समाधि हो बनी हुई।

टंट्या भील का जन्म कहाँ हुआ?
टंट्या मामा स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे के समाकालीन हैं। तात्या ने ही उन्हें गुरिल्ला युद्ध सिखाया था। टंट्या मामा का जन्म तत्कालीन सीपी प्रांत के पूर्व निमाड़ व वर्तमान में मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील के गांव बडदा में सन 1842 को माऊ सिंग के घर हुआ था।












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