Independence Day: आजादी मिली लेकिन अरमान अधूरे, इंदौर के युवाओं ने कही बड़ी बात
Independence Day: देशभर में आजादी का महापर्व यानि स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय पर्व पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है, जहां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं इस दिन के कई खास मायने भी हैं।
आजादी के 77 साल पूरे हो चुके हैं, जहां आजादी के इन 77 सालों में क्या कुछ बदलाव देश के युवाओं ने देखे और देश के युवा आखिर आजादी को लेकर क्या सोचते हैं?, ये जानने और समझने के लिए वन इंडिया हिंदी की टीम युवाओं के बीच पहुंची, जहां युवाओं ने अपनी बात वन इंडिया हिंदी के साथ साझा की है।

युवा बालकृष्ण मास्कोले ने बताया कि, आदिवासी महापुरुषों का क्रांति में अमूल्य योगदान रहा है। हमें बताया गया है 1857 में आजादी मिली, लेकिन उससे पहले ही आजादी के लिए संघर्ष शुरू हो चुका था। पवन अहिरवार बताते हैं कि, भारत में देखने मिलता है कि, हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन क्या वास्तव में हम आजाद हैं, क्योंकि आज भी हम देखते हैं कि बलात्कार की घटनाएं दिन प्रतिदिन हो रही हैं। आंकड़े बढ़ रहे हैं। क्या इसी को हम आजादी कहते हैं?, हम देखते हैं SC -ST ओबीसी पर दिन-प्रतिदिन अत्याचार बढ़ रहे हैं, क्या किसी को हम आजादी कहते हैं?

संजय सोलंकी बताते हैं कि, भारत में लोगों ने जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए लंबी-लंबी लड़ाइयां लड़ी है। अभी हम पन्ना में देख रहे हैं, ट्रिपल मर्डर हुए हैं, बहुत सारे अत्याचार लगातार हो रहे हैं, जो आजादी जैसी जिंदगी नहीं जीने दे रहे। मान सिंह चौहान बताते हैं कि, लोगों को उनके मूल अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। सरकार आवाज दबाना चाहती है। करण बताते हैं कि, हमारा मानना है कि, अभी सही तरीके से आजाद नहीं हुए हैं। लगातार, अत्याचार बढ़ रहे हैं, युवा बेरोजगार घूम रहे हैं।
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