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सावधान! Zika ने जमाया पुणे में कदम, गर्भवती समेत 6 संक्रमित, ये गलतियां पड़ेंगी भारी, जानें कैसे करें बचाव?

Zika Virus Case 2024: महाराष्ट्र के शहर पुणे में जुलाई की चिपचिपी गर्मी के साथ जीका वायरस संक्रमण का प्रकोप भी छाया हुआ है। ताजा खबर के अनुसार, पुणे में जीका वायरस संक्रमण के छह मामले सामने आए हैं। मरीजों में दो गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया क‍ि एरंडवाने इलाके की 28 वर्षीय गर्भवती महिला में जीका वायरस संक्रमण पाया गया। 28 जून को गर्भवती की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं, एक अन्‍य 12 सप्ताह की गर्भवती भी संक्रमित पाई गई है। दोनों महिलाओं की हालत पहले से बेहतर है और उनमें कोई लक्षण नहीं हैं।

Zika Virus Case 2024

डॉक्टर समेत ये भी संक्रमित
अधिकारी ने बताया क‍ि जीका वायरस संक्रमण 46 वर्षीय डॉक्टर में भी पाया गया है। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसके बाद उनकी 15 वर्षीय बेटी के नमूने भी पॉजिटिव पाए गए। अन्य दो मामले मुंधवा से हैं, जिसमें 47 वर्षीय महिला और 22 वर्षीय पुरुष की रिपोर्ट पॉजिटिव है।

क्‍या बोले जिम्मेदार?
अधिकारी ने बताया क‍ि पुणे नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग निगरानी कर रहा है। एहतियात के तौर पर, मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए फॉगिंग और फ्यूमिगेशन जैसे उपाय किए जा रहे हैं।

आइए जानते हैं कैसे घातक है जीका?

गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम

  • जन्मजात विकृतियां: गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस संक्रमण से गर्भस्थ शिशु में गंभीर जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं, जैसे माइक्रोसेफली, जिसमें शिशु का सिर और मस्तिष्क असामान्य रूप से छोटे होते हैं। इससे शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा आ सकती है।
  • गर्भपात और मृत जन्म: संक्रमण से गर्भपात या मृत जन्म का जोखिम भी बढ़ सकता है।

न्यूरोलॉजिकल समस्याएं

  • गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS): जीका वायरस संक्रमण कुछ मामलों में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) का कारण बन सकता है, जो एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार है। इसमें व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली उसके स्वयं के तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है, जिससे मांसपेशियों की कमजोरी और कभी-कभी पैरालिसिस (paralysis) हो सकता है। यह स्थिति अस्थायी होती है, लेकिन कुछ मामलों में जानलेवा हो सकती है।
  • मस्तिष्क की सूजन: जीका वायरस संक्रमण कभी-कभी मस्तिष्क की सूजन (encephalitis) या मेनिन्जाइटिस का कारण बन सकता है, जो जानलेवा हो सकता है।

क्‍या होते हैं संक्रमण के लक्षण?

  • बुखार
  • त्वचा पर लाल चकत्ते
  • सिरदर्द
  • जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
  • आंखों में लाली (कंजक्टिवाइटिस)

कैसे करें बचाव?

  • मच्छरों के काटने से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें।
  • कीटनाशक युक्त मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें।
  • पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
  • खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं।
  • पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छर न पनप सकें।

क्‍या है जीका ? दुनिया और भारत में पहला केस कब म‍िला?
जीका वायरस संक्रमण एक वायरस जनित रोग है, जो मच्छरों के काटने से फैलता है। खासकर एडीज मच्छरों के काटने से। यह दिन में सक्रिय रहते हैं। यह वायरस पहली बार 1947 में युगांडा के जीका जंगल में बंदरों में पहचाना गया था। इंसानों में इसका पहला केस 1952 में युगांडा और तंजानिया में पाया गया। वहीं, भारत में जीका वायरस का पहला मामला 2017 में गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर में सामने आया था। इसके बाद कुछ और राज्यों में भी मामले दर्ज किए गए हैं।

जीका का पसंदीदा सीजन 'मानसून' ही क्‍यों ?

  • जुलाई माह में मच्छरों की तादाद अन्य महीनों के मुकाबले बढ़ती है। इसका मुख्य कारण मानसून के दौरान बारिश का बढ़ना है, जो मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है।
  • बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। यह पानी मच्छरों के अंडे देने और लार्वा के विकास के लिए आदर्श स्थान बना देता है।
  • जुलाई में आर्द्रता का स्तर उच्च होता है, जो मच्छरों के जीवन चक्र को समर्थन देता है। आर्द्रता और उच्च तापमान मच्छरों के तेजी से बढ़ने में मदद करते हैं।

मानसून मच्छरों के ल‍िए 'च्यवनप्राश'!

  • विकास दर: मच्छरों की विकास दर मानसून के महीनों में 50% से अधिक बढ़ सकती है।
  • मच्छरों की संख्या: मानसून के दौरान मच्छरों की संख्या में 2 से 3 गुना तक की वृद्धि हो सकती है, विशेष रूप से जुलाई और अगस्त में।

जुलाई महीना बीमारियों का अड्डा!
जुलाई के महीने में मच्छरों की संख्या में वृद्धि के कारण डेंगू, मलेरिया, और जीका वायरस जैसी बीमारियों के प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विभागों के आंकड़ों के अनुसार, इन बीमारियों के मामले मानसून के दौरान चरम पर होते हैं।

आंकड़ों में समझें

  • डेंगू के मामले: नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP) के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई-सितंबर के महीनों में डेंगू के मामले सबसे अधिक होते हैं। उदाहरण के लिए, 2021 में, भारत में कुल डेंगू मामलों का 60% इन्हीं महीनों में दर्ज किया गया था।
  • मलेरिया के मामले: इसी तरह, मलेरिया के मामलों में भी मानसून के दौरान वृद्धि होती है। 2021 में जुलाई-सितंबर में मलेरिया के मामलों की संख्या साल के अन्य महीनों की तुलना में लगभग 40% अधिक थी।

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