दफ्तरों को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइन, एक-दो केस मिलने पर ऑफिस को बंद करने की जरूत नहीं
नई दिल्ली। देश में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा एक लाख से पार हो गया है। इसी बीच कल से देश में लॉकडाउन का चौथा चरण भी शुरू हो गया जो 31 मई तक चलेगा। जिसके तहत सरकार ने लोगों को कई तरह की सहूलियतें दी हैं। इस बीच दफ्तरों और वर्कप्लेस के लिए केंद्र सरकार की ओर से ताजा गाइडलाइन जारी की गई हैं। इसके साथ-साथ केंद्र सरकार ने राज्यों को रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन खुद निर्धारित करने की भी छूट दी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी की गई गाइडलाइन
- किसी दफ्तर में कोविड-19 के एक या दो मामले सामने आने पर पूरी इमारत को बंद करने की जरूरत नहीं है। मरीज 48 घंटे में जहां-जहां गया होगा, उन जगहों को डिसइन्फेक्ट किया जाएगा।
- दिशानिदेर्शों के तहत कायार्लय को संक्रमणमुक्त कर लेने के बाद काम को फिर से बहाल किया जा सकता है।
- अगर बड़े स्तर पर मामले सामने आने पर दफ्तर की समूची इमारत को 48 घंटे के लिए बंद किया जाएगा।
- इमारत को संक्रमण मुक्त बनाए जाने और फिर से इसे काम बहाली के लिए उपयुक्त घोषित किए जाने तक सभी कर्मचारी घर से ही काम करेंगे।

ऑफिस में इन बातों का रखना होगा ख्याल
- दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रखना जरूरी होगा।
- वार्किंग ऑवर के दौरान कर्मचारियों को फेस कवर या मास्क लगाना अनिवार्य होगा।
- थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद कर्मचारियों को साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित करना होगा।
- कम से कम 20 सेकंड तक अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर्स का इस्तेमाल करना होगा।
- खांसते-छींकने वक्त एटीकेट्स का ध्यान रखना होगा।
- सभी को अपनी सेहत की खुद निगरानी करनी होगी,सेहत में जरा भी गड़बड़ दिखने पर संस्थान को सूचित करना होगा।
- दफ्तर जाते वक्त सावधानी बरतें, सार्वजनिक जगहों पर चीजों को छूने से बचें।

मदद के लिए 1075 हेल्पलाइन पर करें संपर्क
- अगर स्टाफ के किसी भी व्यक्ति को फ्लू जैसे लक्षण हैं तो उसे दफ्तर न बुलाएं और स्थानीय प्रशासन से सलाह लें।
- अगर कोई स्टाफ कंटेनमेंट जोन में रह रहा है और होम क्वारंटाइन रहना चाहता है तो संस्थान को उसे इसकी इजाजत देनी होगी।
- अगर एक ही दफ्तर में काम करने वाले किसी व्यक्ति में कोरोना जैसे लक्षण नजर आते हैं तो उसे वर्क प्लेस पर किसी एक कमरे में दूसरों से आइसोलेट कर दें और तुरंत डॉक्टर को जांच के लिए बुलाएं। तुरंत इसकी सूचना 1075 हेल्पलाइन पर दें।












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