RSS के संगठनों में महिलाओं को दी जाएगी 50 फीसदी जिम्मेदारी

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पर अक्सर महिला विरोधी होने का आरोप लगता रहा है और संघ में महिलाओं की सीधी एंट्री नहीं है। लेकिन संघ में जुड़े संगठनों में आधी आबादी को नेतृत्व की जिम्मेदारी देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में विस्तृत चर्चा के बाद ये तय हुआ है कि फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन के नेतृत्व में 50 फीसदी भागीदारी महिलाओं को दी जाए।

women to get responsibilities in rss decision making body

आरएसएस की सबसे बड़ी डिसिजन मेंकिंग बॉडी में महिलाओं को ज्यादा नेतृत्वकारी जिम्मेदारी देने की दिशा में काम शुरू हो चुका है। वीएचपी, किसान संघ सहित कई संगठनों ने भी इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत भी कह चुके हैं कि महिलाएं बराबरी की हकदार हैं और उनके साथ उसी तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए।

दरअसल, हाल ही में मोहन भागवत ने बताया था कि संघ में महिलाएं क्यों नहीं है। उन्होंने हेडगेवार के बयान का हवाला देते हुए कहा कि संघ में ऐसा वातावरण नहीं है कि महिलाएं पुरुषों के साथ काम करें। तब इसी तरह का एक संगठन अस्तित्व में आया और महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिति बनाई गई। अब महिलाएं भी सेविका के तौर पर काम कर रही हैं और पुरुष राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के जरिए। उन्होंने कहा था कि इसमें व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए।

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