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सबसे बड़ी पार्टी को सत्‍ता से दूर बीजेपी ने ऐसे बनाई थी इन राज्‍यों में सरकार

By योगेंद्र कुमार
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    बेंगलुरु। कर्नाटक चुनाव में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। बीजेपी बहुमत से महज कुछ सीटें कम रह गई है। कांग्रेस तो अपने दम पर सरकार बनाने से काफी पीछे रह गई, लेकिन बीजेपी को सत्‍ता से दूर रखने के लिए उसने तीसरे नंबर की पार्टी जेडी-एस को सीएम पद के ऑफर के साथ खुले समर्थन का भी ऐलान कर दिया। दूसरी ओर बेंगलुरु से खबर आ रही है कि कांग्रेस और जेडी-एस में टूट हो सकती है। खबरें हैं कि जेडी-एस को समर्थन देना कांग्रेस के कई लिंगायत विधायकों को रास नहीं आ रहा है। वे कभी भी पलटी मार सकते हैं। टूट जेडी-एस में भी हो सकती है। कांग्रेस तो इतनी डर गई है कि अपने विधायकों को किसी रिजॉर्ट में ले जाने की भी सोच रही है। कुल मिलाकर कर्नाटक में सत्‍ता के लिए हर तरह का नाटक हो रहा है। स्थिति कमोबेश वैसी ही है, जैसी गोवा, मणिपुर, मेघालय में हुई थी। इन सभी राज्‍यों में सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का मौका ही नहीं मिला। कर्नाटक में भी जिस प्रकार से सीटें आई हैं, ऐसे हालात में कांग्रेस के दांव की काट निकाल पाना बीजेपी के लिए बड़ा मुश्किल है।

     बिना दूसरे दलों में टूट हुए बीजेपी को बहुमत मिलना मुश्किल

    बिना दूसरे दलों में टूट हुए बीजेपी को बहुमत मिलना मुश्किल

    कर्नाटक में 222 सीटों में से बीजेपी को 104 सीटें मिलती दिख रही हैं। इस तरह से उसे सरकार बनाने के लिए कम से कम 8 सीटों की जरूरत और होगी। कांग्रेस 78 तो जेडीएस 38 सीटों पर आगे है। ये साथ आ गए हैं और आसानी से बहुमत का आंकड़ा छू सकते हैं। ऐसे में चर्चा यह हो रही है कि राज्‍यपाल को किसे पहले सरकार बनाने का न्‍योता देना चाहिए। उस सबसे बड़ी पार्टी को जिसके लिए बहुमत जुटाना तब तक संभव नहीं है, जब तक अन्‍य पार्टियों में टूट न हो या उस तीसरे नंबर की जेडी-एस को, जिसके पास 78 सीटों वाली कांग्रेस पार्टी का खुला समर्थन है। जेडी-एस और कांग्रेस की सीटें मिलाकर बहुमत काा आंकड़ा पूरा हो जाता है।

     गोवा, मणिपुर और मेघालय जैसे कर्नाटक के हालात, क्‍या इस बार बीजेपी पर भारी पड़ेगा उसी का फार्मूला

    गोवा, मणिपुर और मेघालय जैसे कर्नाटक के हालात, क्‍या इस बार बीजेपी पर भारी पड़ेगा उसी का फार्मूला

    कर्नाटक में हालात कमोबेश वैसे ही हैं, जैसे मणिपुर, गोवा और मेघालय में थे। इन राज्‍यों में भी सबसे बड़े दल के पास बहुमत नहीं था। ऐसे में राज्‍यपाल ने उन दलों को बुलाया जो मिलकर बहुमत के आंकड़े तक पहुंच जाते हैं। तो क्‍या कर्नाटक में भी राज्‍यपाल वजुभाई वाला ऐसा ही करेंगे?

     गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होकर भी रही सत्‍ता दूर

    गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी होकर भी रही सत्‍ता दूर

    40 विधानसभा सीटों वाले गोवा की बात करें तो यहां बहुमत के लिए 21 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए था। कांग्रेस 17 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि बीजेपी को 13 सीटों जीत मिली थी। भाजपा ने एमजीपी और अन्य दलों के साथ राज्य में सरकार बना ली।

     मणिपुर में भी कांग्रेस सबसे ज्‍यादा सीटें जीतकर नहीं बना सकी सरकार

    मणिपुर में भी कांग्रेस सबसे ज्‍यादा सीटें जीतकर नहीं बना सकी सरकार

    60 सीटों वाले मणिपुर में भी बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए थीं। कांग्रेस ने 28 और बीजेपी ने 21 सीटें जीतीं थीं, लेकिन बीजेपी ने एनपीपी समेत अन्य दलों के साथ गठजोड़ कर सरकार बना ली थी।

     मेघालय में 2 सीटें जीतकर भी बीजेपी ने कांग्रेस को किया सत्‍ता से दूर

    मेघालय में 2 सीटें जीतकर भी बीजेपी ने कांग्रेस को किया सत्‍ता से दूर

    बीजेपी ने इसी प्रकार से मेघालय में भी कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था। यहां 20 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ा दल बनी, जबकि बीजेपी ने केवल 2 सीटें जीतीं, लेकिन छोटे दलों ने गठबंधन कर सबसे पार्टी को ही सत्‍ता से बाहर कर दिया।

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    English summary
    Will Karnataka Governor Follow Goa, Manipur, Meghalaya Precedence And Invite Combine with the Numbers?

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