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karnataka: क्या इस बार अपने पारिवारिक 'दुर्भाग्य' से निपट पाएगा देवगौड़ा परिवार?

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नई दिल्ली- कर्नाटक में जेडीएस सुप्रीमो एचडी देवगौड़ा के परिवार के साथ एक 'दुर्भाग्यपूर्ण' संयोग जुड़ा हुआ है कि उनकी सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पातीं। ऐसे कम से कम तीन मौके आए हैं, जब सत्ता परिवार के सदस्यों के हाथों में आई है, लेकिन वे उसे कुछ महीनों तक ही उसे संभालकर रख पाए। एचडी कुमारस्वामी के सामने एक बार फिर से वही पारिवारिक 'दुर्भाग्य' आ खड़ा हुआ और यही सवाल है कि क्या अबकी बार वे अपने परिवार के मिथक को तोड़ पाएंगे?

देवगौड़ा पीएम बनेंगे, उन्होंने भी नहीं सोचा होगा

देवगौड़ा पीएम बनेंगे, उन्होंने भी नहीं सोचा होगा

1 जून,1996 को मुलायम, लालू और ज्योति बसु जैसे नेताओं को पटखनी देकर एचडी देवगौड़ा का प्रधानमंत्री बनना किसी दुर्लभ संयोग से कम नहीं था। उनसे पहले दक्षिण भारत के सिर्फ पीवी नरसिम्हा राव को ही ये मौका मिला था। अगर, उस समय की सियासी परिस्थितियों का विश्लेषण करें तो तब धुरंधर राजनीतिक चिंतकों ने भी नहीं सोचा था कि देवगौड़ा को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिलेगा। लेकिन, सियासी समीकरण ऐसे बने कि त्रिशंकु लोकसभा में देवगौड़ा की ताजपोशी हो गई। लेकिन, वह एक साल भी अपना कार्यकाल नहीं चला पाए और सिर्फ 11 महीने में ही उन्हें 7 रेसकोर्स रोड से चलता होना पड़ गया।

पिता की तरह कुमारस्वामी का भी हाल

पिता की तरह कुमारस्वामी का भी हाल

मई, 2018 में कर्नाटक विधानसभा में वैसी ही तस्वीर बनकर उभरी जिसमें बीजेपी 104 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन बहुमत से पीछे छूट गई। एचडी देवगाड़ा ने फिर से 1996 वाला ही दांव लगाया और जेडीएस के पास सिर्फ 37 विधायक होने के बावजूद 80 विधायकों वाली कांग्रेस को बेटे एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मजबूर कर दिया। अभी कुमारस्वामी सरकार के भी सिर्फ 14 महीने ही हुए हैं और वह सत्ता से बाहर होने की स्थिति में आ चुकी है। इससे पहले भी उन्हें महज 21 महीने के लिए ही कर्नाटक में मुख्यमंत्री रहने का मौका मिला था। वे फरवरी, 2006 से अक्टूबर, 2007 तक बीजेपी के समर्थन से प्रदेश के सीएम रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में यह देखने वाली बात है कि क्या अबकी बार वो अपने परिवार के इस मिथक को तोड़ पाएंगे?

देवगौड़ा परिवार की तीसरी पीढ़ी की भी एंट्री

देवगौड़ा परिवार की तीसरी पीढ़ी की भी एंट्री

देवगौड़ा खुद को किसान का बेटा बताते हैं और राजनीति में अपनी एंट्री को एक दुर्घटना मानते हैं। लेकिन, हकीकत ये है कि आज उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में अपना पूरा जोर लगा रही है। उनके पोते और ऐक्टर निखिल ने इस बार मांड्या लोकसभा सीट से अपना किस्मत आजमाया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसलिए परिवार वालों ने अब उसे जेडीएस के यूथ विंग का चीफ बना दिया है। इस परिवार के अब तक की सियासत को देखने से लगता है इसने खुद को बेंगलुरु ग्रामीण, मैसुरु, मांड्या, हासन और टुमाकुरु के वोक्कालिगा के प्रभाव से बाहर के लोगों का दिल जीतने का कभी गंभीर प्रयास ही नहीं किया। चाहे खुद देवगौड़ा हों या उनके बेटे कुमारस्वामी, इनकी नजर सिर्फ सत्ता पर टिकी रही है। शायद यही वजह है कि त्रिशंकु विधानसभा या लोकसभा होने की स्थिति में ये पहले बॉल पर सियासत का सिक्सर तो लगा लेते हैं, लेकिन बाकी के ओवरों को पूरा करते-करते इनके पसीन छूट जाते हैं।

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English summary
Will devegowda family be able to deal with this family 'misfortune' this time?
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