लोकसभा की 4 सीटों पर उपचुनाव होंगे या 2024 के आम चुनाव तक करना होगा इंतजार?

देश में अभी लोकसभा की 4 सीटें खाली हैं। जबकि, आम चुनावों में अब एक साल से भी कम रह गया है। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने यह सवाल हो सकता है कि इन चारों सीटों पर पहले उपचुनाव करवा लिए जाएं या फिर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों तक इंतजार किया जाए।

इस समय देश के अलग-अलग राज्यों में लोकसभा की 4 सीटों पर कोई सांसद नहीं है। ये सीटें हैं- हरियाणा में अंबाला, महाराष्ट्र में पुणे और चंद्रपुर और उत्तर प्रदेश में गाजीपुर। ये चारों सीटें इसी साल मार्च से लेकर मई के बीच में अलग-अलग वजहों से खाली हुई हैं।

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मार्च से मई के बीच खाली हुई हैं 4 लोकसभा सीटें
अंबाला से बीजेपी सांसद रतन लाल कटारिया (18 मई, 2023), पुणे से बीजेपी के ही गिरीश बापट (29 मार्च, 2023) और चंद्रपुर से कांग्रेस सांसद बालुभाऊ नारायणराव धानोरकर (30 मई, 2023)के असामयिक निधन से उनकी सीटें खाली हुई हैं। जबकि, गाजीपुर सीट अदालत से बीएसपी सांसद अफजल अंसारी को अयोग्य (1 मई ,2023 ) ठहराए जाने की वजह से खाली हुई है।

क्या कहता है कानून ?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151ए के प्रावधानों के हिसाब से इन चारों खाली सीटों पर इसके रिक्त होने की तारीख से 6 महीने के भीतर या नवंबर, 2023 तक उपचुनाव हो जाने चाहिए। एक और प्रावधान है कि यदि सदस्य का कार्यकाल एक वर्ष या उससे अधिक बचा हुआ हो तो, जो कि अब नहीं है। इसकी वजह से दुविधा बढ़ गई है। मौजूदा यानी 17वीं लोकसभा का कार्यकाल 16 जून, 2024 तक है।

उपचुनाव के बाद 6 से 7 महीने ही बचेगा कार्यकाल
ऐसे में अगर चुनाव आयोग अब इन चारों सीटों पर उपचुनाव का फैसला करता है तो जो भी सांसद चुने जाएंगे, उनका कार्यकाल मुश्किल से 6 से 7 महीने ही बच जाएगा। इससे यह मामला भी उठेगा, जिस आधार पर केरल हाई कोर्ट ने लक्षद्वीप से एनसीपी सांसद मोहम्मद फजल की अयोग्यता पर स्थगन आदेश जारी किया था। वे निचली अदालत से हत्या की कोशिश के केस में दोषी ठहराए गए थे, लेकिन उनकी अयोग्यता को इसलिए हाई कोर्ट ने स्थगित रखा, क्योंकि इसकी वजह से उपचुनाव करवाने पड़ेंगे और देश को इसका खर्च उठाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है, लेकिन 6 हफ्ते के अंदर अगला फैसला आने तक उनकी संसद सदस्यता बरकरार रखी है।

आम चुनाव तक इंतजार करने की क्या होगी प्रक्रिया?
वैसे पहले से खाली पड़ी लोकसभा की चारों सीटों पर अगर उपचुनाव नहीं करवाए जाते हैं, तो इसके लिए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आपसी सलाह-मशवरे से इसका उचित कारण बताना होगा कि ऐसा क्यों मुमकिन नहीं हो सकता। जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग इस मुद्दे पर आपस में चर्चा कर रहा है और हो सकता है कि इस मसले पर कानून मंत्रालय के साथ भी बातचीत की जाए।

पहले बहुत कम समय के लिए भी हो चुके हैं उपचुनाव
लेकिन, अगर अतीत में झांककर देखें तो इस बात के भी उदाहरण हैं कि आम चुनावों से 6 महीने के अंदर भी संसदीय उपचुनाव करवाए गए हैं। 2018 के मई में कर्नाटक में लोकसभा की तीन सीटें खाली हो गई थीं और उसी साल वहां उपचुनाव करवाए गए थे। जबकि, 16वीं लोकसभा का कार्यकाल 3 जून, 2019 को खत्म हो रहा था।

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