क्या मुफ्ती के साथ काम कर पाएगी भाजपा?
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) जम्मू-कश्मीर में कुख्यात आतंकी को रिहा करने के बाद अब सवाल पूछा जा रहा है कि क्या राज्य सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी ? क्या भाजपा मुफ्ती के साथ काम कर पाएगी?
उधर, देशभर में आतंकी की रिहाई के विरोध में हो रहे विरोध के बीच आज संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पूरी फार्म में दिखे। उन्होंने इस सारे मसले पर बेहद सधा हुआ और ओजस्वी भाषण दिया। इस बीच, अब जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के भविष्य पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। क्या राज्य सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी?
देश की अखंडता सर्वोपरि
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा कि उनकी सरकार को देश की एकता और अखंडता से समझौता मंजूर नहीं ।और मुफ्ती सरकार के फैसले पर संविधान की सीमाओं में कार्रवाई करेगी।
भाजपा का लेना-देना नहीं
बहरहाल,अब सवाल यह है कि जब भाजपा और पीडीपी की मिली जुली सरकार है तब कश्मीर सरकार ने अलगाववादी मसरत को रिहा किया है । अब भाजपा का दावा है इस फैसले में उसकी सहमति नहीं है। जम्मू-कश्मीर में लंबे इंतजार और घोर मंथन के बाद भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाई है फिर इतना जल्द टकराव वाला फैसला क्यों ?
यदि यह मान लिया जाए कि भाजपा यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि पीडीपी के साथ गठबंधन ज्यादा टिकाऊ नहीं होगा तो इस गठबंधन की क्या मजबूरी थी भाजपा के सामने ? बहरहाल,अलगाववादी नेता व कश्मीर हिंसा के मास्टरमाइंड मसरत आलम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में बयान देते हुए कहा कि विपक्ष उन्हें देशभक्ति न सिखाये विपक्ष। हमारे आदर्श डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दिये हुए हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश के लिये न्योछावर कर दिया।
मोदी ने कहा कि राज्य सरकार ने मसरत आलम को रिहा करने का फैसला किया, तब इसकी जानकारी केंद्र को नहीं थी। बात देश की सुरक्षा की है, तो हम उसके लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। ऐसी कोई हरकत स्वीकार नहीं की जायेगी, जिससे देश की एकता और अखंडता को ठेस पहुंचे। यह किसी दल का आक्रोश नहीं, बल्कि देश के लोगों का आक्रोश है। मैं देश के साथ अपना स्वर मिलाता हूं।
भाजपा से बढेंगी दूरियां
चूंकि मुफ्ती मोहम्मद कई और आतंकियों को रिहा करने के मूड में हैं, लिहाजा भाजपा के साथ उसकी दूरियां और बढ़ सकती हैं। ऐसे में अगर भाजपा पर ज्यादा दबाव पड़ा तो वह समर्थन वापस ले सकती है। जानकारों का कहना है कि अगर फिर से मुफ्ती मोहम्मद सईद ने किसी आतंकी को रिहा करने की हिमाकत की तो राज्य सरकार गिर सकती है।













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