LJP के टिकट से अपने बागी प्रत्याशियों को उतारकर JDU को तीसरे नंबर पर भेजेगी BJP?
नई दिल्ली- बिहार में टिकट से वंचित कद्दावर बीजेपी नेताओं का चिराग पासवान की एलजेपी में शामिल होने का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक बीजेपी के चार कद्दावर नेता एलजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने के मकसद से अपनी पार्टी से बगावत कर चुके हैं। उनकी शिकायत ये है कि वह जिस सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, वो सीट अब जेडीयू के खाते में जा चुकी है। हालांकि, बिहार में पार्टी के चुनाव प्रभारी और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसे बागी नेताओं को सख्त हिदायदत दे चुके हैं, लेकिन जिस तरह से उनकी चेतावनी भी खाली जा रही है, उससे सवाल उठ रहा है कि कहीं यह सब किसी रणनीति के तहत तो नहीं हो रहा है, जिसकी ओर चिराग पासवान खुलेआम इशारा भी कर रहे हैं।

कहीं तीसरे नंबर पर तो नहीं चली जाएगी जेडीयू?
मंलवार को बिहार बीजेपी के कद्दावर नेता और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने चिराग पासवान की पार्टी की सदस्यता ले ली। पिछले विधानसभा चुनाव में वो पार्टी की ओर से संभावित सीएम पद के उम्मीदवार थे। दूसरा नाम पूर्व विधायक उषा सिंह का आया, जिन्होंने बुधवार सुबह भगवा पार्टी से नाता तोड़कर पासवान की पार्टी का झंडा थाम लिया। शाम होते-होते दो और बड़े नाम रामेश्वर चौरसिया और इंदु कश्यप का आया और उन दोनों ने भी टिकट के लिए अपनी पार्टी से मुंह फेर लिया। सूत्रों की मानें तो बड़े नामों में यह संख्या 10 तक भी जा सकती है और यह तब हो रहा है जबकि बागियों को पार्टी नेतृत्व से सख्त पैगाम दिया जा चुका है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जेडीयू को मिली 122 सीटों पर अगर एलजेपी के सिंबल लेकर बीजेपी के चेहरे उतरे तो नीतीश कुमार की पार्टी भले ही सीटों के बंटवारे में बड़ा भाई बनी हो, नतीजों के बाद तीसरे नंबर पर तो नहीं खिसक जाएगी। चिराग पासवान तो बीजेपी की अगुवाई में एलजेपी के सहयोग से सरकार बनने के दावे भी कर रहे हैं।

अपने एजेंडे पर आगे बढ़ रहे हैं चिराग
इन अटकलबाजियों को इसलिए मौका मिल रहा है कि राजेंद्र सिंह भाजपा के कोई सामान्य नेता नहीं थे। वह पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के भी मर्यादित सिपाही रहे हैं। एलजेपी से वह रोहतास जिले के दिनारा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जहां से उनके मुकाबले में नीतीश कुमार के मंत्री जय कुमार सिंह जेडीयू के उम्मीदवार होंगे। 2015 में इसी सीट पर राजेंद्र कुमार सिंह उनसे सिर्फ 2,691 वोटों से हारे थे। जाहिर है कि मौजूदा समीकरण में अगर वहां भाजपा का उम्मीदवार नहीं होगा तो राजेंद्र सिंह की जीत के भी संभावना भी बन सकती हैं। चिराग पासवान नीतीश कुमार को कम सीटों पर समेटने के लिए इसी रणनीति पर काम कर रहे हैं। क्योंकि, वह चुनाव के बाद बीजेपी की अगुवाई में एलजेपी के सहयोग वाली सरकार चाहते हैं। उनका यह चुनावी एजेंडा भी है कि नीतीश कुमार को हटाना है।

क्या ये सब महज संयोग है ?
इसी तरह रामेश्वर चौरसिया का भी बीजेपी छोड़कर एलजेपी में जाना बीजेपी-जेडीयू के लिए बहुत बड़ा झटका है। वह सासाराम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ सकते हैं। इससे पहले चौरसिया नोखा से बीजेपी विधायक रह चुके हैं, लेकिन इस बार वह सीट जेडीयू के खाते में गई है। इनके अलावा बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की सदस्य इंदु कश्यप ने भी एलजेपी की सदस्यता ले ली है। उनकी भी किसी जेडीयू वाली सीट से ही चुनाव लड़ने की बात तय हो चुकी होगी। इससे पहले पटना की पालीगंज सीट से 2010 में विधायक रह चुकीं बीजेपी नेता डॉक्टर उषा विद्यार्थी भी एलजेपी में शामिल हो चुकी हैं। वो बिहार राज्य महिला आयोग की सदस्य भी हैं। माना जा रहा है कि एलजेपी से इनके लिए भी पालीगंज सीट पक्की है। अगर इतनी बड़ी तादाद में बीजेपी जैसी पार्टी से नेता निकल रहे हैं तो कुछ ना कुछ तो ऐसी बात रही है, जिसे या तो बीजेपी नेतृत्व समझ नहीं पाया या फिर उसे कुछ समझने की जरूरत नहीं है?

बिहार की 243 सीटों के लिए चुनाव करवाए जा रहे हैं। तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं- 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर। चुनाव परिणाम 10 नवंबर को आना है।












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