क्या पत्नी सुनीता को CM बनाना चाहते हैं केजरीवाल? आतिशी, गोपाल राय, सौरभ पर क्यों नहीं खेलेंगे दांव?

दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? ये सवाल अभी सुर्खियों में है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ऐलान किया है कि वो दो दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। केजरीवाल ने रविवार (15 सितंबर) को कहा है कि जब तक दिल्ली में चुनाव नहीं होगे तब तक कोई अन्य नेता दिल्ली का मुख्यमंत्री होगा। इसके लिए दो दिन में आम आदमी पार्टी के विधायक दल की बैठक होगी उसमें नए मुख्यमंत्री का नाम फाइनल किया जाएगा।

सीएम केजरीवाल के इस घोषणा के बाद अब हर कोई ये जानना चाहता है कि दिल्ली का अगला और नया मुख्यमंत्री कौन होगा? सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा है कि केजरीवाल दिल्ली का अगला मुख्यमंत्री किसी और को नहीं बल्कि अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को बना सकते हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है क्या केजरीवाल आप के दिग्गज नेताओं आतिशी, गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज , कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन पर दांव क्यों नहीं खेलेंगे?

Who Will Be Delhi Next CM

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दिल्ली CM की रेस में सुनीता केजरीवाल का नाम सबसे आगे क्यों है?

  • राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सीएम केजरीवाल अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को ही सीएम बनाना चाहेंगे। असल में सुनीता केजरीवाल अरविंद केजरीवाल के लिए सबसे सेफ ऑप्शन होंगी। जिस तरह से अरविंद केजरीवाल के जेल में जाने के बाद से सुनीता केजरीवाल सक्रिय राजनीति में आई और पार्टी को संभाला, उससे आप में उनका कद बढ़ा है। वो भले ही कभी चुनाव ना लड़ी हों लेकिन वह अपने पति केजरीवाल के राजनीतिक सफर में उनके साथ रही हैं।
  • सुनीता केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने की संभावना पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय रही है। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सुनीता पार्टी की प्रमुख हस्ती बन गईं। उन्होंने न सिर्फ चुनाव अभियान का नेतृत्व किया बल्कि विधायकों के साथ बैठकें करके उनके काम को निर्देशित भी किया। इससे उनके अगले मुख्यमंत्री बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
  • विशेषज्ञों का सुझाव है कि केजरीवाल अपना पद किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपना पसंद कर सकते हैं जिस पर उन्हें पूरा भरोसा हो। सुनीता इस मानदंड पर पूरी तरह खरी उतरती हैं। केजरीवाल की अनुपस्थिति के दौरान उनके नेतृत्व ने उनकी क्षमता को प्रदर्शित किया है।
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  • केजरीवाल की अनुपस्थिति में सुनीता का एक प्रमुख नेता के रूप में उभरना, अहम महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। चुनाव अभियान का प्रबंधन करने और विधायकों को निर्देशित करने की उनकी क्षमता उनके संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व गुणों को दिखाती है। सुनीता के सीएम बनने की अटकलें सिर्फ उनके हाल के कामों पर ही आधारित नहीं हैं, बल्कि पार्टी के भीतर रणनीतिक सोच पर भी आधारित हैं।
  • सियासी गलियारे में इस बात की भी चर्चा है कि अगर सुनीता केजरीवाल सीएम बनती हैं तो सीएम हाउस केजरीवाल को खाली नहीं करना पड़ेगा। अगर सुनीता की जगह किसी और को सीएम बनाया गया तो विपक्षी पार्टी सीएम हाउस खाली करने के लिए उनपर हावी हो सकते हैं। नियमों के मुताबिक बिना विधायक रहे भी कोई 6 महीने तक सीएम बन सकता है।
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'2 दिन का वक्त इसलिए मांगा है क्योंकि केजरीवाल पत्नी को CM बनाने के लिए विधायकों को मना रहे हैं'

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, "अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की है कि वह दो दिन बाद इस्तीफा दे देंगे और जनता का फैसला आने पर फिर से सीएम बन जाएंगे... यह कोई त्याग नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा है कि वह सीएम की कुर्सी के पास नहीं जा सकते और किसी भी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते। इसलिए, आपके पास कोई विकल्प नहीं है, आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण इस्तीफा देने के लिए मजबूर हैं। जनता ने 3 महीने पहले अपना फैसला सुनाया था जब आपने 'जेल या बेल' पूछा था, आप सभी 7 (दिल्ली की लोकसभा सीटें) हार गए और जेल भेज दिए गए। अब उन्होंने इस्तीफा देने के लिए दो दिन का समय मांगा है क्योंकि वह सभी विधायकों को अपनी पत्नी (सुनीता केजरीवाल) को सीएम बनाने के लिए मना रहे हैं। उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि वह शराब घोटाले में शामिल हैं।"

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा है कि ये अरविंद केजरीवाल का पीआर स्टंट है, उनको ये समझ आ चुका है कि दिल्ली की जनता के बीच उनकी छवि ईमानदार नेता की नहीं बल्कि भ्रष्टाचारी नेता की हो चुकी है।

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क्यों AAP के किसी अन्य नेताओं को CM बनाने का रिस्क नहीं लेंगे केजरीवाल?

अब सवाल उठता है कि अरविंद केजरीवाल आप के दिग्गज नेताओं आतिशी, गोपाल राय, सौरभ भारद्वाज , कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन को सीएम की कुर्सी पर क्यों नहीं बिठा सकते हैं। असल में इन नेताओं को सीएम बनाना केजरीवाल के लिए रिस्क हो सकता है। झारखंड सीएम हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सबक लेते हिए केजरीवाल अपने पार्टी के किसी चेहते चेहरें को सीएम बनाने का रिस्क लेने से बचेंगे।

हेमंत सोरेन को जब साल के शुरुआत में भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था तो उन्होंने इस्तीफा देकर अपने पार्टी बड़े नेता चम्पाई सोरेन को सीएम बनाया। लेकिन जब चम्पाई सोरेन से हेमंत ने जेल से निकलने के बाद सत्ता छीनी तो उन्हें बगावत का सामना करना पड़ा। आलम ये है कि चम्पाई सोरेन पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए।

ठीक इसी तरह जब 2014 में नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को बिहार का सीएम बनाया था और जब सत्ता वापस ली थी तो दोनों नेताओं में मनमुटाव की खबरें सामने आने लगी थी। मांझी 20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे।

कहा जा रहा है कि ऐसी राजनीतिक घटनाक्रम से सबक लेते हुए केजरीवाल आप के किसी बड़े नेता को सीएम बनाने का तो रिस्क नहीं लेंगे।

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एक और तर्क यह है कि केजरीवाल और सिसोदिया के बाद पार्टी में दूसरी पंक्ति के कई नेता सीएम बनने की ख्वाहिश रखते हैं। उनमें से किसी एक को नियुक्त करने से दूसरों में असंतोष पैदा हो सकता है। हालांकि, सुनीता को सत्ता में लाने से यह जोखिम कम हो जाएगा क्योंकि उन्हें पार्टी के भीतर एक अलग व्यक्ति के रूप में देखा जाता है।

पार्टी ने इस दृष्टिकोण का परीक्षण पहले ही कर लिया है। जब केजरीवाल जेल गए थे, तो पूरी पार्टी सुनीता के पीछे खड़ी हो गई थी। यह एकता बताती है कि पार्टी में उनके नेतृत्व को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है और उनका सम्मान किया जाता है। यह दर्शाता है कि अगर वह मुख्यमंत्री बनती हैं तो वह सामंजस्य और स्थिरता बनाए रख सकती हैं।

खैर अभी तय तो कुछ भी नहीं है। दो दिनों ये सामने आएगा कि दिल्ली का अगला नया मुख्यमंत्री कौन होगा।

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मनीष सिसोदिया और संजय सिंह CM रेस क्यों हैं बाहर?

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया दोनों नेता सीएम लिस्ट की रेस से बाहर हैं। असल संजय सिंह और मनीष सिसोदिया दोनों पर दिल्ली शराब घोटाला में लिप्त होने के आरोप लगे हैं। दोनों नेताओं को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में ईडी ने गिरफ्तार किया था। जमानत मिलते वक्त इन दोनों पर कुछ शर्तें लगाई थीं। ये दोनों नेता जेल जा चुके हैं इसलिए केजरीवाल अपने साथ-साथ इनका फैसला भी जनता के ऊपर छोड़ेंगे।

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Who Will Be Delhi Next CM? दिल्ली CM की रेस में कौन-कौन नेता शामिल?

  • आतिशी: वर्तमान में दिल्ली कैबिनेट में पांच विभाग संभाल रही हैं। महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, पर्यटन, कला, संस्कृति और भाषा, लोक निर्माण विभाग और बिजली।
  • कैलाश गहलोत: वर्तमान में आठ विभाग संभाल रहे हैं। कानून, न्याय और विधायी मामले, परिवहन, प्रशासनिक सुधार, आईटी, राजस्व, वित्त, योजना और अन्य सभी विभाग जो किसी भी मंत्री को विशेष रूप से आवंटित नहीं किए गए हैं।
  • सौरभ भारद्वाज: वर्तमान में सात विभाग संभाल रहे हैं: सतर्कता, सेवाएं, स्वास्थ्य, उद्योग, शहरी विकास, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण, और जल।
  • गोपाल राय: वे राष्ट्रीय राजधानी में विकास, सामान्य प्रशासन विभाग, पर्यावरण और वन एवं वन्य जीवन मंत्री हैं।
  • इमरान हुसैन: वे दिल्ली में खाद्य एवं आपूर्ति और चुनाव विभागों को देखते हैं।
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